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म्यांमार के कुख्यात 'केके पार्क' से छुड़ाए गए 360 भारतीय, बिहार के 6 युवक साइबर स्लेवरी से मुक्त होकर पटना पहुंचे

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बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (E.O.U), जो राज्य की प्रमुख आर्थिक एवं साइबर अपराध रोकथाम एजेंसी है, ने एक बड़ी कार्रवाई के तहत साइबर स्लेवरी के शिकार छह युवकों को वापस बिहार ला दिया है। ये सभी युवक दक्षिण-पूर्व एशिया के म्यांमार के मयावाडी स्थित केके पार्क से मुक्त हुए 360 भारतीयों में शामिल थे।

नई दिल्ली से विशेष टीम लेकर आई छह बिहार निवासी

भारत सरकार की समन्वित कार्रवाई के बाद 360 भारतीयों को 18 नवंबर 2025 को थाईलैंड से नई दिल्ली लाया गया था। इनमें से बिहार के 06 युवक शुक्रवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई की विशेष टीम द्वारा पटना लाए गए। मुक्त कराए गए बिहारवासियों के नाम इस प्रकार हैं—
1. साकेत सौरभ, सिवान

2. धर्मेंद्र कुमार, गया

3. नीरज कुमार, सिवान

4. मो. अशद फारूखी, मुंगेर

5. मो. तनवीर आलम, भागलपुर

6. अरविंद चौधरी, सीतामढ़ी

पहले भी लाए जा चुके हैं बिहार के 30 युवक

इससे पहले भी केके पार्क से साइबर स्लेवरी का शिकार बने बिहार के 30 लोगों को वापस लाया जा चुका है—

13 मार्च 2025: 14 युवक

9 नवंबर 2025: 8 युवक

12 नवंबर 2025: 8 युवक
नए समूह के आने के बाद यह संख्या बढ़कर 36 हो गई है।

कैसे फंसाए जाते थे युवक?—नौकरियों का झांसा, और फिर साइबर अपराध में धकेलना

मुक्त कराए गए युवकों ने पूछताछ में बताया कि अलग-अलग एजेंट उन्हें आकर्षक नौकरियों—

सेल्समैन

डाटा एंट्री ऑपरेटर

कुरियर और डिलीवरी वर्कर
—का लालच देकर पहले थाईलैंड ले जाते थे। वहां से उन्हें अवैध तरीके से म्यांमार के मयावाडी स्थित केके पार्क में भेज दिया जाता था।

केके पार्क पहुँचने के बाद युवकों को जबरन साइबर ठगी, ऑनलाइन धोखाधड़ी और डिजिटल फिशिंग जैसे अपराधों में लगाया जाता था।
जो युवक निर्धारित “टारगेट” पूरा नहीं कर पाते, उन्हें—

मारपीट

बंधक बनाना

और आर्थिक दंड
—जैसी प्रताड़नाओं का सामना करना पड़ता था।

E.O.U कर रही है आगे की जांच

आर्थिक अपराध इकाई अब इन युवकों की बयानबाजी, एजेंटों के नेटवर्क और राज्य में फैले मानव तस्करी गिरोहों की कड़ियों का विश्लेषण कर रही है। एजेंसी ने ऐसे मामलों में व्यापक अभियान चलाने के संकेत भी दिए हैं।

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