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रोसड़ा में राशन घोटाले का ‘खुला बाजार’: डीलरों की मनमानी पर अधिकारी खामोश, जनता पिस रही है

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रोसड़ा।रोसड़ा में राशन वितरण व्यवस्था अब मनमानी का अड्डा बन चुकी है। डीलरों के cartel ने ऐसा तंत्र खड़ा कर दिया है जिसमें गरीबों का हक छीना जा रहा है और जिम्मेदार पदाधिकारी आंखों पर पट्टी बांधकर बैठे हैं। हालात यह है कि प्रति व्यक्ति 500 ग्राम से लेकर 1 किलो तक राशन काट लिया जा रहा है, और जब लोग सवाल पूछते हैं तो डीलरों का एक ही जवाब—
“जो मिलता है लो… नहीं तो जहां जाना है जा।”यह सिर्फ बदतमीज़ी नहीं, बल्कि सरकारी योजना की खुली लूट है।सबसे चिंताजनक बात यह कि कई बार मीडिया में खबरें चल चुकी हैं, शिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन प्रशासन की तरफ़ से किसी तरह की कार्रवाई तक नहीं हुई। मानो अधिकारी और डीलर मिलकर एक अघोषित साझेदारी चला रहे हों।

क्या वाकई पदाधिकारियों को कुछ दिखाई नहीं दे रहा?

रोज़ाना हजारों लोगों का हक़ काटा जा रहा है

पंक्ति में खड़े गरीब परिवार मजबूरी में कम राशन लेने को मजबूर

डीलरों की दबंगई पर कोई लगाम नहीं

फ़ील्ड निरीक्षण कागजों में होता है, ग्राउंड पर कहीं नहीं


रोसड़ा में हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि लोग सवाल पूछने से भी डरते हैं क्योंकि डीलरों का रवैया साफ है“हम जैसा देंगे वैसा लेना होगा।”

अधिकारी की चुप्पी सबसे बड़ा सवाल

जब जनता पीड़ित है, जब अनाज सिस्टम से गायब हो रहा है, जब गरीबों का हक़ छिना जा रहा है—
तब प्रशासन की चुप्पी डीलरों से भी बड़ी अपराध साझेदारी जैसी लगती है।रोसड़ा में राशन घोटाला अब सिर से ऊपर निकल चुका है।
जरूरत इस बात की है कि जिला प्रशासन जागे, जांच हो, और हर उस डीलर पर कार्रवाई हो जो गरीबों की थाली तक पहुंचने वाले अनाज पर डाका डाल रहा है।

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