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बिहार में चुनाव ख़त्म, अब कार्रवाई तेज़: SVU की बड़ी छापेमारी में उत्पाद अधीक्षक की अवैध संपत्ति का खुलासा

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बिहार विधानसभा चुनाव का शोर थमते ही राज्य की जांच एजेंसियां फिर अपने तेवर में लौट आई हैं। चुनाव आचार संहिता की वजह से कई कार्रवाई पिछली सीट पर चली गई थीं, लेकिन अब विशेष निगरानी इकाई (SVU) तेज मोड में आ चुकी है। इसी क्रम में रविवार की सुबह औरंगाबाद के उत्पाद अधीक्षक अनिल कुमार आज़ाद के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी ने प्रशासनिक हलचल मचा दी।

1.58 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति का खेल

अनिल कुमार आज़ाद पर आरोप है कि उन्होंने पद का दुरुपयोग कर 1 करोड़ 58 लाख 45 हजार 888 रुपये मूल्य की अवैध संपत्ति खड़ी की है। प्रारंभिक जांच में यह रकम उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक पाई गई, जिसके बाद विस्तृत जांच और दस्तावेज़ी सत्यापन के उपरांत SVU ने DA केस सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की कई धाराओं में FIR दर्ज की।

सुबह-सुबह तीन जिलों में छापेमारी

कोर्ट से तलाशी वारंट मिलते ही SVU की कई टीमें रविवार तड़के औरंगाबाद, जहानाबाद और पटना में एक साथ सक्रिय हो गईं।
– रेलवे स्टेशन रोड स्थित ठिकाना
– सरकारी आवास
– निजी मकान
– पटना के शिवपुरी स्थित "राम निकुंज" आवास

इन सभी जगहों पर दस्तावेज़ों की गहन जांच की गई।

जमीन निवेश का बड़ा जाल!

पटना के शिवपुरी वाले आवास से SVU को शुरुआती जांच में ही जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े कई अहम दस्तावेज़ हाथ लगे।
सूत्रों के मुताबिक टीम को मिले कागज़ात में—

कई रजिस्ट्री पेपर

बैंक पासबुक व लेनदेन विवरण

संदिग्ध खातों की जानकारी

लॉकरों से जुड़े दस्तावेज

निवेश से जुड़े कागजात


साफ तौर पर संकेत दे रहे हैं कि अवैध कमाई को जमीन और निर्माण कार्यों में लगाया गया था। कई जिलों में संपत्ति का जाल फैला होने के भी शुरुआती सबूत मिले हैं।

पहला चरण… आगे और भी खुलासे संभव

अधिकारियों के अनुसार यह कार्रवाई सिर्फ पहला चरण है। SVU पहले ही आज़ाद और उनके रिश्तेदारों के नाम पर कई संपत्तियों की जानकारी जुटा चुकी है, इसलिए आगे की छापेमारी में और भी बड़े खुलासे की संभावना है।

चुनाव के बाद SVU का ऐक्शन मोड

पिछले तीन महीनों में SVU कई बड़े अधिकारियों पर शिकंजा कस चुकी है— अभियंता, ब्लॉक अधिकारी, स्वास्थ्यकर्मी से लेकर पुलिस पदाधिकारी तक। अब चुनाव खत्म होते ही एजेंसी ने साफ संकेत दिया है कि भ्रष्टाचार पर कार्रवाई “फास्ट-ट्रैक मोड” में होगी।

बिहार में चुनावी राजनीति भले बदल गई हो, लेकिन SVU की लगातार कार्रवाई बता रही है कि राज्य का अभियान अब भ्रष्टाचार को कठघरे में खड़ा करने पर केंद्रित है।

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