:
Breaking News

सोनपुर मेला 2025 में धूम मचा रहा है “प्रधान बाबू” — एक करोड़ का जाफराबादी भैंसा बना आकर्षण का स्टार

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

एशिया के सबसे पुराने और चर्चित हरिहर क्षेत्र सोनपुर मेला-2025 में इस बार ऐसी चीज़ ने भीड़ को खींच रखा है, जिसकी चर्चा दूर-दूर तक हो रही है। न कोई सेलिब्रिटी, न कोई नया झूला—बल्कि एक भैंसा! जी हाँ, रोहतास से लाया गया जाफराबादी नस्ल का भैंसा “प्रधान बाबू”, जिसकी कीमत मालिक ने सीधे एक करोड़ रुपये लिख दी है।

मेला परिसर में उसके नाम वाला बड़ा बैनर लगा है, जहाँ लोग फोटो लेने और वीडियो बनाने के लिए लाइन लगाकर खड़े हो जाते हैं। सोशल मीडिया पर “प्रधान बाबू” वायरल हो चुका है और मेला घूमने वालों के लिए यह सबसे बड़ा आकर्षण बन गया है।

मेला बदला, लेकिन ‘प्रधान बाबू’ ने फिर जगाई पुरानी चमक

कभी सोनपुर मेला दुनिया का सबसे बड़ा पशु बाजार माना जाता था—घोड़े, ऊंट, बैल, हाथी और भैंसों की लंबी कतारें इसकी पहचान हुआ करती थीं। लेकिन समय, नियम और बदलती जरूरतों ने मेले का रूप बदल दिया। आज मेला ज्यादा मनोरंजन, झूले, स्टॉल और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए जाना जाता है, जबकि पशु खरीद-बिक्री अब नाम मात्र को रह गई है।

ऐसे माहौल में “प्रधान बाबू” जैसा कीमती और आकर्षक पशु लोगों को पुराने जमाने के सोनपुर मेले की याद दिला रहा है। मेला प्रशासन और पशु प्रेमियों के बीच उम्मीद फिर जागी है कि आने वाले वर्षों में यह मेला अपनी ऐतिहासिक पहचान वापस पा सकता है।

भैंसे की खूबी—क्यों है इतने दाम?

भैंसे के मालिक बीरबल कुमार सिंह बताते हैं कि “प्रधान बाबू” जाफराबादी नस्ल का है, उम्र महज़ 38 महीने, लंबाई करीब 8 फीट और ऊँचाई लगभग 5 फीट। इसका चमकदार काला रंग और विशाल शरीर इसे दूर से ही भीड़ का केंद्र बना देता है।

इसे तैयार करने में भारी मेहनत और खर्च लगा है। मालिक के अनुसार, दिनभर के चारे और देखरेख पर करीब 2,000 रुपये खर्च होते हैं। खानपान से लेकर ट्रेनिंग और देखभाल तक, सबकुछ खास तरीके से किया जाता है ताकि यह अपनी नस्ल और कद-काठी का बेहतरीन नमूना बन सके।

भीड़ देख, फोन लगातार बज रहे हैं

अब तक कोई खरीदार प्रत्यक्ष रूप से नहीं पहुँचा है, लेकिन कई लोग फोन पर कीमत और डील की बात पूछ रहे हैं। मेला देखने आने वाले लोग भैंसे को देखकर मंत्रमुग्ध हो जाते हैं और उसके पास एक सेल्फी लेना जैसे मेले की “रिवाज” बन गई है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *