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पूर्व CJI बीआर गवई ने बनाई मिसाल:

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शपथ के बाद नए CJI सूर्यकांत को लगाया गले, अपनी आधिकारिक कार भी उनके लिए छोड़ी
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नई दिल्ली। देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को राष्ट्रपति भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें हिंदी में शपथ दिलाई। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।जस्टिस सूर्यकांत का कार्यकाल 9 फरवरी 2027 तक रहेगा।

पूर्व CJI गवई ने पेश की अनोखी परंपरा

शपथ ग्रहण समारोह के बाद पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए अपनी आधिकारिक कार अपने उत्तराधिकारी जस्टिस सूर्यकांत के लिए राष्ट्रपति भवन परिसर में ही छोड़ दी।
एएनआई के अनुसार, जस्टिस गवई ने मुख्य न्यायाधीश के पद से हटने के बाद परंपरागत रूप से दी जाने वाली कार में सफर करने से इनकार किया और उसे नए CJI के लिए उपलब्ध छोड़ दिया।
यह कदम न्यायपालिका में विनम्रता और गरिमा की नई मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।

सूर्यकांत का शपथ ग्रहण रहा ऐतिहासिक

इस शपथ ग्रहण की खास बात यह रही कि पहली बार छह देशों—भूटान, केन्या, मलयेशिया, मॉरीशस, नेपाल और श्रीलंका—के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज इस समारोह में शामिल हुए।
यह भारतीय न्यायपालिका की वैश्विक प्रतिष्ठा को दर्शाने वाला क्षण माना जा रहा है।

गांधी जी को अर्पित की श्रद्धांजलि

शपथ के तुरंत बाद CJI सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट पहुंचकर महात्मा गांधी की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की और न्यायपालिका की मूल भावना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

न्यायपालिका के लिए अहम समय: खरगे

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जस्टिस सूर्यकांत को बधाई देते हुए कहा कि आने वाले 14 महीने न्याय व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि नए CJI के नेतृत्व में संवैधानिक मूल्यों और न्याय के प्रति जनता का भरोसा और मजबूत होगा।

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