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Bihar News: कटिहार समाहरणालय में दो पत्नियों का आमना-सामना, आवास सहायक पर पहली शादी छिपाने का आरोप

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Katihar News | कटिहार समाहरणालय में आवास सहायक की दो पत्नियों के आमने-सामने आने से हंगामा, दूसरी पत्नी ने पहली शादी छिपाकर विवाह करने का लगाया आरोप।

कटिहार, 8 अगस्त। कटिहार समाहरणालय परिसर में उस समय अचानक माहौल तनावपूर्ण हो गया, जब एक आवास सहायक की कथित तौर पर दो पत्नियां आमने-सामने आ गईं। दोनों महिलाओं के बीच तीखी कहासुनी के बाद विवाद इस कदर बढ़ गया कि हाथापाई की स्थिति बन गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक दोनों महिलाएं हाथों में डंडा लिए एक-दूसरे की ओर बढ़ रही थीं। बीच में मौजूद आवास सहायक दोनों को शांत कराने का प्रयास करता रहा।

मामला उस समय और चर्चा में आ गया, जब बारसोई इलाके से अपने बेटे के साथ पहुंची दूसरी पत्नी ने अपने पति पर पहली शादी की जानकारी छिपाकर उसके साथ विवाह करने का आरोप लगाया। महिला का कहना है कि उसे विवाह के समय यह बताया गया था कि युवक अविवाहित है। बाद में उसे पति के पहले से शादीशुदा होने और तीन बच्चों का पिता होने की जानकारी मिली।

महिला के अनुसार, करीब 14 वर्ष पहले उसकी शादी फलका थाना क्षेत्र के पोठिया निवासी रंजीत कुमार पासवान के साथ हुई थी। उसका दावा है कि लगभग चार वर्ष पहले दोनों ने कोर्ट मैरिज भी की थी। इस वैवाहिक संबंध से उनका एक बेटा है।

दूसरी पत्नी का आरोप है कि शादी के दौरान रंजीत कुमार पासवान ने अपने पहले से विवाहित होने की जानकारी उससे छिपाई। बाद में जब उसे पति की पहली शादी और बच्चों के बारे में पता चला तो पारिवारिक विवाद गहराता चला गया।

महिला का यह भी आरोप है कि पति वर्तमान में पहली पत्नी के साथ रह रहा है और उसे तथा उसके बेटे के भरण-पोषण के लिए कोई नियमित खर्च नहीं देता। इसी मामले में अपना पक्ष रखने और अपने अधिकार की मांग को लेकर वह कटिहार समाहरणालय पहुंची थी।

समाहरणालय परिसर में पहुंचने के बाद उसका सामना पहली पत्नी से हो गया। इसके बाद दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ा कि वहां मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। दोनों महिलाओं के हाथ में डंडा होने की बात भी सामने आई। स्थिति बिगड़ती देख बीच-बचाव का प्रयास किया गया।

घटना के दौरान आवास सहायक भी दोनों महिलाओं को समझाने की कोशिश करता नजर आया। हालांकि, दोनों पक्षों के बीच पारिवारिक विवाद पहले से चल रहा होने के कारण मौके पर तनाव का माहौल बना रहा।

दूसरी पत्नी का कहना है कि उसने जिस व्यक्ति के साथ वैवाहिक जीवन शुरू किया, उसके बारे में उसे पूरी जानकारी नहीं दी गई। उसका आरोप है कि यदि उसे पहले से यह मालूम होता कि रंजीत कुमार पासवान पहले से शादीशुदा हैं और उनके बच्चे हैं, तो वह इस रिश्ते के संबंध में अलग निर्णय लेती।

वहीं, पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि दोनों महिलाओं के वैवाहिक दावों की वास्तविक कानूनी स्थिति क्या है और संबंधित पक्षों के पास इसके समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज मौजूद हैं। महिला द्वारा कोर्ट मैरिज किए जाने का दावा भी किया गया है, इसलिए मामले का अंतिम निष्कर्ष संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जांच के आधार पर ही सामने आ सकता है।

मामले को फिलहाल पंचायत के स्तर पर सुलझाने की बात कही जा रही है। हालांकि, पारिवारिक विवाद में दोनों पक्षों के अधिकार और जिम्मेदारियों को लेकर आगे क्या निर्णय होता है, यह पंचायत की प्रक्रिया और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

यह पूरा विवाद केवल पति-पत्नी के बीच का पारिवारिक मामला नहीं रह गया है, बल्कि सरकारी कार्यालय परिसर में दोनों पक्षों के सार्वजनिक रूप से आमने-सामने आने के कारण भी चर्चा का विषय बन गया। समाहरणालय जैसे प्रशासनिक परिसर में इस तरह की स्थिति पैदा होने से वहां मौजूद कर्मचारियों और आम लोगों के बीच भी कुछ समय के लिए असहज माहौल बना रहा।

इस मामले में अभी तक सामने आए आरोप एक पक्ष की ओर से लगाए गए हैं। इसलिए आवास सहायक रंजीत कुमार पासवान का पक्ष सामने आना भी जरूरी है। उनके जवाब और संबंधित दस्तावेजों के बिना आरोपों को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

फिलहाल विवाद का समाधान पंचायत के माध्यम से कराने की बात कही जा रही है। यदि दोनों पक्ष आपसी सहमति से मामला सुलझाते हैं तो विवाद समाप्त हो सकता है, लेकिन यदि सहमति नहीं बनती है तो संबंधित पक्ष कानूनी रास्ता अपना सकते हैं।समाहरणालय परिसर में जिला ग्रामीण विकास प्राधिकरण सहित कई महत्वपूर्ण विभाग संचालित होते हैं।ऐसे में प्रशासनिक परिसर में हुई इस घटना ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

पूरे मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पंचायत के स्तर पर दोनों पक्षों के बीच क्या समझौता होता है और क्या दूसरी पत्नी द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में कोई औपचारिक शिकायत या कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ती है।

Alam Ki Khabar की रिपोर्ट में किसी पक्ष के आरोप को अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं माना गया है। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित पक्षों के बयान और आधिकारिक दस्तावेज सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।

परिवार का विवाद जब पहुंचा सरकारी दफ्तर तक

पति-पत्नी के बीच का विवाद सामान्यतः परिवार की चारदीवारी तक सीमित रहता है, लेकिन जब यही विवाद सार्वजनिक स्थान पर पहुंचता है तो स्थिति तेजी से गंभीर हो जाती है। कटिहार समाहरणालय की घटना इसी बात का उदाहरण है। यहां कथित तौर पर वैवाहिक संबंधों को लेकर दो महिलाओं के बीच विवाद सामने आया और मामला सार्वजनिक हो गया।

ऐसे मामलों में सबसे जरूरी बात यह है कि भावनात्मक टकराव को हिंसक रूप लेने से रोका जाए। विवाह से जुड़े विवाद में आरोप-प्रत्यारोप के बजाय दस्तावेज और कानूनी प्रक्रिया को आधार बनाया जाना चाहिए। यदि किसी महिला को लगता है कि उसके साथ धोखा हुआ है या उसके अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो उसके पास कानून के तहत अपनी बात रखने का रास्ता मौजूद है।

दूसरी ओर, किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों को भी जांच और संबंधित पक्ष के बयान के बाद ही अंतिम रूप दिया जाना चाहिए। परिवार से जुड़े विवाद में बच्चों का हित भी महत्वपूर्ण होता है। ऐसे मामलों में पंचायत स्तर पर समाधान की कोशिश तभी प्रभावी हो सकती है, जब दोनों पक्ष बिना दबाव के अपनी बात रखें और समझौते की शर्तें स्पष्ट हों।

कटिहार की इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने रखा है कि निजी पारिवारिक विवाद जब प्रशासनिक परिसर तक पहुंचता है तो उसे शांतिपूर्ण और कानूनी तरीके से सुलझाने की जरूरत और बढ़ जाती है।

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