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Khagaria News: मनीष के बंगले से Tesla तक पहुंची EOU, फर्जी IAS की शाही जिंदगी के पीछे छिपा है करोड़ों का राज!

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Khagaria News | Bihar Crime News | खगड़िया में फर्जी IAS मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद EOU उसकी संपत्ति, महंगी कार, बिजली कनेक्शन और कथित ठगी के स्रोत की जांच कर रही है।

खगड़िया, 11 अगस्त। आलम की खबर: खगड़िया के गोगरी-जमालपुर में कथित तौर पर फर्जी IAS अधिकारी बनकर लोगों पर प्रभाव जमाने और ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार मनीष गुप्ता की मुश्किलें अब बढ़ती दिखाई दे रही हैं। गिरफ्तारी के बाद आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU की टीम उसकी संपत्ति और आर्थिक गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल में जुट गई है। जांच का फोकस उसके आलीशान मकान, महंगी कार, बिजली कनेक्शन और संपत्ति अर्जित करने के संभावित स्रोतों पर है।

पुलिस के आरोपों की सच्चाई और संपत्ति के वास्तविक स्रोत का अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। फिलहाल EOU अलग-अलग दस्तावेजों और उपलब्ध जानकारियों को जोड़कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि मनीष गुप्ता की घोषित और कथित तौर पर अर्जित संपत्ति के बीच क्या संबंध है और उसकी आय का वास्तविक स्रोत क्या रहा है।

आलीशान मकान ने खींचा जांच एजेंसियों का ध्यान

गोगरी-जमालपुर स्थित मनीष गुप्ता का मकान गिरफ्तारी के बाद इलाके में चर्चा का प्रमुख विषय बना हुआ है। स्थानीय स्तर पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, मकान का निर्माण एक साथ नहीं बल्कि कई चरणों में लंबे समय तक कराया गया। घर की बनावट, सजावट और परिसर में लगाए गए सामान इसकी भव्यता को दिखाते हैं।

मकान में महंगे ग्रेनाइट, टाइल्स, सजावटी सामान और नक्काशीदार दरवाजों का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों का दावा है कि घर के कई दरवाजे और अंदरूनी सजावट पर काफी खर्च किया गया है। हालांकि इनकी वास्तविक लागत और संपत्ति में निवेश की राशि की पुष्टि जांच एजेंसियों के दस्तावेजी सत्यापन के बाद ही हो सकेगी।

मकान की सुरक्षा व्यवस्था भी जांच के दौरान चर्चा में आई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, घर और उसके आसपास बड़ी संख्या में CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इनकी संख्या 50 से अधिक होने का दावा किया जा रहा है। इतने बड़े स्तर पर निगरानी व्यवस्था क्यों की गई थी, यह भी जांच का एक हिस्सा हो सकता है।

बाहर से बुलाए जाते थे कारीगर और मजदूर

मकान के निर्माण से जुड़े लोगों के बारे में भी कई जानकारियां सामने आई हैं। स्थानीय लोगों के मुताबिक, घर की विशेष सजावट और नक्काशी के लिए बिहार के अलग-अलग हिस्सों के अलावा दूसरे राज्यों से भी कारीगर बुलाए गए थे।

बताया जा रहा है कि सिलीगुड़ी से भी कुछ कारीगर आए थे, जिन्होंने लंबे समय तक मकान में रहकर काम किया। फिलहाल भी परिसर के बाहर निर्माण और गेट से जुड़ा काम चलने की जानकारी सामने आई है।

हालांकि मजदूरों की संख्या, उनके काम की अवधि और भुगतान से संबंधित दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए इन जानकारियों को फिलहाल स्थानीय दावों के तौर पर ही देखा जा रहा है।

बिजली कनेक्शन को लेकर भी उठे सवाल

मनीष गुप्ता के मकान में तीन फेज बिजली कनेक्शन होने की जानकारी सामने आने के बाद बिजली विभाग से जुड़े पहलू भी चर्चा में आ गए हैं। विभागीय स्तर से मिली जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले बिजली लोड को 15 से बढ़ाकर 25 किलोवाट करने के लिए आवेदन किया गया था।

हालांकि सिर्फ अधिक बिजली लोड या तीन फेज कनेक्शन होना किसी गैरकानूनी गतिविधि का प्रमाण नहीं है। लेकिन EOU अगर संपत्ति और जीवनशैली से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है, तो बिजली खपत और उससे जुड़े रिकॉर्ड भी आर्थिक जांच का हिस्सा बन सकते हैं।

जांच एजेंसी यह देख सकती है कि मकान में बिजली की वास्तविक खपत कितनी थी, लोड बढ़ाने की जरूरत क्यों पड़ी और इससे संबंधित दस्तावेज किसके नाम पर हैं।

सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर दबाव का आरोप

मनीष गुप्ता पर अपने मकान तक सड़क निर्माण को लेकर एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल पर कथित तौर पर दबाव बनाने का आरोप भी सामने आया है।

बताया जाता है कि उसके आवास के पास स्थित सरकारी स्कूल के सामने से सड़क निकालने की कोशिश की जा रही थी। स्कूल के प्रिंसिपल ने इसका विरोध किया। इसके बाद कथित तौर पर एक व्यक्ति को पहचान पत्र दिखाकर उनके पास भेजा गया और खुद को खुफिया एजेंसी का अधिकारी बताया गया।

उस व्यक्ति ने प्रिंसिपल से कहा कि मनीष गुप्ता ने उन्हें अपने आवास पर बुलाया है। अचानक किसी कथित खुफिया अधिकारी का नाम सामने आने से प्रिंसिपल पर दबाव बनने की बात कही जा रही है। हालांकि बाद में सड़क निर्माण की अनुमति नहीं दी गई।

इस पूरे घटनाक्रम में किसकी वास्तविक भूमिका थी और संबंधित व्यक्ति की पहचान क्या थी, यह जांच का विषय है।

महंगी कार भी जांच के घेरे में

मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद गोगरी थाना परिसर में खड़ी एक महंगी कार भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर इसे टेस्ला कार बताया जा रहा है और इसकी कीमत करीब 70 लाख रुपये होने का दावा किया जा रहा है।

कार पर ‘भारत सरकार’ लिखे होने की बात भी सामने आई है। ऐसे में जांच एजेंसियां कार के स्वामित्व, खरीद के दस्तावेज, भुगतान के स्रोत और उसके इस्तेमाल से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल कर सकती हैं।

सिर्फ कार पर कोई शब्द लिखा होना सरकारी स्वामित्व का प्रमाण नहीं माना जा सकता। इसलिए कार से जुड़े वास्तविक तथ्य दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट होंगे।

बचपन के दोस्त को भी नहीं था असली पहचान का अंदाजा

मनीष गुप्ता के बचपन के दोस्त बसंत कुमार मंडल ने उसकी गिरफ्तारी की खबर पर हैरानी जताई है। उनके अनुसार, करीब पांच वर्ष पहले उन्हें जानकारी मिली थी कि मनीष IAS बन गया है और गाजियाबाद का DM है।

बसंत का कहना है कि इसके बाद वह मनीष से मिलने उसके घर गए थे। मुलाकात के दौरान मनीष ने खुद को DM के तौर पर पेश नहीं किया बल्कि किसी दूसरे पद पर होने की बात कही। उनके मुताबिक, मनीष ने उनके बेटे को नौकरी दिलाने का भरोसा भी दिया था, लेकिन बाद में नौकरी नहीं मिली।

अब कथित फर्जी IAS मामले में गिरफ्तारी के बाद पुराने परिचित भी उसके बारे में सामने आ रही जानकारियों को लेकर हैरान हैं।

परिवार में कई भाई, अलग-अलग क्षेत्रों में हैं सदस्य

पारिवारिक जानकारी के मुताबिक, मनीष गुप्ता छह भाइयों में सबसे छोटा बताया जा रहा है। उसके पिता सेवानिवृत्त प्रोफेसर थे और माता-पिता दोनों का निधन हो चुका है।

परिवार के अन्य सदस्य अलग-अलग क्षेत्रों में रहते और काम करते हैं। जानकारी के अनुसार, एक भाई अमेरिका में रहता है, जबकि दूसरा बनारस में प्रोफेसर है। परिवार के अन्य सदस्य बोकारो और दिल्ली में निजी कंपनियों से जुड़े बताए जाते हैं। एक भाई पटना में चाय की दुकान चलाता है।

परिवार के सदस्यों की सामाजिक या पेशेवर स्थिति का मनीष गुप्ता के खिलाफ लगे आरोपों से कोई सीधा संबंध नहीं है। जांच का केंद्र स्वयं मनीष गुप्ता की कथित गतिविधियां और उसकी संपत्ति का स्रोत है।

अब संपत्ति के स्रोत की तलाश में EOU

मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद सबसे बड़ा सवाल उसकी संपत्ति के स्रोत को लेकर है। EOU की जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि उसके नाम या उसके कब्जे में कितनी संपत्ति है, इन संपत्तियों को कब खरीदा गया और इनके लिए धन कहां से आया।

इसके साथ ही महंगी कार, मकान में किया गया खर्च, बिजली कनेक्शन, बैंकिंग लेनदेन और अन्य आर्थिक गतिविधियों से जुड़े रिकॉर्ड की जांच महत्वपूर्ण हो सकती है।

पुलिस की ओर से लगाए गए आरोपों में फर्जी अधिकारी बनकर प्रभाव जमाने और कथित ठगी के जरिए संपत्ति अर्जित करने की बात कही गई है। ऐसे में जांच एजेंसी के सामने यह साबित करना महत्वपूर्ण होगा कि कथित ठगी और संपत्ति के बीच कोई वित्तीय संबंध है या नहीं।

जांच से खुल सकता है कथित फर्जीवाड़े का नेटवर्क

मामला केवल फर्जी IAS बनने तक सीमित है या इसके पीछे कोई बड़ा नेटवर्क भी सक्रिय था, यह जांच के आगे बढ़ने के साथ स्पष्ट होगा। यदि EOU को संपत्ति और कथित ठगी के बीच वित्तीय कड़ियां मिलती हैं तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

फिलहाल आलीशान मकान, महंगी कार, बड़ी संख्या में CCTV कैमरे और बिजली लोड जैसी बातें जरूर चर्चा में हैं, लेकिन इन सभी को अपराध का प्रमाण मानना जल्दबाजी होगी। इनका वास्तविक महत्व जांच एजेंसी के दस्तावेजी साक्ष्यों से ही तय होगा।

मनीष गुप्ता की गिरफ्तारी के बाद अब लोगों की नजर EOU की जांच पर है। संपत्ति के दस्तावेज, आय के स्रोत, कथित ठगी से जुड़े रिकॉर्ड और फर्जी अधिकारी के रूप में इस्तेमाल किए गए संसाधनों की जांच पूरी होने के बाद ही इस पूरे मामले की तस्वीर साफ हो सकेगी।

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फर्जी पद का दिखावा और संपत्ति का सवाल

किसी सरकारी पद का नाम लेकर आम लोगों पर प्रभाव जमाना केवल व्यक्तिगत धोखे का मामला नहीं है, बल्कि इससे पूरी सरकारी व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है। जब कोई व्यक्ति खुद को IAS या किसी दूसरी महत्वपूर्ण सरकारी सेवा का अधिकारी बताकर लोगों से संपर्क करता है, तो सामान्य व्यक्ति उसके दावों पर आसानी से भरोसा कर सकता है।

खगड़िया के इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू अब केवल यह नहीं है कि कथित तौर पर फर्जी अधिकारी कौन था, बल्कि यह भी है कि उसने अपने कथित प्रभाव का इस्तेमाल किस तरह किया और उससे उसे आर्थिक या सामाजिक लाभ कितना मिला।

मनीष गुप्ता की संपत्ति को लेकर सामने आ रही जानकारियां जांच का विषय हैं। आलीशान मकान, महंगी कार या बड़ा बिजली कनेक्शन अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं होते। लेकिन यदि जांच में इन संसाधनों और कथित ठगी से प्राप्त धन के बीच संबंध स्थापित होता है, तो मामला कहीं ज्यादा गंभीर हो सकता है।

इसलिए EOU की जांच में केवल संपत्ति का मूल्यांकन नहीं, बल्कि धन के स्रोत और लेनदेन की पूरी कड़ी सामने लाना जरूरी होगा। इससे यह भी पता चलेगा कि कथित फर्जी अधिकारी का नेटवर्क कितना बड़ा था और कहीं दूसरे लोग भी इस गतिविधि में शामिल तो नहीं थे।

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