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Nalanda News: सदर अस्पताल के 41 डॉक्टरों का जुलाई वेतन रुका, 21 ने नहीं लगाई एक बार भी बायोमेट्रिक हाजिरी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Nalanda News | Bihar Health News | नालंदा सदर अस्पताल में जुलाई की बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर प्रशासन ने सख्ती दिखाई है। 42 डॉक्टरों में 21 ने एक बार भी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं की, जिसके बाद 41 डॉक्टरों के जुलाई वेतन पर रोक लगाई गई।

नालंदा, 11 अगस्त। आलम की खबर: नालंदा सदर अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाया है। जुलाई महीने में बायोमेट्रिक हाजिरी के रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद अस्पताल में तैनात 42 डॉक्टरों में से 41 के वेतन भुगतान पर रोक लगा दी गई है। इनमें 21 डॉक्टर ऐसे पाए गए जिन्होंने पूरे महीने बायोमेट्रिक मशीन पर एक बार भी अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं की।

वहीं आठ डॉक्टरों ने बायोमेट्रिक मशीन का इस्तेमाल तो किया, लेकिन उनकी उपस्थिति नियमित नहीं रही। जुलाई में नियमित रूप से बायोमेट्रिक हाजिरी दर्ज करने वाले डॉक्टरों में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन का नाम सामने आया है। इसी आधार पर उनका जुलाई महीने का वेतन जारी किया गया, जबकि बाकी डॉक्टरों के भुगतान पर रोक लगाई गई है।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद सदर अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

26 जून के निरीक्षण के बाद लिया गया था फैसला

अस्पताल में बायोमेट्रिक हाजिरी को लेकर प्रशासन की सख्ती अचानक नहीं हुई है। इसकी पृष्ठभूमि 26 जून को हुए एक औचक निरीक्षण से जुड़ी है। उस समय अस्पताल की आपात व्यवस्था का जायजा लेने पहुंची टीम को बड़ी संख्या में डॉक्टर ड्यूटी से अनुपस्थित मिले थे।

जानकारी के अनुसार, मोहर्रम के दौरान गोली लगने से घायल एक युवक को सदर अस्पताल से रेफर किए जाने के बाद अस्पताल की व्यवस्था की जांच की गई थी। तत्कालीन डीडीसी रंजन कुमार चौधरी के नेतृत्व में हुए निरीक्षण के दौरान 21 डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद नहीं मिले थे।

निरीक्षण की रिपोर्ट के बाद जिलाधिकारी उदिता सिंह ने मामले को गंभीरता से लिया था। अनुपस्थित डॉक्टरों के वेतन में कटौती का निर्देश देने के साथ अस्पताल में डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति को बायोमेट्रिक व्यवस्था से जोड़ने का निर्णय लिया गया था।

इसके बावजूद जुलाई में बड़ी संख्या में डॉक्टरों की बायोमेट्रिक उपस्थिति रिकॉर्ड में नहीं आने के बाद प्रशासन ने अब वेतन रोकने की कार्रवाई की है।

42 में 21 डॉक्टरों की मशीन पर एक भी एंट्री नहीं

जुलाई महीने के उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार सदर अस्पताल में कुल 42 डॉक्टर तैनात थे। इनमें से 21 डॉक्टरों की बायोमेट्रिक मशीन पर पूरे महीने एक भी उपस्थिति दर्ज नहीं हुई।

आठ डॉक्टरों ने मशीन पर उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन उनकी हाजिरी नियमित नहीं पाई गई। यानी बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू किए जाने के बावजूद बड़ी संख्या में डॉक्टरों की डिजिटल उपस्थिति का रिकॉर्ड प्रशासन को नहीं मिल सका।

ऐसे में अस्पताल में डॉक्टरों के आने और ड्यूटी पूरी करने का प्रमाणिक डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने को प्रशासन ने गंभीरता से लिया है।

पुराने रजिस्टर पर निर्भरता भी बनी रही

अस्पताल में बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने के पीछे मुख्य उद्देश्य डॉक्टरों और कर्मचारियों की उपस्थिति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना था। इससे यह पता चल सके कि कौन कर्मचारी किस समय अस्पताल पहुंचा और ड्यूटी से कब गया।

लेकिन जुलाई के आंकड़ों में बड़ी संख्या में डॉक्टरों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं होने से व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े हुए हैं। बताया गया कि कई मामलों में उपस्थिति का रिकॉर्ड अभी भी पुराने रजिस्टर के माध्यम से दर्ज किया जा रहा था।

प्रशासन अब डिजिटल उपस्थिति को लेकर किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं दिख रहा है।

इन डॉक्टरों ने दर्ज की बायोमेट्रिक हाजिरी

जुलाई महीने में बायोमेट्रिक मशीन पर उपस्थिति दर्ज करने वाले डॉक्टरों में अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. राजीव रंजन के अलावा डॉ. अमरेंद्र कुमार, डॉ. नवीन कुमार, डॉ. नीतू सहाय, डॉ. प्रशांत, डॉ. संगीता वर्मा, डॉ. पावेल और डॉ. त्रिशला शामिल हैं।

हालांकि इन आठ डॉक्टरों में भी अधिकांश की उपस्थिति नियमित नहीं बताई गई है। इस कारण बायोमेट्रिक मशीन पर एंट्री होने के बावजूद सभी को नियमित उपस्थिति की श्रेणी में नहीं रखा गया।

सिर्फ मशीन पर नाम दर्ज होना पर्याप्त नहीं

प्रशासन की कार्रवाई से यह संकेत साफ है कि अब सिर्फ बायोमेट्रिक मशीन पर कभी-कभार उपस्थिति दर्ज करना पर्याप्त नहीं माना जाएगा। डॉक्टरों और कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार नियमित उपस्थिति दर्ज करनी होगी।

अस्पताल जैसी आपात सेवा वाली जगह पर डॉक्टरों की उपलब्धता सीधे मरीजों की चिकित्सा व्यवस्था से जुड़ी होती है। ऐसे में ड्यूटी के दौरान डॉक्टर की मौजूदगी का सही रिकॉर्ड रखना प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण है।

सिविल सर्जन ने दी सख्त कार्रवाई की चेतावनी

सिविल सर्जन डॉ. जयप्रकाश सिंह ने कहा है कि अस्पताल के सभी डॉक्टरों और कर्मचारियों के लिए बायोमेट्रिक हाजिरी अनिवार्य है। इससे कर्मचारियों की उपस्थिति की निगरानी अधिक पारदर्शी तरीके से की जा सकेगी।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जो डॉक्टर या कर्मचारी निर्धारित व्यवस्था के अनुसार बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करेंगे, उनके खिलाफ नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी।

वेतन रोकने की कार्रवाई इसी सख्ती का हिस्सा मानी जा रही है। प्रशासन का संकेत है कि आगे भी उपस्थिति रिकॉर्ड की समीक्षा के आधार पर कार्रवाई जारी रह सकती है।

अस्पताल की व्यवस्था पर उठते हैं बड़े सवाल

नालंदा सदर अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति को लेकर सामने आए आंकड़े सिर्फ वेतन रोकने तक सीमित नहीं हैं। इसका सीधा संबंध अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों से भी है।

सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज डॉक्टरों की उपलब्धता पर निर्भर रहते हैं। यदि किसी विभाग में डॉक्टर नियमित रूप से उपलब्ध नहीं होते हैं तो मरीजों को इलाज के लिए इंतजार करना पड़ सकता है या उन्हें दूसरी जगह जाने की मजबूरी हो सकती है।

ऐसे में बायोमेट्रिक हाजिरी केवल कर्मचारियों की निगरानी का माध्यम नहीं, बल्कि अस्पताल की जवाबदेही तय करने का एक महत्वपूर्ण साधन भी बन सकती है।

अब आगे क्या होगा?

41 डॉक्टरों के जुलाई वेतन पर रोक के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित डॉक्टर अपनी उपस्थिति को लेकर क्या स्पष्टीकरण देते हैं और प्रशासन उस पर क्या निर्णय लेता है।

साथ ही आने वाले महीनों में बायोमेट्रिक रिकॉर्ड की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। यदि व्यवस्था नियमित रूप से लागू होती है तो अस्पताल प्रशासन के पास डॉक्टरों की उपस्थिति का स्पष्ट डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

प्रशासन की कार्रवाई से फिलहाल सदर अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच सख्ती का संदेश गया है। अब चुनौती यह है कि बायोमेट्रिक व्यवस्था सिर्फ कागज पर लागू नियम न रहकर अस्पताल की रोजमर्रा की कार्यप्रणाली का वास्तविक हिस्सा बने।

मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि अस्पताल में निर्धारित समय पर डॉक्टर उपलब्ध हों और आपात स्थिति में इलाज की व्यवस्था प्रभावित न हो।

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डॉक्टरों की हाजिरी से आगे, मरीजों के इलाज का सवाल

सरकारी अस्पताल में डॉक्टरों की उपस्थिति का मुद्दा सिर्फ कर्मचारी अनुशासन तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका सबसे बड़ा असर मरीजों पर पड़ता है। जब कोई व्यक्ति इलाज की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचता है तो उसकी पहली जरूरत यही होती है कि संबंधित डॉक्टर समय पर उपलब्ध हों।

बायोमेट्रिक हाजिरी इस व्यवस्था में पारदर्शिता लाने का एक प्रभावी माध्यम हो सकती है। इससे कागजी उपस्थिति के बजाय वास्तविक समय का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है। लेकिन तकनीक तभी सफल होगी जब कर्मचारी उसका नियमित इस्तेमाल करें और प्रशासन रिकॉर्ड की लगातार निगरानी करे।

नालंदा सदर अस्पताल में 21 डॉक्टरों का पूरे महीने एक भी बायोमेट्रिक एंट्री नहीं करना और आठ डॉक्टरों की उपस्थिति का अनियमित रहना गंभीर सवाल खड़े करता है। प्रशासन ने वेतन रोककर सख्त संदेश दिया है, लेकिन इसके साथ यह भी जरूरी है कि डॉक्टरों को अपना पक्ष रखने का उचित अवसर मिले और वास्तविक परिस्थितियों की जांच हो।

अस्पताल में डॉक्टरों की पर्याप्त उपलब्धता और नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। वहीं डॉक्टरों और कर्मचारियों की भी जिम्मेदारी है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करें।

अंततः किसी भी व्यवस्था की सफलता का पैमाना यह होना चाहिए कि मरीज को समय पर इलाज मिले। यदि बायोमेट्रिक हाजिरी से डॉक्टरों की जवाबदेही बढ़ती है और अस्पताल में सेवाएं बेहतर होती हैं, तो यह व्यवस्था केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि मरीजों के हित में बड़ा सुधार साबित हो सकती है।

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