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Bharat Tiwari Encounter Case: मानवाधिकार आयोग का बड़ा कदम, मुख्य सचिव-DGP और भोजपुर SP से मांगी रिपोर्ट

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Bhojpur News | Bihar Human Rights News | भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले में बिहार मानवाधिकार आयोग ने मुख्य सचिव, DGP और भोजपुर SP से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। न्यायिक जांच आयोग भी 27 अगस्त तक साक्ष्य और बयान जुटा रहा है।

भोजपुर, 11 अगस्त। आलम की खबर: भरत भूषण तिवारी से जुड़े एनकाउंटर मामले की जांच अब दो अलग-अलग स्तरों पर आगे बढ़ रही है। बिहार मानवाधिकार आयोग ने मामले को लेकर राज्य के मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और भोजपुर के पुलिस अधीक्षक को नोटिस जारी कर तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों से दो दिनों के भीतर रिपोर्ट उपलब्ध कराने को कहा है।

दूसरी ओर, मामले की न्यायिक जांच कर रहे आयोग ने भी अपनी प्रक्रिया तेज कर दी है। आयोग ने घटना से संबंधित जानकारी, दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और अन्य साक्ष्य रखने वाले लोगों से 27 अगस्त तक जानकारी उपलब्ध कराने की अपील की है।

मानवाधिकार आयोग ने मांगी रिपोर्ट

बिहार मानवाधिकार आयोग की ओर से जारी नोटिस में मुख्य सचिव, DGP और भोजपुर SP से मामले से संबंधित तथ्यात्मक जानकारी मांगी गई है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डॉ. अजय कुमार पांडे की ओर से की गई शिकायत के बाद सामने आई है।

मानवाधिकार आयोग के उपसचिव-सह-वरीय प्रभारी पदाधिकारी अविनाश कुमार झा के अनुसार, भरत तिवारी से संबंधित 42 मामले आयोग के समक्ष दर्ज किए जा चुके हैं।

मामले से जुड़े अलग-अलग दावों और शिकायतों के कारण आयोग के स्तर पर इसकी निगरानी और जांच का दायरा बढ़ा है। अब अधिकारियों की ओर से दी जाने वाली तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।

न्यायिक जांच आयोग भी जुटा रहा साक्ष्य

भरत भूषण तिवारी मामले में न्यायिक जांच भी समानांतर रूप से चल रही है। जांच आयोग अब घटना से जुड़े दस्तावेज, गवाहों की जानकारी और अन्य साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से जुटाने की प्रक्रिया में है।

आयोग के सचिव सह सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुबोध कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि आम लोगों से घटना से जुड़ी जानकारी और साक्ष्य उपलब्ध कराने की अपील की गई है।

आयोग के अनुसार, जिन लोगों के पास घटना से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत उसे जांच आयोग तक पहुंचा सकते हैं।

27 अगस्त तक दे सकते हैं साक्ष्य

न्यायिक जांच आयोग ने साक्ष्य और बयान उपलब्ध कराने के लिए 27 अगस्त तक की समयसीमा तय की है। आयोग का कहना है कि घटना से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी रखने वाले लोग सामने आएं।

विशेष रूप से इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य या घटना से संबंधित अन्य सामग्री रखने वालों से उसे आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने की अपील की गई है।

शपथ पत्र के जरिए भी साक्ष्य देने का विकल्प

आयोग के सचिव के अनुसार, घटना से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक या अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्य रखने वाले लोग शपथ पत्र के माध्यम से अपनी जानकारी और सामग्री आयोग को दे सकते हैं।

10 अगस्त तक दोनों पक्षों से कोई शपथ पत्र नहीं मिला था। हालांकि आयोग के पास चार-पांच आवेदन पहुंचे हैं। इनमें एक व्यक्ति ने अपने पास घटना से संबंधित साक्ष्य होने की जानकारी दी है। आयोग की ओर से संबंधित व्यक्ति को 27 अगस्त तक सामग्री उपलब्ध कराने की सूचना दी गई है।

इसके बाद जांच प्रक्रिया अगले चरण में प्रवेश करेगी।

गवाहों के बयान का भी होगा परीक्षण

आयोग की योजना के अनुसार, निर्धारित समयसीमा के बाद प्राप्त साक्ष्यों और गवाहों के बयानों की पड़ताल की जाएगी। इसके दौरान उपलब्ध सामग्री और मौखिक गवाही के बीच तथ्यों का मिलान किया जाएगा।

जांच के पहले चरण में जिन लोगों का बयान किसी कारण से दर्ज नहीं हो सका था, उन्हें भी दूसरे चरण में अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाएगा।

साक्ष्यों और बयानों का होगा मिलान

न्यायिक जांच की अगली प्रक्रिया में आयोग के सामने आने वाले दस्तावेजों, इलेक्ट्रॉनिक सामग्री और गवाहों के बयानों का आपस में मिलान किया जाएगा।

इस प्रक्रिया का उद्देश्य घटना से जुड़े तथ्यों की अलग-अलग जानकारियों को एक साथ रखकर उनकी जांच करना है। आयोग इसके आधार पर आगे की कार्रवाई की दिशा तय करेगा।

पूर्व IPS अमिताभ दास से भी साक्ष्य देने की अपील

मामले में पूर्व IPS अमिताभ दास की ओर से भी आवेदन दिए जाने की जानकारी सामने आई है। न्यायिक जांच आयोग ने कहा है कि यदि उनके पास घटना से संबंधित कोई सामग्री या साक्ष्य है तो उसे भी आयोग के समक्ष प्रस्तुत किया जा सकता है।

आयोग का कहना है कि जांच में उपयोगी किसी भी प्रमाण या जानकारी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत रिकॉर्ड पर लिया जा सकता है।

बिलौटी पुलिस फायरिंग से जुड़े साक्ष्य भी मांगे

न्यायिक जांच आयोग ने 24 जुलाई को बिलौटी पुलिस फायरिंग से संबंधित जानकारी और साक्ष्य देने के लिए सार्वजनिक अपील की थी।

आयोग की ओर से कहा गया था कि घटना के बारे में प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले लोग सामने आएं। साथ ही किसी के पास वीडियो, फोटो, अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामग्री या कोई महत्वपूर्ण दस्तावेज हो तो उसे जांच आयोग के समक्ष उपलब्ध कराया जा सकता है।

अब रिपोर्ट और साक्ष्य दोनों पर नजर

भरत तिवारी मामले में अब जांच की दिशा दो महत्वपूर्ण स्तरों पर आगे बढ़ रही है। मानवाधिकार आयोग ने जहां राज्य के शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी है, वहीं न्यायिक जांच आयोग आम लोगों से साक्ष्य और बयान जुटा रहा है।

मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट और न्यायिक आयोग के सामने आने वाले साक्ष्यों से मामले से जुड़े कई पहलुओं की तस्वीर आगे स्पष्ट हो सकती है।

हालांकि अभी दोनों स्तरों पर जांच जारी है। ऐसे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय जांच एजेंसियों और आयोगों के सामने प्रस्तुत होने वाले दस्तावेज, बयान और अन्य साक्ष्यों का इंतजार करना जरूरी है।

27 अगस्त की समयसीमा के बाद न्यायिक जांच आयोग की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है और मानवाधिकार आयोग को अधिकारियों की ओर से क्या तथ्यात्मक रिपोर्ट मिलती है, इस पर अब निगाहें रहेंगी।

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जांच की निष्पक्षता ही बढ़ाएगी भरोसा

किसी भी एनकाउंटर से जुड़े मामले में जांच की निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है। ऐसे मामलों में केवल आरोप या प्रत्यारोप के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होता। घटनास्थल से मिले साक्ष्य, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान, आधिकारिक रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध सामग्री को एक साथ रखकर ही वास्तविक स्थिति समझी जा सकती है।

भरत तिवारी मामले में मानवाधिकार आयोग और न्यायिक जांच आयोग की समानांतर प्रक्रिया इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि दोनों स्तरों पर अलग-अलग पहलुओं की जांच हो रही है। एक तरफ प्रशासन और पुलिस से तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है, तो दूसरी ओर आम लोगों से भी साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

जांच आयोग द्वारा 27 अगस्त तक साक्ष्य देने का अवसर देना भी महत्वपूर्ण है। यदि किसी व्यक्ति के पास घटना से संबंधित वीडियो, फोटो, दस्तावेज या प्रत्यक्ष जानकारी है तो उसे सामने आना चाहिए। इससे जांच को तथ्यों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

सबसे जरूरी यह है कि जांच किसी पूर्व निर्धारित निष्कर्ष के बजाय उपलब्ध प्रमाणों के आधार पर आगे बढ़े। जिन लोगों के बयान लिए जाएं, उनके दावों का उपलब्ध साक्ष्यों से मिलान हो और यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय हो।

मामला संवेदनशील है। इसलिए पारदर्शी और तथ्य आधारित जांच ही परिवार, प्रशासन और आम लोगों के बीच भरोसा कायम करने का सबसे मजबूत रास्ता हो सकती है।

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