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Patna News: छह साल में 19 गुना बढ़ी CNG की खपत, रोज 1.40 लाख किलो की मांग; 41 स्टेशन भी कम पड़ रहे

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Alam Ki Khabar | Patna News | Bihar News | CNG News | पटना में CNG की मांग तेजी से बढ़ी है। छह साल में खपत करीब 19 गुना बढ़कर 1.40 लाख किलो प्रतिदिन पहुंच गई है। शहर और आसपास CNG स्टेशनों की संख्या भी बढ़कर 41 हो गई है।

पटना, 11 अगस्त। आलम की खबर: राजधानी पटना में सीएनजी वाहनों की बढ़ती संख्या का असर गैस की मांग पर साफ दिखाई दे रहा है। पिछले कुछ वर्षों में सीएनजी की खपत में तेज उछाल आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक पटना में अब प्रतिदिन करीब 1.40 लाख किलो सीएनजी की खपत हो रही है। बढ़ती मांग को देखते हुए शहर और आसपास के इलाकों में सीएनजी स्टेशनों का नेटवर्क भी लगातार फैलाया जा रहा है।

गेल इंडिया ने पटना में सीएनजी आपूर्ति की शुरुआत कुछ साल पहले सीमित संख्या में स्टेशनों के साथ की थी। उस समय राजधानी में सीएनजी का इस्तेमाल करने वाले वाहनों की संख्या भी काफी कम थी। धीरे-धीरे ऑटो, टैक्सी, निजी कार और अन्य वाहनों में सीएनजी की लोकप्रियता बढ़ी और इसके साथ गैस की मांग भी लगातार ऊपर जाती गई।

अब पटना और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी स्टेशनों की संख्या 41 तक पहुंच चुकी है। इसके बावजूद कई प्रमुख पंपों पर वाहनों की कतार और कुछ इलाकों में आपूर्ति संबंधी शिकायतें यह संकेत दे रही हैं कि मांग के मुकाबले नेटवर्क को अभी और मजबूत करने की जरूरत है।

19 लाख किलो से 3.60 करोड़ किलो तक पहुंची सालाना आपूर्ति

गेल के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में पटना में करीब 19 लाख किलो सीएनजी की आपूर्ति हुई थी। इसके बाद मांग में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई।

वर्ष 2020-21 में आपूर्ति बढ़कर करीब 47 लाख किलो हो गई। 2021-22 में यह आंकड़ा 1.27 करोड़ किलो तक पहुंच गया। इसके अगले वर्ष यानी 2022-23 में करीब 2.52 करोड़ किलो सीएनजी की आपूर्ति हुई।

वर्ष 2023-24 में यह मात्रा बढ़कर लगभग 3.14 करोड़ किलो हो गई। वहीं 2024-25 में वार्षिक आपूर्ति करीब 3.60 करोड़ किलो तक पहुंचने का अनुमान बताया गया था।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि कुछ ही वर्षों में पटना में सीएनजी का बाजार तेजी से विस्तारित हुआ है। वर्तमान दैनिक खपत को देखें तो राजधानी में हर दिन करीब 1.40 लाख किलो सीएनजी की जरूरत पड़ रही है।

एक साल में 70 हजार से 1.40 लाख किलो प्रतिदिन पहुंची मांग

पटना में सीएनजी की रोजाना खपत भी तेजी से बढ़ी है। वर्ष 2024 के दौरान यह करीब 70 हजार किलो प्रतिदिन के आसपास थी। वर्ष 2025 में मांग बढ़कर करीब 90 हजार किलो प्रतिदिन पहुंची।

अब यह आंकड़ा करीब 1.40 लाख किलो प्रतिदिन बताया जा रहा है। यानी वाहनों की संख्या और सीएनजी पर निर्भरता बढ़ने के साथ सप्लाई सिस्टम पर दबाव भी बढ़ा है।

इसका सबसे सीधा असर सीएनजी पंपों पर नजर आता है। व्यस्त इलाकों के स्टेशनों पर वाहन चालकों को कई बार लंबी कतार में इंतजार करना पड़ता है।

41 स्टेशन, फिर भी कुछ इलाकों में परेशानी

पटना और आसपास सीएनजी स्टेशनों की संख्या बढ़कर 41 हो गई है। इसके बावजूद शहर के कुछ हिस्सों में मांग और उपलब्धता के बीच अंतर दिखाई देता है।

शहरी क्षेत्रों में जहां कई पंपों पर एक साथ बड़ी संख्या में वाहन पहुंचते हैं, वहीं बिहटा जैसे बाहरी इलाकों में भी आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें सामने आती रही हैं।

वाहन चालकों का कहना है कि कुछ मौकों पर पंपों पर सीएनजी उपलब्ध नहीं होने की सूचना मिलती है। ऐसी स्थिति में उन्हें दूसरे स्टेशन का रुख करना पड़ता है।

एक पंप से दूसरे पंप तक पहुंचने में समय और ईंधन दोनों खर्च होते हैं। खासकर ऑटो और व्यावसायिक वाहन चलाने वालों के लिए सीएनजी की उपलब्धता सीधे उनकी रोजाना की कमाई से जुड़ी हुई है।

नौबतपुर मदर स्टेशन की अहम भूमिका

पटना और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी-पीएनजी आपूर्ति के लिए नौबतपुर स्थित मदर स्टेशन लंबे समय से महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। बढ़ती मांग के बीच सप्लाई नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में नए ढांचे पर भी काम किया जा रहा है।

गर्दनीबाग में मदर सीएनजी स्टेशन विकसित किए जाने से राजधानी के कई इलाकों में आपूर्ति व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश की जा रही है।

गर्दनीबाग के साथ चितकोहरा, अनिसाबाद, बेउर और आसपास के क्षेत्रों में सीएनजी की उपलब्धता को आसान बनाने में इस व्यवस्था की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

60 हजार से ज्यादा CNG वाहन सड़कों पर

पटना में सीएनजी की मांग बढ़ने की सबसे बड़ी वजह वाहनों की संख्या में लगातार इजाफा है। राजधानी में प्रतिदिन 60 हजार से अधिक सीएनजी वाहन चलने का अनुमान है।

इनमें 40 हजार से ज्यादा ऑटो शामिल हैं। इसके अलावा करीब 20 हजार निजी कारों के सीएनजी पर चलने की जानकारी दी गई है। बस और अन्य श्रेणी के वाहन भी सीएनजी का इस्तेमाल कर रहे हैं।

ऑटो और टैक्सी चालकों के लिए CNG क्यों बनी पसंद?

पेट्रोल और डीजल की तुलना में अपेक्षाकृत कम परिचालन लागत सीएनजी वाहनों की लोकप्रियता का एक बड़ा कारण है। व्यावसायिक वाहन चलाने वालों के लिए ईंधन की लागत रोजाना के खर्च का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है।

इसके अलावा शहरों में प्रदूषण कम करने की जरूरत के कारण भी गैस आधारित परिवहन को बढ़ावा दिया जा रहा है। पटना जैसे तेजी से बढ़ते शहर में ऑटो, टैक्सी और निजी वाहनों का सीएनजी की ओर बढ़ना इसी बदलाव का हिस्सा है।

मांग बढ़ी तो सप्लाई सिस्टम पर भी दबाव

सीएनजी की खपत में लगातार वृद्धि ने आपूर्ति व्यवस्था के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है। अब सिर्फ स्टेशनों की संख्या बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि पाइपलाइन, मदर स्टेशन और अन्य आपूर्ति ढांचे की क्षमता को भी मांग के अनुरूप बढ़ाना होगा।

यदि किसी इलाके में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ती है और उसके अनुपात में स्टेशन या सप्लाई क्षमता नहीं बढ़ती तो पंपों पर भीड़ बढ़ना स्वाभाविक है।

मई 2025 में आपूर्ति प्रभावित होने के दौरान पटना के कई सीएनजी स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतारें देखी गई थीं। इस घटना ने यह दिखाया था कि राजधानी का परिवहन तंत्र सीएनजी पर कितना निर्भर हो चुका है।

आगे और बढ़ सकती है CNG की मांग

पटना में सीएनजी वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ आने वाले समय में मांग और बढ़ने की संभावना है। यदि नए ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन सीएनजी आधारित होते हैं तो मौजूदा नेटवर्क पर दबाव और बढ़ सकता है।

ऐसे में शहर के भीतर नए स्टेशन खोलने के साथ बाहरी इलाकों में भी पर्याप्त सप्लाई सुनिश्चित करना जरूरी होगा। खासकर बिहटा जैसे क्षेत्रों में नियमित उपलब्धता वाहन चालकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।

राजधानी में सीएनजी का विस्तार पर्यावरण और परिवहन दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसका लाभ तभी पूरी तरह मिलेगा जब उपभोक्ताओं को जरूरत के समय आसानी से गैस उपलब्ध हो।

फिलहाल पटना में 41 सीएनजी स्टेशन और प्रतिदिन करीब 1.40 लाख किलो की खपत इस बात का संकेत है कि राजधानी का परिवहन तेजी से गैस आधारित ईंधन की ओर बढ़ रहा है। अब चुनौती इस बढ़ती मांग के अनुरूप सप्लाई नेटवर्क को लगातार मजबूत करने की है।

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CNG की बढ़ती मांग के साथ मजबूत हो सप्लाई सिस्टम

पटना में सीएनजी की बढ़ती खपत शहर के परिवहन क्षेत्र में हो रहे बदलाव का संकेत है। हजारों ऑटो, टैक्सी और निजी वाहन सीएनजी पर निर्भर हो चुके हैं। कम परिचालन लागत और प्रदूषण कम करने की जरूरत ने इस बदलाव को और गति दी है।

लेकिन किसी भी ईंधन व्यवस्था की सफलता केवल मांग बढ़ने से तय नहीं होती। असली कसौटी यह है कि उपभोक्ता को ईंधन आसानी से और नियमित रूप से मिल रहा है या नहीं। यदि किसी स्टेशन पर घंटों इंतजार करना पड़े या गैस उपलब्ध नहीं हो तो वाहन चालक के लिए सीएनजी का लाभ कम हो जाता है।

इसलिए पटना में सीएनजी नेटवर्क के विस्तार के साथ सप्लाई की क्षमता बढ़ाना भी जरूरी है। शहर के व्यस्त इलाकों में अधिक क्षमता वाले स्टेशन और बाहरी क्षेत्रों में नियमित आपूर्ति की व्यवस्था की जानी चाहिए।

बढ़ती मांग को देखते हुए भविष्य की जरूरतों का आकलन अभी से करना होगा। यदि सीएनजी वाहनों की संख्या इसी गति से बढ़ती रही तो आज की व्यवस्था आने वाले वर्षों में पर्याप्त नहीं हो सकती।

पटना के लिए यह अच्छा संकेत है कि स्वच्छ ईंधन की ओर वाहनों का रुझान बढ़ रहा है। अब जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की है कि इस बदलाव के साथ बुनियादी ढांचा भी उसी गति से आगे बढ़े। तभी सीएनजी पर बढ़ती निर्भरता वाहन चालकों के लिए सुविधा बनेगी, परेशानी नहीं।

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