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Bihar Police News: सामान्य ड्यूटी में AK-47, इंसास और SLR पर रोक, बिहार पुलिस में हथियार इस्तेमाल का बदलेगा तरीका

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार पुलिस की सामान्य विधि-व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण ड्यूटी में AK-47, इंसास और SLR के इस्तेमाल को सीमित किया गया है। गंभीर परिस्थितियों में ही इन हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति होगी।

पटना, 13 अगस्त। आलम की खबर: बिहार में पुलिस की सामान्य ड्यूटी के दौरान हथियारों के इस्तेमाल को लेकर पुलिस मुख्यालय ने महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। डीजीपी विनय कुमार के निर्देश के बाद राज्य के सभी 38 जिलों में विधि-व्यवस्था, सामान्य गश्ती और भीड़ नियंत्रण जैसी ड्यूटी के दौरान AK-47, इंसास और SLR जैसे असाल्ट हथियारों के इस्तेमाल को सीमित करने पर जोर दिया गया है। पुलिस मुख्यालय की व्यवस्था का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिस परिस्थिति में जिस स्तर के हथियार की जरूरत हो, पुलिस बल उसी के अनुरूप हथियार लेकर मौके पर पहुंचे।

नई व्यवस्था को केवल हथियारों पर रोक के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे पुलिसिंग के तौर-तरीके में बदलाव की कोशिश भी दिखाई देती है। आम तौर पर किसी प्रदर्शन, जुलूस, भीड़ या सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में बड़ी संख्या में पुलिस बल की तैनाती होती है। ऐसे मौकों पर अत्याधुनिक असाल्ट राइफल से लैस जवानों की मौजूदगी कई बार आम लोगों के बीच तनाव या भय का माहौल पैदा कर सकती है। पुलिस मुख्यालय अब ऐसी ड्यूटी में आवश्यकता के मुताबिक निर्धारित और अपेक्षाकृत छोटे हथियारों के इस्तेमाल पर जोर दे रहा है।

हर ड्यूटी में AK-47 ले जाना जरूरी नहीं

पुलिस मुख्यालय के निर्देश का सीधा मतलब यह नहीं है कि बिहार पुलिस से AK-47, इंसास या SLR हटाए जा रहे हैं। इन हथियारों की उपयोगिता गंभीर और संवेदनशील अभियानों में बनी रहेगी। अंतर सिर्फ इतना है कि सामान्य पुलिसिंग और विशेष अभियान के लिए हथियारों के इस्तेमाल की सीमा अधिक स्पष्ट कर दी गई है।

सामान्य गश्ती, भीड़ नियंत्रण, प्रदर्शन, जुलूस या नियमित विधि-व्यवस्था की ड्यूटी में पुलिसकर्मियों को परिस्थिति के अनुरूप निर्धारित हथियारों के साथ तैनात किया जाएगा। वहीं ऐसी स्थिति जहां पुलिस बल को भारी और गंभीर खतरे का सामना करना पड़े, वहां उपलब्ध संसाधनों और अभियान की जरूरत के अनुसार असाल्ट हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकेगा।

गंभीर अभियान में असाल्ट हथियारों की जरूरत बरकरार

उग्रवाद, आतंकवाद, सशस्त्र अपराधियों के खिलाफ विशेष कार्रवाई या अत्यधिक जोखिम वाले ऑपरेशन में AK-47, इंसास और SLR जैसे हथियार पुलिस के लिए महत्वपूर्ण हो सकते हैं। इसलिए इन हथियारों पर पूर्ण प्रतिबंध नहीं लगाया गया है। नई व्यवस्था का फोकस इनके अनावश्यक या नियमित प्रदर्शन को कम करना है।

इससे पुलिस बल के लिए एक तरह की स्पष्ट कार्यप्रणाली तय होती है। सामान्य स्थिति में सामान्य हथियार और विशेष खतरे की स्थिति में जरूरत के मुताबिक अधिक क्षमता वाले हथियार। पुलिस मुख्यालय इसी अंतर को व्यवहार में लागू करना चाहता है।

सीवान की घटना के बाद बढ़ी निगरानी

हथियारों के इस्तेमाल को लेकर यह सख्ती सीवान की एक घटना के बाद विशेष रूप से चर्चा में आई है। बिहार बंद के दौरान सीवान में एक पुलिसकर्मी द्वारा AK-47 से फायरिंग किए जाने का मामला सामने आया था। पुलिस मुख्यालय की ओर से कहा गया कि इस फायरिंग के लिए किसी अधिकारी की ओर से आदेश नहीं दिया गया था।

घटना के बाद सिपाही अभिषेक कुमार पटेल को निलंबित किया गया। अब उसके खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश भी दिया गया है। इस कार्रवाई से पुलिस मुख्यालय ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि ड्यूटी के दौरान हथियारों के इस्तेमाल को लेकर तय प्रक्रिया से हटना गंभीर मामला माना जाएगा।

सीवान की घटना में AK-47 के इस्तेमाल को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद सामान्य कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में असाल्ट हथियारों की जरूरत और उनके प्रदर्शन को लेकर बहस तेज हुई।

पुलिसिंग में दिख सकता है नया बदलाव

बिहार पुलिस के लिए यह फैसला सिर्फ हथियार बदलने तक सीमित नहीं है। इसका असर पुलिस की सार्वजनिक छवि और भीड़ के साथ उसके व्यवहार पर भी पड़ सकता है। किसी प्रदर्शन या जुलूस में पुलिस की मौजूदगी का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है। ऐसे में अत्यधिक हथियारबंद पुलिस बल की मौजूदगी से स्थिति शांत होने के बजाय कई बार तनाव बढ़ने की आशंका रहती है।

नई व्यवस्था के तहत पुलिस को परिस्थिति के हिसाब से प्रतिक्रिया देने पर ज्यादा जोर देना होगा। इसका अर्थ यह है कि सामान्य स्थिति में पुलिस की प्राथमिकता भीड़ को नियंत्रित करना, रास्ता सुरक्षित रखना, कानून-व्यवस्था बनाए रखना और संभावित विवाद को बढ़ने से रोकना होगी।

38 जिलों में लागू होगा निर्देश

बिहार में पुलिस की सामान्य विधि-व्यवस्था ड्यूटी अलग-अलग जिलों में स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार होती है। कहीं प्रदर्शन की स्थिति बनती है तो कहीं धार्मिक जुलूस, राजनीतिक कार्यक्रम, वीआईपी मूवमेंट या किसी विवाद के कारण अतिरिक्त पुलिस बल की जरूरत पड़ती है। ऐसे सभी मौकों पर हथियारों के चयन को परिस्थिति के अनुसार रखने की व्यवस्था की गई है।

पुलिस मुख्यालय का यह रुख इस बात पर भी जोर देता है कि आधुनिक हथियार पुलिस के पास मौजूद जरूर रहें, लेकिन उनका इस्तेमाल तभी हो जब हालात इसकी मांग करें। इससे पुलिस की कार्यप्रणाली में जरूरत और खतरे के अनुपात को प्राथमिकता देने की कोशिश दिखाई देती है।

हथियार से ज्यादा जरूरी होगी परिस्थिति की समझ

पुलिस की जिम्मेदारी केवल अपराधियों से मुकाबला करना नहीं है। सामान्य विधि-व्यवस्था में पुलिस को बड़ी संख्या में नागरिकों के बीच काम करना पड़ता है। इसलिए हथियारों का चुनाव भी पुलिसिंग का हिस्सा बन जाता है। अत्यधिक हथियारों का प्रदर्शन जहां डर पैदा कर सकता है, वहीं कम तैयारी वाली पुलिस व्यवस्था गंभीर खतरे की स्थिति में मुश्किल पैदा कर सकती है।

ऐसे में नई व्यवस्था दोनों स्थितियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। सामान्य ड्यूटी में अनावश्यक रूप से भारी हथियार नहीं, जबकि वास्तविक और गंभीर खतरे की स्थिति में पुलिस को आवश्यक क्षमता वाले हथियार उपलब्ध रहेंगे।

बिहार पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट भी पुलिसिंग में कानून-व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और जनसेवा को प्रमुख जिम्मेदारियों के रूप में रेखांकित करती है।

Editorial: हथियारों से नहीं, संतुलित पुलिसिंग से बनेगा भरोसा

पुलिस के पास आधुनिक हथियार होना जरूरी है, लेकिन हर परिस्थिति में उनका प्रदर्शन करना जरूरी नहीं है। कानून-व्यवस्था की ड्यूटी में पुलिस को अपराधियों से निपटने के साथ-साथ आम नागरिकों के बीच विश्वास भी बनाए रखना होता है। यही कारण है कि सामान्य ड्यूटी और विशेष अभियान के बीच हथियारों के इस्तेमाल की स्पष्ट सीमा जरूरी है।

AK-47, इंसास और SLR जैसे हथियार गंभीर परिस्थितियों के लिए उपयोगी संसाधन हैं। लेकिन जब पुलिस किसी सामान्य जुलूस, प्रदर्शन या भीड़ के बीच तैनात हो, तब जरूरत से अधिक हथियारबंद मौजूदगी लोगों के मन में भय पैदा कर सकती है। दूसरी तरफ, यदि किसी सशस्त्र अपराधी या आतंकवादी खतरे का सामना हो तो पुलिस के पास पर्याप्त क्षमता वाले हथियार उपलब्ध होना भी उतना ही जरूरी है।

इस लिहाज से बिहार पुलिस का नया निर्देश संतुलित पुलिसिंग की दिशा में देखा जा सकता है। असली चुनौती अब इसके जमीन पर सही तरीके से लागू होने की होगी। जवानों को स्पष्ट प्रशिक्षण, कमांड की जिम्मेदारी और परिस्थिति के अनुसार निर्णय लेने की क्षमता देनी होगी।

पुलिस की ताकत केवल उसके हथियारों में नहीं, बल्कि अनुशासन, प्रशिक्षण और जनता के भरोसे में होती है। यदि सामान्य कानून-व्यवस्था में पुलिस कम हथियारों के साथ भी प्रभावी नियंत्रण बनाए रखती है और गंभीर परिस्थितियों में पूरी क्षमता के साथ कार्रवाई करती है, तो यह व्यवस्था पुलिस और जनता के बीच विश्वास मजबूत करने में मदद कर सकती है।

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