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बिहार के स्कूलों में शिक्षकों की वरीयता का नया नियम लागू, छह लाख शिक्षकों पर पड़ेगा असर

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पटना। राज्य भर के प्राथमिक, मध्य और उच्च माध्यमिक विद्यालयों में शिक्षकों की वरीयता तय करने को लेकर शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। नई व्यवस्था के लागू होने के साथ ही करीब छह लाख शिक्षकों को प्रधानाध्यापक और प्रधान शिक्षक के प्रभार वितरण का रास्ता स्पष्ट हो गया है। विभागीय आदेश शिक्षा सचिव दिनेश कुमार के हस्ताक्षर से जारी किया गया है।

किसे मिलेगी वरीयता?

शिक्षा विभाग की ओर से गठित समिति की अनुशंसाओं के आधार पर सभी श्रेणियों के शिक्षकों के बीच आपसी वरीयता का नया फार्मूला तय किया गया है।

1. माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय

जिन स्कूलों में प्रमंडलीय संवर्ग के सहायक शिक्षक (मरणशील संवर्ग) पदस्थापित हैं, उन्हें

स्थानीय निकाय शिक्षक (नियोजित शिक्षक)

विशिष्ट शिक्षक

विद्यालय अध्यापक
पर वरीयता मिलेगी।


अगर प्रमंडलीय संवर्ग के सहायक शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो 2021 की नियुक्ति नियमावली तथा 2023 के संशोधित प्रावधानों के आधार पर वरीयता तय होगी।
इसी श्रेणी में आने वाले शिक्षकों के लिए 9वीं–12वीं तक पढ़ाने का न्यूनतम आठ वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया है।

2. प्राथमिक और मध्य विद्यालय

इन्हीं नियमों की तर्ज पर प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में जिला संवर्ग के सहायक शिक्षक (मरणशील संवर्ग) को शीर्ष वरीयता मिलेगी।

यदि ऐसे शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो

बिहार प्रारंभिक विद्यालय प्रधान शिक्षक नियमावली 2024

तथा 2018 की प्रोन्नति व स्थानांतरण नियमावली
के आधार पर प्रधान शिक्षक का प्रभार दिया जाएगा।


6ठी से 8वीं तक पढ़ाने वाले शिक्षकों के लिए चार वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया है। योग्य शिक्षकों को प्रभारी प्रधानाध्यापक का प्रभार दिया जाएगा।

अनुभव के आधार पर ही अधिकार

नए निर्धारण के अनुसार—

पहली से पांचवीं के शिक्षकों को प्रधान शिक्षक का दायित्व तभी मिलेगा जब उनके पास प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में कम से कम आठ वर्ष का अनुभव होगा।

इसी प्रकार माध्यमिक स्तर पर भी आठ वर्ष का अनुभव अनिवार्य रहेगा।

एक से अधिक शिक्षक योग्य हुए तो?

यदि किसी विद्यालय में एक से अधिक शिक्षक वरीयता की सभी अहर्ताएँ पूरी करते हैं, तो फैसला इस प्रकार होगा—

1. जन्मतिथि के आधार पर वरिष्ठता तय होगी।

2. जन्मतिथि समान होने पर नाम का अंग्रेजी वर्णक्रम तय करेगा कि कौन वरीय माना जाएगा।

क्या होगा असर?

नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्यभर के स्कूलों में प्रभार और नेतृत्व व्यवस्था अधिक स्पष्ट होगी। लंबे समय से लंबित वरीयता विवाद और अस्पष्टताओं को दूर करने का दावा किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि इससे स्कूल संचालन में पारदर्शिता और स्थिरता आएगी।

यह फैसला शिक्षा विभाग के भीतर लंबे समय से चल रही चर्चाओं को समाप्त करते हुए एक मानक और एकरूप प्रणाली स्थापित करेगा।

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