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Saran News: भेल्दी में 18 चक्का हाइवा ने टोटो को रौंदा, चार की मौत; तीन घायल

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | सारण के भेल्दी में एनएच-722 पर तेज रफ्तार हाइवा ने टोटो को रौंद दिया। हादसे में चार लोगों की मौत और तीन घायल हुए।

छपरा-मुजफ्फरपुर एनएच-722 पर सोमवार को एक तेज रफ्तार हाइवा ने चार जिंदगियां छीन लीं। भेल्दी थाना क्षेत्र में टोल प्लाजा के पास मकेर की ओर से छपरा की तरफ जा रहा 18 चक्का हाइवा अचानक अनियंत्रित हो गया और सामने से आ रहे टोटो को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि टोटो बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।

हादसे में टोटो पर सवार एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। इसी दौरान अनियंत्रित हाइवा की चपेट में सड़क से गुजर रहा एक साइकिल सवार भी आ गया, जिसकी मौके पर मौत हो गई। दुर्घटना में टोटो चालक समेत तीन लोग घायल हुए हैं। घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मकेर पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है।

मृतकों की पहचान अमनौर थाना क्षेत्र के सुल्तानगंज निवासी फारूक मियां, उनकी पतोहू, इब्राहिम मियां की पत्नी शहीदा खातून, इब्राहिम मियां की पुत्री शाना प्रवीण और सोनहो निवासी दीपन पंडित के पुत्र सुरेश पंडित के रूप में हुई है।

घायलों में इरशाद, इलियास अंसारी के पुत्र दिलशाद अंसारी और आलमगीर अंसारी के पुत्र जुनैद अंसारी शामिल हैं।

इलाज कराकर लौट रहा था परिवार

हादसे के पीछे की कहानी भी बेहद दर्दनाक है। जानकारी के अनुसार फारूक मियां के इलाज के लिए परिवार के सदस्य उन्हें लेकर गड़खा गए थे। इलाज कराने के बाद परिवार टोटो से वापस अपने घर लौट रहा था।

परिवार को शायद अंदाजा भी नहीं था कि घर लौटने का यह सफर आखिरी सफर साबित होगा। जैसे ही टोटो भेल्दी थाना क्षेत्र में टोल प्लाजा के पास पहुंचा, सामने से आ रहा तेज रफ्तार 18 चक्का हाइवा अनियंत्रित होकर टोटो से जा टकराया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार टक्कर बेहद जोरदार थी। टक्कर के बाद टोटो क्षतिग्रस्त हो गया और उसमें बैठे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई।

साइकिल सवार भी आया चपेट में

हाइवा की रफ्तार और अनियंत्रित स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि टोटो को टक्कर मारने के बाद सड़क से गुजर रहा एक साइकिल सवार भी इसकी चपेट में आ गया। उसकी भी मौत हो गई।

इस तरह कुछ ही क्षणों में एनएच-722 पर चार लोगों की जिंदगी खत्म हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही आसपास के लोग घटनास्थल की ओर दौड़े। स्थानीय लोगों ने घायलों को बाहर निकालने में मदद की और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया।

11 हजार वोल्ट के बिजली पोल से भी टकराया हाइवा

हादसा सिर्फ लोगों की जान जाने तक सीमित नहीं रहा। अनियंत्रित हाइवा सड़क किनारे लगे 11 हजार वोल्ट की बिजली लाइन के पोल से भी जा टकराया। टक्कर के कारण बिजली का पोल क्षतिग्रस्त हो गया और आसपास के क्षेत्र में भी खतरा पैदा हो गया।

घटना के बाद बिजली विभाग को भी स्थिति की जानकारी दी गई। सड़क किनारे हाई वोल्टेज लाइन का पोल टूटने से कुछ समय के लिए इलाके में दहशत का माहौल रहा।

हादसे के बाद हाइवा चालक मौके से फरार हो गया। दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क पर छोड़कर चालक के भाग जाने की बात सामने आई है। पुलिस अब चालक की पहचान और गिरफ्तारी के प्रयास में जुटी है।

मौत की खबर से परिजनों में मचा कोहराम

चार लोगों की मौत की खबर जैसे ही उनके परिवारों तक पहुंची, घरों में चीख-पुकार मच गई। जिन लोगों के साथ परिवार का सदस्य इलाज कराने गया था, उन्हें कुछ ही देर बाद उसकी मौत की खबर मिली।

एक साथ तीन लोगों की मौत से संबंधित परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। वहीं साइकिल सवार सुरेश पंडित की मौत की खबर से उनके गांव में भी मातम का माहौल है।

घायलों के परिवारों की चिंता भी बढ़ गई है। स्थानीय अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद घायलों की स्थिति पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं।

हादसे के बाद एनएच-722 पर लगा लंबा जाम

दुर्घटना के बाद छपरा-मुजफ्फरपुर एनएच-722 पर यातायात पूरी तरह प्रभावित हो गया। सड़क पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन और मृतकों के शव पड़े होने के कारण दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई।

देखते ही देखते सैकड़ों ट्रक, बस और दूसरे वाहन जाम में फंस गए। पुलिस ने घटनास्थल पर पहुंचकर स्थिति संभालने और सड़क से वाहनों को हटाने का प्रयास शुरू किया।

लेकिन मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों का आक्रोश बढ़ गया। वे सड़क से हटने और जाम समाप्त करने के लिए तत्काल तैयार नहीं थे। इसके बाद मकेर थानाध्यक्ष संग्राम सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।

पुलिस अधिकारियों ने लोगों से बातचीत कर सड़क खाली कराने की कोशिश की। प्रशासन की ओर से स्थिति को नियंत्रित करने का लगातार प्रयास किया जाता रहा।

मुआवजे और कार्रवाई की मांग को लेकर आक्रोश

हादसे में एक साथ चार लोगों की मौत से स्थानीय लोगों और परिजनों में गुस्सा देखा गया। लोगों की मांग थी कि दुर्घटना के लिए जिम्मेदार वाहन चालक को जल्द गिरफ्तार किया जाए और पीड़ित परिवारों को उचित सहायता मिले।

पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिश की और कानूनी कार्रवाई का भरोसा दिया। इसके बाद भी काफी देर तक सड़क पर तनाव और जाम की स्थिति बनी रही।

पुलिस ने दुर्घटना से जुड़े साक्ष्य जुटाने शुरू कर दिए हैं। दुर्घटनाग्रस्त हाइवा और टोटो को कब्जे में लेने की प्रक्रिया के साथ हादसे की परिस्थितियों की जांच की जा रही है।

रफ्तार बनी चार परिवारों के लिए काल

एनएच-722 पर हुआ यह हादसा एक बार फिर तेज रफ्तार और भारी वाहनों की अनियंत्रित आवाजाही को लेकर सवाल खड़ा करता है। 18 चक्का जैसे भारी वाहन जब अनियंत्रित होते हैं तो उनके सामने आने वाले छोटे वाहन के लिए बचने की संभावना बेहद कम रह जाती है।

टोटो में सवार परिवार इलाज के बाद घर लौट रहा था। साइकिल सवार भी अपनी सामान्य यात्रा पर था। किसी को नहीं पता था कि कुछ सेकंड बाद सड़क पर जिंदगी और मौत के बीच ऐसी टक्कर होने वाली है।

अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि हाइवा आखिर किस वजह से अनियंत्रित हुआ। क्या वाहन की गति ज्यादा थी, चालक ने नियंत्रण खोया या हादसे के पीछे कोई अन्य कारण था—इन सवालों का जवाब जांच के बाद सामने आएगा।

फिलहाल चार परिवारों में मातम है, तीन घायल अस्पताल में इलाज करा रहे हैं और एनएच-722 पर हुए इस हादसे ने सड़क सुरक्षा की चिंता फिर सामने ला दी है।

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सड़क पर रफ्तार की कीमत आखिर कौन चुकाएगा?

एनएच-722 पर हुआ हादसा सिर्फ चार मौतों की खबर नहीं है। यह सड़क पर बढ़ती लापरवाही और भारी वाहनों की रफ्तार से जुड़ा गंभीर सवाल है। एक तरफ इलाज कराकर घर लौट रहा परिवार था, दूसरी तरफ साइकिल से अपने रास्ते जा रहा व्यक्ति। दोनों की जिंदगी कुछ ही पलों में खत्म हो गई।

सड़क दुर्घटना के बाद चालक का वाहन छोड़कर भाग जाना भी गंभीर सवाल खड़ा करता है। दुर्घटना के बाद घायल लोगों की मदद करने और जिम्मेदार व्यक्ति को कानून के सामने लाने की जिम्मेदारी सबसे महत्वपूर्ण हो जाती है।

हादसे की जांच निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। वाहन की गति, चालक की भूमिका, सड़क की स्थिति और दुर्घटना के अन्य कारणों की भी जांच जरूरी है। सिर्फ चालक को जिम्मेदार ठहराकर मामला खत्म करने के बजाय यह देखना चाहिए कि दुर्घटना की पूरी परिस्थितियां क्या थीं।

सबसे जरूरी बात यह है कि ऐसे हादसों से सबक लिया जाए। हाईवे पर भारी वाहनों की गति पर निगरानी, संवेदनशील स्थानों पर ट्रैफिक व्यवस्था और सड़क किनारे बिजली के खतरनाक पोलों की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर भी गंभीरता से काम होना चाहिए।

चार लोगों की मौत के बाद अगर व्यवस्था में सुधार आता है और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके, तभी इस त्रासदी से कोई सार्थक सबक निकलेगा।

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