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Sitamarhi News: आधी रात अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री, डॉक्टर-कर्मियों की गैरहाजिरी पर भड़के; व्यवस्था सुधारने का अल्टीमेटम

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने सीतामढ़ी सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। डॉक्टरों की गैरहाजिरी और कई अव्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई।

सीतामढ़ी, 24 अगस्त। आधी रात अस्पताल पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री, डॉक्टरों की गैरहाजिरी से लेकर गंदगी तक पर खुली व्यवस्था की पोल

सीतामढ़ी सदर अस्पताल में रविवार देर रात अचानक स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार के पहुंचने से अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। बिना किसी पूर्व सूचना के हुए इस निरीक्षण में मंत्री ने ICU, SNCU, इमरजेंसी और दूसरे वार्डों की व्यवस्था को करीब से देखा। मरीजों और उनके परिजनों से सीधे बातचीत की तो अस्पताल की कई ऐसी समस्याएं सामने आईं, जिनका सामना मरीज लंबे समय से कर रहे हैं।

निरीक्षण के दौरान ड्यूटी पर कई डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मौजूद नहीं मिले। ICU में तैनात एक महिला चिकित्सक के अनुपस्थित पाए जाने पर मंत्री ने नाराजगी जताई। अस्पताल प्रशासन से ड्यूटी रोस्टर और अनुपस्थित कर्मचारियों के संबंध में जवाब मांगा गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, डॉक्टरों की अनुपस्थिति और अन्य लापरवाहियों पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

मरीजों से सीधे पूछा- इलाज में क्या परेशानी है?

निशांत कुमार ने सिर्फ अधिकारियों की रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया, बल्कि वार्डों में जाकर मरीजों और उनके परिजनों से बातचीत की। उन्होंने पूछा कि डॉक्टर समय पर मिलते हैं या नहीं, दवा और जांच की सुविधा कैसी है तथा अस्पताल में इलाज के दौरान किन परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

मरीजों ने अस्पताल में जांच की सुविधाओं को लेकर भी शिकायतें रखीं। अल्ट्रासाउंड की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आई। कुछ मरीजों और परिजनों ने डॉक्टरों की उपलब्धता और अस्पताल की सामान्य व्यवस्था को लेकर भी अपनी परेशानी बताई।

मंत्री के सामने मरीजों की शिकायतें आने के बाद अधिकारियों को मौके पर ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए।

बेड और चादरों की हालत देखकर नाराजगी

निरीक्षण के दौरान वार्डों की साफ-सफाई भी मंत्री के निशाने पर रही। कई जगह बेड और चादरों की स्थिति संतोषजनक नहीं मिली। अस्पताल में सफाई व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे।

मंत्री ने अधिकारियों से साफ शब्दों में कहा कि सरकारी अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। मरीजों को साफ बेड, साफ चादर, पर्याप्त पानी और व्यवस्थित वार्ड मिलना अस्पताल की प्राथमिक जिम्मेदारी है।

सीतामढ़ी निरीक्षण के बाद मंत्री ने खुद भी अस्पताल की सफाई, बेडशीट और पानी जैसी समस्याओं पर कार्रवाई की बात कही।

बिजली जाने पर वार्ड में अंधेरा, बारिश में जलजमाव की शिकायत

मरीजों की शिकायतों में अस्पताल की बिजली व्यवस्था भी शामिल रही। बिजली गुल होने की स्थिति में वार्डों में अंधेरा छा जाने की समस्या बताई गई। इसके अलावा बारिश के बाद अस्पताल परिसर में जलजमाव की परेशानी का भी मुद्दा सामने आया।

अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर बिजली और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर शिकायत सामने आना प्रशासन के लिए गंभीर विषय माना गया। मंत्री ने इन समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए।

रेफरल को लेकर भी मांगी गई पूरी रिपोर्ट

स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल से मरीजों को रेफर किए जाने के तरीके पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पिछले एक सप्ताह में सदर अस्पताल से दूसरे अस्पतालों में भेजे गए मरीजों की पूरी सूची तैयार करने को कहा।

निर्देश के मुताबिक सूची में मरीज का नाम, रेफर किए जाने का कारण और संबंधित चिकित्सक का नाम दर्ज किया जाना है। यह रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने को कहा गया है।

इसका मकसद यह पता लगाना है कि कितने मरीजों को वास्तव में उच्च चिकित्सा सुविधा की जरूरत थी और कितने मामलों में उन्हें सदर अस्पताल में ही इलाज मिल सकता था।

स्ट्रेचर और दूसरी बुनियादी सुविधाओं पर भी सवाल

निरीक्षण के दौरान जरूरत पड़ने पर स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं होने जैसी शिकायतें भी सामने आईं। अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों के लिए स्ट्रेचर जैसी बुनियादी सुविधा का समय पर उपलब्ध नहीं होना व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

मंत्री ने अधिकारियों को अस्पताल की रोजमर्रा की व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखने का निर्देश दिया। उनका स्पष्ट संदेश था कि मरीजों को अस्पताल में सुविधा के बजाय परेशानी नहीं मिलनी चाहिए।

सीतामढ़ी के बाद पूरे बिहार के अस्पतालों पर नजर

निशांत कुमार के हालिया निरीक्षणों का सिलसिला सिर्फ सीतामढ़ी तक सीमित नहीं है। इससे पहले वे पटना के PMCH और LNJP अस्पताल में भी औचक निरीक्षण कर चुके हैं। PMCH के निरीक्षण के दौरान प्राचार्य की गैरहाजिरी को लेकर कार्रवाई की बात सामने आई थी।

जुलाई में LNJP अस्पताल के निरीक्षण के दौरान भी मरीजों से सीधे बातचीत की गई थी। वहां मरीजों की ओर से निजी जांच केंद्रों पर भेजे जाने जैसी शिकायतें सामने आई थीं और संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई थी।

इससे साफ है कि स्वास्थ्य मंत्री सरकारी अस्पतालों की जमीनी व्यवस्था को सीधे परखने की रणनीति पर जोर दे रहे हैं।

PMCH से लेकर IGIMS तक मरीजों की शिकायतें बनीं केंद्र में

स्वास्थ्य मंत्री के निरीक्षणों में एक बात लगातार सामने आ रही है—अधिकारियों की रिपोर्ट के बजाय मरीजों से सीधे फीडबैक लेना।

6 अगस्त को IGIMS में नई स्वास्थ्य सुविधाओं के उद्घाटन के दौरान भी मरीज और उनके परिजन मंत्री के सामने अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे थे। इलाज, लंबी कतार, बेड और दूसरी व्यवस्थाओं को लेकर शिकायतें सामने आई थीं।

PMCH में भी जून में निरीक्षण के दौरान अस्पताल की प्रशासनिक व्यवस्था और मरीजों की शिकायतों पर मंत्री ने नाराजगी जताई थी।

अनावश्यक रेफरल रोकने पर सरकार का जोर

बिहार की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में रेफरल का मुद्दा भी लगातार महत्वपूर्ण होता जा रहा है। सरकार का जोर है कि जिन मरीजों का इलाज जिला या अनुमंडलीय अस्पताल में संभव है, उन्हें बेवजह मेडिकल कॉलेज या बड़े अस्पतालों में न भेजा जाए।

इसी नीति के तहत सदर अस्पतालों को मजबूत करने और छोटे ऑपरेशन तथा सामान्य उपचार स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है।

हर्निया, पित्त की थैली और स्टोन जैसे मामलों में जहां स्थानीय स्तर पर उपचार संभव हो, वहां मरीजों को सीधे पटना भेजने की जरूरत कम करने की नीति पर काम किया जा रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री की प्राथमिकता में क्या-क्या?

निशांत कुमार के हालिया निर्देशों में सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपस्थिति, मरीजों का फीडबैक, डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड, दवा और उपकरणों की उपलब्धता, पैथोलॉजी और रेडियोलॉजी सेवाओं को मजबूत करना तथा जिला अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवा उपलब्ध कराने जैसे मुद्दे शामिल रहे हैं।

PMCH में रेडियोलॉजी सेवाओं को एक जगह उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम हुआ है और मंत्री ने गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा में लापरवाही नहीं होने देने की बात कही थी।

अब सीतामढ़ी में कार्रवाई का इंतजार

सीतामढ़ी सदर अस्पताल के निरीक्षण में सामने आई कमियों के बाद अब असली परीक्षा कार्रवाई और सुधार की है। मंत्री ने जिन अधिकारियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए हैं, उन पर क्या कार्रवाई होती है और अस्पताल की व्यवस्था कितने समय में बदलती है, यह देखने वाली बात होगी।

सरकारी अस्पतालों में अचानक निरीक्षण से कमियां सामने आ सकती हैं, लेकिन स्थायी सुधार तभी होगा जब नियमित निगरानी, जवाबदेही और मरीजों की शिकायतों पर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित हो।

सीतामढ़ी सदर अस्पताल में देर रात हुए इस निरीक्षण ने एक बार फिर यही सवाल खड़ा किया है कि अगर स्वास्थ्य मंत्री के अचानक पहुंचने पर ड्यूटी, सफाई, बिजली, पानी, जांच और रेफरल जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, तो नियमित प्रशासनिक निगरानी आखिर कितनी प्रभावी है।

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निरीक्षण से आगे अब कार्रवाई की बारी

सरकारी अस्पतालों की असली तस्वीर अक्सर मरीजों से बातचीत के दौरान सामने आती है। सीतामढ़ी में स्वास्थ्य मंत्री का औचक निरीक्षण इसी वजह से महत्वपूर्ण है। अधिकारियों की फाइल में व्यवस्था बेहतर दिख सकती है, लेकिन जब मंत्री सीधे मरीजों से पूछते हैं कि उन्हें इलाज में क्या परेशानी है, तो कई ऐसी कमियां सामने आती हैं जिन्हें सामान्य निरीक्षण में नजरअंदाज किया जा सकता है।

सीतामढ़ी में डॉक्टरों की गैरहाजिरी, गंदे बेड और चादरें, सफाई की समस्या, बिजली और पानी की शिकायत तथा जांच की कमी जैसी बातें अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही तय करती हैं।

हालांकि केवल अधिकारियों को फटकार लगाने से व्यवस्था स्थायी रूप से नहीं बदलती। इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और तय समय में सुधार जरूरी है। खासकर रेफरल के मामले में पारदर्शिता महत्वपूर्ण है, क्योंकि गरीब मरीजों के लिए एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल जाना अतिरिक्त खर्च और परेशानी बढ़ाता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने पिछले एक सप्ताह की रेफरल सूची मांगकर सही दिशा में कदम उठाया है। अगर इस रिपोर्ट की गंभीरता से समीक्षा होती है और अनावश्यक रेफरल पर रोक लगती है, तो इसका सीधा फायदा मरीजों को मिलेगा।

अब सीतामढ़ी के मरीजों की नजर इस बात पर होगी कि निरीक्षण के बाद अस्पताल की तस्वीर वास्तव में कितनी बदलती है। औचक निरीक्षण की सफलता फटकार से नहीं, बल्कि उसके बाद दिखाई देने वाले सुधार से तय होगी।

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