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दिसंबर का पहला हफ्ता बनेगा राजनीतिक गर्मी का केंद्र, बिहार विधानमंडल के शीतकालीन सत्र की पूरी रूपरेखा तैयार

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बिहार की राजनीति दिसंबर के शुरुआती दिनों में एक बार फिर तेज़ होती दिखाई देगी। विधानमंडल के दोनों सदनों—विधान सभा और विधान परिषद—का शीतकालीन सत्र तय हो चुका है। नई सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा सत्र होगा, इसलिए इससे जुड़ी राजनीतिक हलचल और रणनीतिक बयानबाज़ी पहले से ज्यादा दिलचस्प रहने वाली है।

विधान सभा का सत्र 01 से 05 दिसंबर तक और
विधान परिषद का सत्र 03 से 05 दिसंबर तक प्रस्तावित है।

इन दोनों सत्रों को राजनीतिक, प्रशासनिक और वित्तीय दृष्टि से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि एक ओर सरकार अपना एजेंडा और प्राथमिकताएं सदन में रखेगी, तो दूसरी ओर विपक्ष सवालों की बौछार करके सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।

संयुक्त सत्र से होगी शुरुआत—राज्यपाल देंगे मार्गदर्शक संबोधन

बुधवार, 03 दिसंबर को सुबह 11:30 बजे विधान मंडल के विस्तारित भवन के सेन्ट्रल हॉल में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक होगी। परंपरा के अनुसार राज्यपाल अपने अभिभाषण के साथ पूरे सत्र का सूत्रपात करेंगे।
अभिभाषण में सरकार आने वाले महीनों की योजनाओं, नीतिगत प्राथमिकताओं और विकास कार्यक्रमों का खाका पेश करने वाली है।

राज्यपाल के भाषण के बाद निम्न कार्यवाही प्रस्तावित है:

सत्र अवधि के दौरान जारी सभी अध्यादेशों की प्रतियां सदन में रखी जाएंगी

वित्तीय वर्ष 2025–26 की द्वितीय अनुपूरक व्यय-विवरणी प्रस्तुत की जाएगी

पूर्व सदस्यों या विशिष्ट व्यक्तियों के निधन पर शोक प्रस्ताव भी शामिल हो सकता है

04 दिसंबर—धन्यवाद प्रस्ताव पर गरमाएगा सदन

गुरुवार का दिन राजनीतिक रूप से सबसे रोचक माना जा रहा है। इस दिन सदन राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा करेगा।
यही वह मंच होता है जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने होते हैं—सरकार अपनी उपलब्धियां गिनाती है और विपक्ष समस्याओं, कमियों व विफलताओं को उजागर करता है। नोकझोंक, आरोप-प्रत्यारोप और तेज़ बहसों से सदन का माहौल गर्म रहने की उम्मीद है।

05 दिसंबर—वित्तीय कार्यवाही पर अंतिम फैसला

सत्र के आखिरी दिन द्वितीय अनुपूरक व्यय-विवरणी पर बहस और मतदान होगा। इसके बाद विनियोग विधेयक पारित कर दिया जाएगा।
सरकार के लिए यह बेहद जरूरी होगा क्योंकि इस व्यय-विवरणी के माध्यम से कई विभागीय परियोजनाओं और योजनाओं को गति मिलने वाली है।
इसी दिन विधानसभा का शीतकालीन सत्र समाप्त हो जाएगा।

नई सरकार का पहला पूरा सत्र—इसलिए बढ़ी अहमियत

दिसंबर का यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है:

नई सरकार अपनी नीतियों और एजेंडे का विस्तृत रोडमैप पहली बार सदन में प्रस्तुत करेगी

राज्यपाल के भाषण में सरकार की दिशा और विकास की प्राथमिकताएं दिखेंगी

विपक्ष को अपनी भूमिका और मजबूती दिखाने का बड़ा मौका मिलेगा

वित्तीय कार्यवाही से विकास योजनाओं का बजट तय होगा

सदनों की बहसें आने वाले महीनों की राजनीतिक स्थिति का संकेत देंगी,कुल मिलाकर, दिसंबर का पहला हफ्ता बिहार की राजनीति में नए समीकरणों, नई रणनीतियों और नए टकरावों का गवाह बनने वाला है।

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