:
Breaking News

NEPAL FLOOD: नेपाल की तबाही का गंडक में दिखा खौफनाक असर, गोपालगंज में शव और मलबा बहने का दावा; प्रशासन से बरामदगी की मांग

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद गंडक नदी में मलबे के साथ मानव और जंगली जानवरों के शव बहने का दावा सामने आया है। गोपालगंज में स्थानीय लोगों ने प्रशासन से शवों की बरामदगी और पहचान कराने की मांग की है।

गोपालगंज, 29 अगस्त। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ का असर अब उसकी सीमा से सैकड़ों किलोमीटर दूर बिहार की नदियों में दिखाई देने लगा है। गंडक नदी में नेपाल की ओर से तेज बहाव के साथ भारी मात्रा में मलबा, पेड़-पौधे और घरेलू सामान आने की खबरों के बीच गोपालगंज में स्थानीय लोगों ने मानव शव और जंगली जानवरों के शव भी नदी की धारा में बहते देखने का दावा किया है। इन शवों की संख्या और पहचान को लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासनिक स्तर पर बरामदगी और जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

गंडक नदी के किनारे रहने वाले लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों से नदी के पानी में सामान्य मलबे के अलावा ऐसी चीजें भी दिखाई दे रही हैं, जो नेपाल में हुई तबाही की भयावहता का संकेत दे रही हैं। पश्चिम चंपारण और गोपालगंज के बीच गंडक की तेज धारा में कई शव दिखाई देने की बात स्थानीय लोगों ने कही है। पानी का बहाव तेज होने के कारण नदी में दिखाई देने वाली वस्तुएं कुछ ही देर में आंखों से ओझल हो जा रही हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि नदी के पानी के साथ लकड़ियां, घरों का सामान और अन्य मलबा भी लगातार नीचे की ओर आ रहा है। इसी क्रम में जंगली जानवरों के शव दिखाई देने का भी दावा किया गया है। हालांकि हाथी के बच्चे, हिरण, जंगली सुअर और अन्य जानवरों के शव होने संबंधी दावों की भी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में प्रशासनिक जांच के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि नदी में बहकर आ रही वस्तुएं और शव वास्तव में नेपाल के बाढ़ प्रभावित इलाकों से आए हैं या नहीं।

नेपाल में 26 अगस्त को आई अचानक बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। वहां के कई नदी तंत्र में अचानक पानी और मलबे का प्रवाह बढ़ा, जिससे घर, सड़क, पुल और दूसरी संरचनाएं प्रभावित हुईं। नेपाल के अधिकारियों के मुताबिक विभिन्न बाढ़ प्रभावित नदियों से बड़ी संख्या में शव बरामद किए जा चुके हैं और उनकी पहचान की प्रक्रिया जारी है।

इस आपदा का असर भारत तक पहुंचने की आशंका पहले ही जताई गई थी। गंडक नदी नेपाल से निकलकर बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर आती है। नेपाल में बाढ़ के बाद बिहार और उत्तर प्रदेश में गंडक के जलस्तर और संभावित तेज बहाव को लेकर प्रशासन को सतर्क किया गया था। गंडक बराज के फाटकों को खोलकर पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने की कार्रवाई भी की गई थी।

नेपाल से बहकर भारत पहुंचने वाले शवों की घटना अब केवल आशंका तक सीमित नहीं रही है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर इलाके में गंडक नदी से कई शव बरामद किए जाने की आधिकारिक जानकारी सामने आई है। महाराजगंज में छह शव बरामद होने की रिपोर्ट है, जबकि कुशीनगर में भी तीन शव मिलने की जानकारी अधिकारियों ने दी है। शवों की पहचान के लिए स्थानीय प्रशासन नेपाल के अधिकारियों के संपर्क में है।

इसी पृष्ठभूमि में गोपालगंज में स्थानीय लोगों द्वारा मानव शव बहते देखने का दावा गंभीर चिंता पैदा करता है। यदि ये दावे जांच में सही पाए जाते हैं तो यह नेपाल की आपदा की भयावहता और उसके सीमापार प्रभाव का बेहद मार्मिक उदाहरण होगा। फिलहाल जरूरी है कि नदी में दिखाई देने वाले शवों को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालकर उनकी पहचान की कोशिश की जाए।

स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने प्रशासन से गंडक नदी के संवेदनशील हिस्सों में निगरानी बढ़ाने की मांग की है। नदी में लगातार मलबा और अन्य वस्तुएं बहकर आने के कारण किनारे रहने वाले लोगों में भी डर का माहौल है। प्रशासन से यह भी मांग की जा रही है कि नदी में पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए और किसी शव या संदिग्ध वस्तु के दिखाई देने पर तत्काल उसे सुरक्षित तरीके से बाहर निकाला जाए।

एआईएमआईएम के प्रदेश सचिव अनस सलाम ने भी जिला प्रशासन से मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि यदि नेपाल की ओर से मानव शव बहकर आ रहे हैं तो उन्हें बरामद कर उनकी पहचान कराने की कोशिश की जानी चाहिए। उनका कहना है कि यह केवल प्रशासनिक कार्रवाई नहीं बल्कि मानवीय जिम्मेदारी का भी मामला है।

हालांकि इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि नदी में दिखाई देने वाले हर शव को नेपाल से आया हुआ मान लेना उचित नहीं होगा। शव की बरामदगी, पोस्टमार्टम, पहचान और संबंधित प्रशासनिक जांच के बाद ही उसके स्रोत और मृत्यु की परिस्थितियों की पुष्टि हो सकेगी। इसलिए फिलहाल स्थानीय लोगों के दावे और उपलब्ध आधिकारिक जानकारी को अलग-अलग रखना जरूरी है।

नेपाल में बाढ़ के बाद शवों की पहचान और उन्हें सुरक्षित रखने की समस्या भी गंभीर हो गई है। नेपाल के अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों से बरामद शवों को विभिन्न अस्पतालों में रखा जा रहा है और पहचान के बाद परिजनों तक पहुंचाने की प्रक्रिया चल रही है।

गंडक नदी के रास्ते नेपाल से बिहार और उत्तर प्रदेश तक पहुंच रहा मलबा यह बताने के लिए पर्याप्त है कि प्राकृतिक आपदा का असर सीमाओं से बंधा नहीं रहता। नेपाल में हुई तबाही का पानी अब नदी के साथ नीचे की ओर बढ़ रहा है और उसके साथ आपदा के निशान भी दिखाई दे रहे हैं। गोपालगंज में सामने आए दावों की प्रशासनिक जांच इसलिए भी महत्वपूर्ण है, ताकि किसी शव की पहचान हो सके और उसके परिजनों तक सूचना पहुंचाने का रास्ता खुल सके।

फिलहाल गंडक नदी के किनारे रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। तेज बहाव वाली नदी के नजदीक जाकर किसी शव या मलबे को खुद निकालने की कोशिश करना जोखिम भरा हो सकता है। ऐसी स्थिति में प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीम को सूचना देना ही सुरक्षित रास्ता है।

संपादकीय:

नदी में बहती लाश किसी आंकड़े का हिस्सा नहीं होती। उसके पीछे एक परिवार, एक पहचान और किसी का अधूरा इंतजार होता है। नेपाल की त्रासदी का असर जब गंडक नदी के रास्ते भारत तक पहुंचता है तो यह सिर्फ बाढ़ की खबर नहीं रह जाती, बल्कि मानवीय संवेदना का सवाल बन जाती है।

ऐसी परिस्थितियों में प्रशासन की जिम्मेदारी केवल नदी के जलस्तर पर नजर रखने तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। यदि नदी में शव दिखाई देने की सूचना मिलती है तो उनकी सुरक्षित बरामदगी, पहचान और संबंधित देश के प्रशासन के साथ समन्वय सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

साथ ही, इस तरह की घटनाओं में अफवाह और तथ्य के बीच अंतर बनाए रखना भी बेहद जरूरी है। किसी शव को देखकर उसकी पहचान या उसके नेपाल से आने की पुष्टि कर देना उचित नहीं होगा। वैज्ञानिक और प्रशासनिक जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।

नेपाल की आपदा ने एक बार फिर दिखाया है कि हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक घटनाओं का असर सीमापार तक पहुंच सकता है। बिहार को ऐसी आपदाओं के लिए केवल तत्काल राहत नहीं, बल्कि लंबे समय की नदी निगरानी और आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

खबर से संबंधित:

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद भारत में भी गंडक नदी को लेकर प्रशासन पहले से सतर्क है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में गंडक से नेपाल से बहकर आए माने जा रहे कई शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों ने शवों की पहचान के लिए नेपाल के संबंधित प्रशासन से संपर्क किया है।

वहीं नेपाल में बाढ़ से मौतों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। नेपाल के अधिकारियों ने विभिन्न प्रभावित नदियों से बरामद शवों को अलग-अलग अस्पतालों और अस्थायी केंद्रों में रखा है, जहां उनकी पहचान की प्रक्रिया चल रही है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *