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BIHAR HEALTH: मोतिहारी में फ्रैक्चर हाथ के इलाज पर गंभीर आरोप, महिला बोली- प्लास्टर की जगह कार्टून लगाया

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | मोतिहारी के संग्रामपुर में घायल महिला ने सरकारी अस्पताल में फ्रैक्चर हाथ के इलाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि प्लास्टर की जगह कार्टून लगाया गया और बाद में उसके ऊपर बैंडेज कर दिया गया।

मोतिहारी, 29 अगस्त। पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर प्रखंड में सरकारी अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था को लेकर एक घायल महिला के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। मारपीट में घायल कुंती देवी का दावा है कि उनके फ्रैक्चर हाथ के इलाज के दौरान अस्पताल में प्लास्टर की जगह कार्टून लगाया गया और उसके ऊपर प्लास्टर कर दिया गया। महिला के अनुसार, बाद में जब उन्हें मोतिहारी सदर अस्पताल रेफर किया गया तो वहां भी पहले लगाए गए कार्टून को हटाकर उचित उपचार करने के बजाय उसके ऊपर ही बैंडेज कर दिया गया।

यह मामला संग्रामपुर थाना क्षेत्र के पासवान टोला से जुड़ा बताया जा रहा है। यहां जमीन विवाद को लेकर रमेश पासवान और उनकी पत्नी कुंती देवी के साथ पाटीदारों के बीच विवाद के बाद मारपीट की घटना सामने आई थी। इस घटना में रमेश पासवान की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी कुंती देवी घायल हो गईं।

महिला के हाथ में फ्रैक्चर और सिर में चोट लगने की बात कही जा रही है। घटना के बाद इलाज के लिए उन्हें स्थानीय सरकारी अस्पताल ले जाया गया था।

घायल महिला ने बताई इलाज की पूरी कहानी

कुंती देवी के मुताबिक, मारपीट में घायल होने के बाद जब वह संग्रामपुर अस्पताल पहुंचीं तो उनके टूटे हुए हाथ के उपचार के दौरान कार्टून जैसा सामान लगाकर उसके ऊपर प्लास्टर किया गया। महिला का आरोप है कि उन्हें वहां से बाद में मोतिहारी सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया।

महिला के अनुसार, सदर अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें उम्मीद थी कि हाथ का दोबारा उचित परीक्षण और उपचार किया जाएगा। लेकिन उनका दावा है कि पहले लगाए गए कार्टून को हटाने के बजाय उसके ऊपर ही बैंडेज कर दिया गया।

इलाज को लेकर सामने आए इन आरोपों ने स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चर्चा शुरू कर दी है।

जमीन विवाद में पति की मौत, पत्नी घायल

बताया जा रहा है कि पासवान टोला में जमीन को लेकर रमेश पासवान और उनके पाटीदारों के बीच विवाद हुआ था। इसी विवाद के दौरान मारपीट हुई। घटना में रमेश पासवान की मौत हो गई, जबकि उनकी पत्नी कुंती देवी को भी गंभीर चोटें आईं।

कुंती देवी के हाथ में चोट के अलावा सिर पर भी चोट लगने की बात सामने आई है। ऐसे में महिला के इलाज से जुड़ा मामला घटना के बाद अलग से गंभीर विषय बन गया है।

महिला ने बेहतर इलाज की मांग की

कुंती देवी ने इलाज की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है। उनका कहना है कि चोट गंभीर होने के बावजूद जिस तरीके से हाथ का उपचार किया गया, उससे वह संतुष्ट नहीं हैं।

महिला के आरोप सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि उपचार को लेकर लगाए गए आरोप सही हैं तो यह सरकारी अस्पतालों में मरीजों को उपलब्ध कराई जाने वाली चिकित्सा सुविधा और मानकों से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।

हालांकि, महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। अस्पताल प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की ओर से इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण मिलने के बाद ही इलाज की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था पर फिर सवाल

बिहार के सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने को लेकर सरकार लगातार प्रयासों का दावा करती रही है। इसके बावजूद अलग-अलग जिलों से समय-समय पर अस्पतालों की व्यवस्था और इलाज को लेकर शिकायतें सामने आती रहती हैं।

मोतिहारी का यह मामला भी इसी बहस को सामने लाता है। एक ओर सरकारी अस्पतालों में बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं, वहीं दूसरी ओर संसाधन, व्यवस्था और उपचार की गुणवत्ता को लेकर शिकायतें स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने चुनौती बनी हुई हैं।

फ्रैक्चर जैसे मामलों में सही जांच, एक्स-रे रिपोर्ट और चिकित्सकीय सलाह के आधार पर उपचार बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में महिला के आरोपों की वास्तविकता की जांच होना जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि उपचार के दौरान वास्तव में क्या प्रक्रिया अपनाई गई थी।

जांच से साफ होगी इलाज की वास्तविक स्थिति

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि महिला के हाथ में किस प्रकार की चोट थी, अस्पताल में उसका चिकित्सकीय परीक्षण कैसे हुआ और उसे किस आधार पर उपचार दिया गया। यदि कोई वैकल्पिक सामग्री इस्तेमाल की गई थी तो उसका कारण क्या था और क्या यह चिकित्सकीय रूप से उचित था—इन सवालों का जवाब अस्पताल के रिकॉर्ड और चिकित्सकीय जांच से मिल सकता है।

साथ ही, सदर अस्पताल में रेफर किए जाने के बाद महिला का किस डॉक्टर ने परीक्षण किया और वहां किस तरह का उपचार किया गया, इसकी जानकारी भी महत्वपूर्ण होगी।

फिलहाल महिला के आरोपों ने मामले को गंभीर बना दिया है। अब स्वास्थ्य विभाग और संबंधित अस्पताल प्रशासन की ओर से स्थिति स्पष्ट किए जाने का इंतजार है।

मामला केवल एक महिला के इलाज तक सीमित नहीं

यह घटना यदि जांच में सही पाई जाती है तो मामला केवल एक घायल महिला के इलाज की लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली चिकित्सा सुविधा की निगरानी पर भी सवाल खड़े करेगा।

वहीं, यदि जांच में महिला के आरोप सही नहीं पाए जाते हैं तो अस्पताल प्रशासन के पास भी अपनी उपचार प्रक्रिया और मेडिकल रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करने का अवसर होगा।

इसलिए फिलहाल सबसे जरूरी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो और घायल महिला को उचित चिकित्सा सुविधा मिले। किसी भी मरीज के लिए इलाज के दौरान उसकी चोट, दर्द और स्वास्थ्य स्थिति को प्राथमिकता मिलना जरूरी है।

मोतिहारी के संग्रामपुर में सामने आया यह मामला अब स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और अस्पताल प्रशासन के स्पष्टीकरण से ही पूरी तरह स्पष्ट होगा।

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इलाज के आरोपों की सच्चाई जांच से ही सामने आएगी

सरकारी अस्पताल किसी भी गरीब और जरूरतमंद मरीज के लिए सबसे बड़ा सहारा होते हैं। इसलिए वहां उपचार को लेकर उठने वाली हर शिकायत को गंभीरता से लेना जरूरी है। मोतिहारी की घायल महिला के आरोप भी इसी वजह से महत्वपूर्ण हैं।

लेकिन किसी आरोप को अंतिम सत्य मानने से पहले अस्पताल के मेडिकल रिकॉर्ड, एक्स-रे, डॉक्टर की सलाह और उपचार की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी है। इससे न केवल महिला को न्याय मिल सकता है बल्कि यदि व्यवस्था में कोई कमी है तो उसे भी दूर किया जा सकता है।

स्वास्थ्य व्यवस्था में मरीज का भरोसा सबसे महत्वपूर्ण है। यह भरोसा तभी मजबूत होगा जब शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, दोष मिलने पर कार्रवाई हो और अस्पताल अपनी प्रक्रिया को पारदर्शी तरीके से सामने रखे।

घायल महिला के इलाज पर गंभीर आरोप

मोतिहारी के संग्रामपुर में मारपीट में घायल कुंती देवी ने सरकारी अस्पताल में अपने फ्रैक्चर हाथ के इलाज को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला का दावा है कि टूटे हाथ पर प्लास्टर की जगह कार्टून लगाया गया और बाद में उसके ऊपर बैंडेज कर दिया गया।

महिला के मुताबिक, संग्रामपुर अस्पताल से मोतिहारी सदर अस्पताल रेफर किए जाने के बाद भी पहले लगाए गए कार्टून को हटाकर उचित उपचार नहीं किया गया। मामले की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है और संबंधित अस्पताल या स्वास्थ्य विभाग का विस्तृत पक्ष सामने आने के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।

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