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Patna News: पटना में 82 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइट होंगी स्मार्ट, 25 हजार नई लाइटों में सोलर पैनल लगाने की तैयारी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | पटना नगर निगम 82 हजार से अधिक स्ट्रीट लाइटों को ILM तकनीक से जोड़ने की तैयारी में है। 25 हजार नई स्मार्ट और सोलर स्ट्रीट लाइटें भी लगाई जाएंगी।

पटना, 1 सितंबर। राजधानी में रात के समय सड़कों को रोशन रखने वाली स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में बड़ा तकनीकी बदलाव होने जा रहा है। पटना नगर निगम शहर की मौजूदा 82,888 स्ट्रीट लाइटों को इंडिविजुअल लाइट मॉनिटरिंग यानी ILM सिस्टम से जोड़ने की तैयारी कर रहा है। इसके साथ ही शहर में करीब 25 हजार नई स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें लगाने की योजना है, जिनमें सोलर पैनल को भी शामिल करने की तैयारी की जा रही है।

इस व्यवस्था का सबसे बड़ा बदलाव यह होगा कि किसी इलाके में एक स्ट्रीट लाइट खराब होने पर नागरिकों को कई दिनों तक शिकायत लेकर निगम कार्यालय या हेल्पलाइन का चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। सिस्टम के जरिए खराब लाइट की पहचान और उसकी लोकेशन का पता लगाया जा सकेगा।

एक-एक लाइट की होगी अलग निगरानी

नगर निगम पहले स्ट्रीट लाइटों की निगरानी के लिए CCMS आधारित व्यवस्था पर विचार कर रहा था। इस तकनीक में कई लाइटों को एक समूह के रूप में मॉनिटर किया जाता है। नई योजना में इसके बजाय हर स्ट्रीट लाइट को अलग-अलग मॉनिटर करने वाली ILM तकनीक को प्राथमिकता दी गई है।

प्रस्तावित सिस्टम में प्रत्येक लाइट पर अलग कंट्रोलर लगाया जाएगा। इससे निगम को यह पता लगाने में आसानी होगी कि शहर के किस हिस्से में कौन-सी लाइट बंद है या उसमें तकनीकी खराबी आई है।

GIS आधारित लोकेशन और सॉफ्टवेयर डैशबोर्ड के माध्यम से लाइट की स्थिति की जानकारी निगम के सिस्टम पर उपलब्ध रहने की योजना है। फॉल्ट सामने आने पर संबंधित मेंटेनेंस टीम को सूचना भेजने की व्यवस्था भी की जाएगी।

शिकायत से पहले सिस्टम देगा संकेत

मौजूदा व्यवस्था में स्ट्रीट लाइट खराब होने के बाद अक्सर शिकायत मिलने पर मरम्मत की प्रक्रिया शुरू होती है। नई तकनीक में यह व्यवस्था अधिक स्वचालित होगी। किसी लाइट में खराबी आने पर सिस्टम फॉल्ट अलर्ट जारी कर सकेगा।

इससे निगम को केवल शिकायतों पर निर्भर रहने के बजाय स्ट्रीट लाइट नेटवर्क की खुद निगरानी करने में मदद मिलेगी। किस लाइट की स्थिति सामान्य है, कौन-सी बंद है और कहां तकनीकी समस्या पैदा हो रही है, इसका रिकॉर्ड डिजिटल सिस्टम में रखा जा सकेगा।

बिजली की खपत पर भी रखी जा सकेगी नजर

ILM व्यवस्था का इस्तेमाल केवल खराब लाइट खोजने तक सीमित नहीं रहेगा। नगर निगम को लाइटों की बिजली खपत से संबंधित आंकड़े भी मिल सकेंगे। जरूरत के अनुसार लाइट की ब्राइटनेस यानी डिमिंग को नियंत्रित करने की सुविधा भी प्रस्तावित व्यवस्था में शामिल है।

इससे अलग-अलग समय और जरूरत के हिसाब से रोशनी का प्रबंधन किया जा सकेगा। बिजली की खपत को नियंत्रित करने में भी यह सिस्टम उपयोगी साबित हो सकता है।

25 हजार नई स्मार्ट लाइटें लगेंगी

मौजूदा लाइटों को स्मार्ट मॉनिटरिंग से जोड़ने के साथ ही राजधानी में 25 हजार नई स्मार्ट स्ट्रीट लाइटें लगाने की तैयारी है। प्रस्ताव में इन नई लाइटों के साथ सोलर पैनल लगाने की योजना भी शामिल है।

अगर सोलर आधारित व्यवस्था बड़े स्तर पर लागू होती है तो स्ट्रीट लाइटों के संचालन में पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि नई व्यवस्था को लागू करने से पहले निगम की संबंधित समितियों और बोर्ड से अंतिम मंजूरी ली जानी है।

पुरानी एजेंसी का कार्यकाल खत्म

शहर की स्ट्रीट लाइटों के रखरखाव की जिम्मेदारी वर्ष 2018 से EESL के पास थी। एजेंसी का कार्यकाल 31 अगस्त को समाप्त हो गया। इसके बाद स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को तकनीकी रूप से अपग्रेड करने की दिशा में निगम ने ILM आधारित प्रणाली का प्रस्ताव तैयार किया है।

अंतिम निर्णय सशक्त स्थायी समिति और पटना नगर निगम बोर्ड की आगामी बैठक में लिया जाना है। मंजूरी मिलने के बाद नई व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

300 से ज्यादा शिकायतें लंबित

स्ट्रीट लाइटों की मौजूदा व्यवस्था को लेकर नगर निगम ने सर्वे भी कराया है। सर्वे में शिकायतों के समय पर समाधान, बिजली की खपत की निगरानी और प्रभावी मॉनिटरिंग से जुड़ी कमियां सामने आई हैं।

नगर निगम की हेल्पलाइन पर मिली 300 से अधिक शिकायतें अभी लंबित बताई जा रही हैं। नई प्रणाली लागू होने के बाद निगम का लक्ष्य ऐसी शिकायतों के समाधान में लगने वाले समय को कम करना है।

स्मार्ट सिस्टम से क्या बदलेगा?

नई व्यवस्था लागू होने पर मुख्य रूप से चार बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं—

हर स्ट्रीट लाइट की स्थिति अलग से मॉनिटर की जा सकेगी।

खराब लाइट की पहचान और लोकेशन जल्दी मिल सकेगी।

ब्राइटनेस और संचालन को जरूरत के अनुसार नियंत्रित किया जा सकेगा।

मेंटेनेंस टीम को खराबी की जानकारी मिलने से मरम्मत का काम तेज हो सकेगा।

डैशबोर्ड पर दिखेगी लाइटों की स्थिति

नगर निगम के मुताबिक ILM आधारित व्यवस्था का उद्देश्य स्ट्रीट लाइट प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और ऑटोमेटेड बनाना है। हर लाइट की रियल टाइम स्थिति डिजिटल डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराने की योजना है।

इससे नगर निगम को एक ही प्लेटफॉर्म से हजारों स्ट्रीट लाइटों की निगरानी करने में मदद मिलेगी। साथ ही खराब लाइटों की पहचान के लिए नागरिकों की शिकायतों पर पूरी तरह निर्भरता कम हो सकती है।

पटना जैसे तेजी से विस्तार कर रहे शहर में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था का सुचारु रहना सिर्फ रोशनी तक सीमित मुद्दा नहीं है। रात में सड़कों पर सुरक्षित आवाजाही, प्रमुख मार्गों पर दृश्यता और सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा से भी इसका सीधा संबंध है। ऐसे में नई तकनीक का वास्तविक लाभ तभी दिखाई देगा, जब खराबी सामने आने के बाद मरम्मत भी तय समयसीमा के भीतर पूरी हो।

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नई व्यवस्था की असली परीक्षा रखरखाव में होगी

पटना में हजारों स्ट्रीट लाइटों को डिजिटल सिस्टम से जोड़ना निश्चित रूप से तकनीकी बदलाव है, लेकिन इसकी सफलता सिर्फ सिस्टम लगाने से तय नहीं होगी। किसी लाइट के खराब होने की सूचना कुछ सेकंड में मिल जाए और उसकी मरम्मत कई दिनों बाद हो, तो तकनीक का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा।

इसलिए ILM के साथ मजबूत मेंटेनेंस व्यवस्था सबसे जरूरी होगी। निगम को यह तय करना होगा कि फॉल्ट अलर्ट मिलने के बाद टीम कितने समय में मौके पर पहुंचेगी और कितने समय में लाइट को दोबारा चालू किया जाएगा। हर शिकायत और मरम्मत का डिजिटल रिकॉर्ड भी जवाबदेही बढ़ा सकता है।

सोलर पैनल वाली नई लाइटों की योजना भी उपयोगी हो सकती है, लेकिन इनके रखरखाव, बैटरी क्षमता और खराब मौसम में प्रदर्शन की नियमित निगरानी जरूरी होगी। राजधानी की जनता को तकनीक से सिर्फ यह उम्मीद नहीं होगी कि लाइट की खराबी दिखाई दे, बल्कि यह भी कि खराब लाइट जल्द ठीक हो।

यदि निगरानी, शिकायत निवारण और रखरखाव—तीनों स्तरों पर व्यवस्था प्रभावी रही, तो नई तकनीक पटना की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था में वास्तविक बदलाव ला सकती है।

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