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Bihar Agriculture: किसानों को अब QR Code से मिलेगा उर्वरक, बिहार में खाद बिक्री व्यवस्था होगी डिजिटल और पारदर्शी

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बिहार में उर्वरक बिक्री को पारदर्शी बनाने के लिए किसानों को QR Code देने की व्यवस्था शुरू होगी। कोड तीन दिनों तक मान्य रहेगा और अनियमितता पर सख्त कार्रवाई होगी।

पटना, 1 सितंबर। बिहार में किसानों को उर्वरक खरीदने के दौरान होने वाली परेशानी और खाद की बिक्री में अनियमितता पर लगाम लगाने के लिए कृषि विभाग व्यवस्था में बदलाव करने जा रहा है। अब किसानों को उर्वरक खरीदने के लिए QR Code उपलब्ध कराया जाएगा। इस कोड के जरिए किसान अधिकृत विक्रेता से निर्धारित प्रक्रिया के तहत खाद खरीद सकेंगे।

कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने सोमवार को मीठापुर स्थित कृषि भवन सभागार में आयोजित विभागीय अधिकारियों की कार्यशाला में यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था का मकसद उर्वरक बिक्री में पारदर्शिता बढ़ाने के साथ किसान को समय पर गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना है।

तीन दिन तक मान्य रहेगा QR Code

कृषि विभाग की प्रस्तावित व्यवस्था में किसान को उपलब्ध कराया जाने वाला QR Code तीन दिनों तक वैध रहेगा। कोड में अधिकृत उर्वरक विक्रेता की जानकारी उपलब्ध होगी। किसान संबंधित विक्रेता के पास जाकर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार भुगतान करेगा और उर्वरक खरीद सकेगा।

इस व्यवस्था से किसान और अधिकृत विक्रेता के बीच होने वाले लेनदेन को डिजिटल तरीके से ट्रैक करने में मदद मिलने की उम्मीद है। साथ ही विभाग के पास उर्वरक बिक्री से संबंधित जानकारी अधिक व्यवस्थित रूप से उपलब्ध हो सकेगी।

खाद की कालाबाजारी पर नजर

उर्वरक की उपलब्धता के समय किसानों को अक्सर निर्धारित कीमत से अधिक राशि वसूले जाने, खाद की कमी या कालाबाजारी जैसी शिकायतों का सामना करना पड़ता है। सरकार अब तकनीकी निगरानी के जरिए ऐसी गतिविधियों पर नियंत्रण मजबूत करना चाहती है।

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर उर्वरक बेचने, कालाबाजारी, जमाखोरी या अन्य अनियमितता की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाए।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि किसानों को खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था में किसी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।

ऑनलाइन सिस्टम से जुड़ेगी उर्वरक बिक्री

कृषि विभाग ने उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने के लिए FSAS यानी Fertilizer Sales Application System के माध्यम से ऑनलाइन व्यवस्था विकसित की है।

इसके अलावा IFMS और AgriStack के एकीकरण के जरिए उर्वरक की खरीद-बिक्री से संबंधित प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने की कोशिश की जा रही है। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से विभाग के लिए उर्वरक की उपलब्धता, वितरण और बिक्री की निगरानी करना आसान हो सकता है।

इससे यह पता लगाने में भी मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कितनी खाद उपलब्ध है और उसकी बिक्री किस स्तर पर हुई।

किसान की सुविधा होगी प्राथमिकता

कृषि मंत्री ने अधिकारियों को कहा कि तकनीक का इस्तेमाल किसानों की सुविधा बढ़ाने के लिए होना चाहिए। अगर नई डिजिटल व्यवस्था के दौरान किसी किसान को तकनीकी या प्रशासनिक परेशानी आती है तो उसका समयबद्ध समाधान किया जाना जरूरी है।

कृषि विभाग का प्रयास है कि डिजिटल प्रक्रिया इतनी सरल हो कि किसान को खाद खरीदने के लिए अनावश्यक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

गुणवत्तापूर्ण खाद उपलब्ध कराना लक्ष्य

किसानों के लिए समय पर गुणवत्तापूर्ण बीज और उर्वरक उपलब्ध कराना कृषि विभाग की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है। खरीफ और रबी जैसे कृषि मौसम में खाद की मांग बढ़ने के कारण इसकी उपलब्धता और वितरण व्यवस्था पर विशेष निगरानी की जरूरत होती है।

नई QR Code व्यवस्था के जरिए विभाग बिक्री प्रक्रिया को सीधे किसान से जोड़ना चाहता है। इससे अधिकृत विक्रेताओं की पहचान और बिक्री रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने में मदद मिल सकती है।

अधिकारियों को निगरानी मजबूत करने का निर्देश

कार्यशाला के दौरान कृषि मंत्री ने अधिकारियों से उर्वरक की उपलब्धता और वितरण की नियमित निगरानी करने को कहा। उन्होंने कहा कि किसान को निर्धारित कीमत पर खाद मिले और उसे किसी तरह की अनियमितता का सामना न करना पड़े, यह सुनिश्चित करना विभाग की प्राथमिकता होनी चाहिए।

नई तकनीकी व्यवस्था के साथ शिकायतों के निपटारे की प्रक्रिया को भी प्रभावी बनाने पर जोर दिया गया है।

बिहार में उर्वरक बिक्री व्यवस्था को डिजिटल बनाने की यह पहल यदि जमीन पर सही तरीके से लागू होती है तो किसानों को अधिकृत विक्रेता तक पहुंचने और खाद खरीद प्रक्रिया को ट्रैक करने में सुविधा मिल सकती है। वहीं विभाग के लिए भी बिक्री और वितरण पर निगरानी रखना आसान होगा।

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तकनीक तभी सफल होगी जब किसान के लिए आसान हो

खाद की उपलब्धता किसानों के लिए खेती की पूरी प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। खासकर बुवाई के समय उर्वरक की मांग बढ़ने पर बाजार में उपलब्धता और कीमत दोनों महत्वपूर्ण हो जाते हैं। ऐसे समय में अगर किसान को निर्धारित कीमत पर खाद नहीं मिलती या उसे कई जगहों पर भटकना पड़ता है तो खेती की लागत और परेशानी दोनों बढ़ती हैं।

QR Code आधारित व्यवस्था का उद्देश्य इसी समस्या को कम करना है। डिजिटल रिकॉर्ड से विभाग को यह पता चल सकता है कि खाद कहां उपलब्ध है और किस विक्रेता के माध्यम से बिक्री हो रही है। इससे कालाबाजारी और जमाखोरी पर निगरानी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

लेकिन व्यवस्था की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि गांव और पंचायत स्तर के किसान इसे कितनी आसानी से इस्तेमाल कर पाते हैं। डिजिटल प्रक्रिया में तकनीकी समस्या, नेटवर्क की दिक्कत या जानकारी के अभाव की स्थिति में किसान फिर परेशानी में पड़ सकता है। इसलिए कृषि विभाग को तकनीकी व्यवस्था के साथ सहायता केंद्र और शिकायत निवारण की प्रभावी व्यवस्था भी रखनी होगी।

किसान को तकनीक के पीछे नहीं दौड़ना चाहिए, बल्कि तकनीक किसान तक आसानी से पहुंचनी चाहिए। यही इस नई व्यवस्था की सबसे बड़ी कसौटी होगी।

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