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Samastipur: WASH सेवाओं को बेहतर बनाने पर मंथन, Service Level Benchmarking से पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था मजबूत करने पर जोर

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | जिला स्तरीय कार्यशाला में WASH सेवाओं की समीक्षा, Service Level Benchmarking के जरिए पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता व्यवहार से जुड़ी सेवाओं को बेहतर बनाने पर चर्चा।

1 सितंबर, Alam Ki Khabar। समस्तीपुर के होटल प्रीतिका इन में मंगलवार को पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता व्यवहार से जुड़ी सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से जिला स्तरीय उन्मुखीकरण कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में Service Level Benchmarking के माध्यम से जिले में WASH सेवाओं की गुणवत्ता, पहुंच और सेवा वितरण व्यवस्था को मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई।

कार्यशाला में जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा, उप विकास आयुक्त सूर्य प्रताप सिंह, यूनिसेफ के पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि तथा विभिन्न संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।

सेवाओं की मौजूदा स्थिति की समीक्षा

कार्यशाला के दौरान जिले में पेयजल और स्वच्छता से संबंधित मौजूदा सेवाओं की स्थिति पर चर्चा की गई। अधिकारियों ने सेवा वितरण की गुणवत्ता, उपलब्ध संसाधनों और आम लोगों तक सेवाओं की पहुंच से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की।

इस दौरान यह समझने पर जोर दिया गया कि मौजूदा व्यवस्था में कहां सुधार की आवश्यकता है और किन क्षेत्रों में सेवा वितरण को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। Service Level Benchmarking को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया के रूप में बताया गया, जिसके माध्यम से सेवाओं को निर्धारित मानकों के आधार पर परखा जा सकता है।

आंकड़ों के आधार पर बनेगी बेहतर कार्ययोजना

कार्यशाला में विशेषज्ञों और संबंधित विभागों के प्रतिनिधियों ने सेवा स्तर के मूल्यांकन की प्रक्रिया की जानकारी दी। स्थानीय स्तर पर उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल करते हुए कमियों की पहचान करने और उसके आधार पर सुधार की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।

अधिकारियों को बताया गया कि केवल योजनाओं और संसाधनों की उपलब्धता पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी देखना जरूरी है कि उनका वास्तविक लाभ लोगों तक किस स्तर तक पहुंच रहा है। इसके लिए नियमित मूल्यांकन और अनुश्रवण को जरूरी बताया गया।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर

कार्यशाला में WASH सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय मजबूत करने की आवश्यकता पर भी चर्चा हुई। पेयजल, स्वच्छता और स्वच्छता व्यवहार से संबंधित कार्यों में कई विभाग और संस्थाएं जुड़ी होती हैं। ऐसे में बेहतर तालमेल के जरिए सेवा वितरण में आने वाली बाधाओं को कम करने पर जोर दिया गया।

यूनिसेफ, PRIMOVE और संबंधित विभागों एवं संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने प्रतिभागियों को Service Level Benchmarking की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी। स्थानीय सेवाओं का आकलन कर उन्हें निर्धारित मानकों के अनुरूप विकसित करने के विभिन्न तरीकों पर भी चर्चा हुई।

जिलाधिकारी ने वैज्ञानिक मूल्यांकन को बताया जरूरी

जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने कहा कि सुरक्षित पेयजल और बेहतर स्वच्छता व्यवस्था हर नागरिक के लिए आवश्यक है। उन्होंने WASH सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए विभागों के बीच समन्वय, नियमित निगरानी और सेवा स्तर का वैज्ञानिक तरीके से मूल्यांकन करने की जरूरत पर जोर दिया।

जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को निर्धारित मानकों के अनुरूप सेवाओं की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा जहां कमी मिले, वहां आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने का निर्देश दिया।

लगातार सुधार पर रहेगा फोकस

कार्यशाला के दौरान यह भी चर्चा हुई कि WASH सेवाओं में सुधार एक निरंतर प्रक्रिया होनी चाहिए। इसके लिए सेवा की गुणवत्ता की नियमित निगरानी, उपलब्ध आंकड़ों का विश्लेषण और जरूरत के अनुसार कार्ययोजना में बदलाव जरूरी है।

अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि योजनाओं का अंतिम उद्देश्य आम लोगों को सुरक्षित पेयजल, बेहतर स्वच्छता सुविधाएं और स्वच्छता संबंधी बेहतर व्यवहार उपलब्ध कराना है। इसके लिए जमीनी स्तर पर सेवाओं की वास्तविक स्थिति का आकलन महत्वपूर्ण है।

कार्यशाला में जिले के संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ यूनिसेफ के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। कार्यक्रम के माध्यम से अधिकारियों को WASH सेवा वितरण में सुधार और Service Level Benchmarking को व्यवहार में लागू करने के लिए आवश्यक जानकारी दी गई।

स्थानीय स्तर पर बेहतर सेवाओं की जरूरत

पेयजल और स्वच्छता जैसी बुनियादी सेवाओं का सीधा संबंध लोगों के स्वास्थ्य, जीवन-स्तर और स्वच्छ वातावरण से है। इसलिए इन सेवाओं की समीक्षा केवल कागजी आंकड़ों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जमीनी स्तर पर यह देखना जरूरी है कि जिन क्षेत्रों के लिए योजनाएं बनाई जा रही हैं, वहां लोगों को वास्तव में कितनी और कैसी सुविधा मिल रही है।

Service Level Benchmarking की अवधारणा इसी दृष्टि से उपयोगी हो सकती है। यदि उपलब्ध आंकड़ों को नियमित रूप से अपडेट किया जाए और विभाग अपनी कमियों की पहचान कर समयबद्ध तरीके से सुधार करें, तो WASH सेवाओं की गुणवत्ता में वास्तविक बदलाव लाया जा सकता है। इसके लिए विभागों के बीच समन्वय के साथ जवाबदेही भी जरूरी होगी।

समस्तीपुर जैसे बड़े जिले में पेयजल और स्वच्छता से जुड़ी आवश्यकताएं अलग-अलग क्षेत्रों में अलग हो सकती हैं। इसलिए एक समान दृष्टिकोण के बजाय स्थानीय जरूरतों के आधार पर प्राथमिकता तय करना अधिक प्रभावी होगा। कार्यशाला में हुई चर्चा तभी सार्थक मानी जाएगी, जब इसका असर आने वाले समय में सेवा वितरण और आम लोगों को मिलने वाली सुविधाओं पर दिखाई दे।

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