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Banka: 75 हजार रुपये रिश्वत के आरोप में फुल्लीडुमर BDO गिरफ्तार, निगरानी की कार्रवाई से मचा हड़कंप

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आलम की खबर | Bihar News | Patna News | Samastipur News | बांका में निगरानी ने फुल्लीडुमर BDO अमित प्रताप सिंह को 75 हजार रुपये रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया। एक रिश्तेदार भी हिरासत में लिया गया।

1 सितंबर, आलम की खबर। बिहार के बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड के प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) अमित प्रताप सिंह को निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने मंगलवार को कथित तौर पर 75 हजार रुपये रिश्वत लेते गिरफ्तार किया। कार्रवाई बांका शहर की नेहरू कॉलोनी स्थित उनके किराये के आवास पर की गई। निगरानी टीम ने इस मामले में बीडीओ के एक रिश्तेदार बच्चन प्रसाद सिंह को भी हिरासत में लिया है।

निगरानी विभाग के मुताबिक कार्रवाई फुल्लीडुमर प्रखंड प्रमुख गौतम प्रकाश की शिकायत के आधार पर की गई। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि विकास योजनाओं की प्रशासनिक स्वीकृति और संबंधित प्रक्रिया के बदले बीडीओ द्वारा रिश्वत की मांग की जा रही थी। शिकायत की प्रारंभिक जांच में आरोप सही पाए जाने के बाद निगरानी टीम ने ट्रैप की योजना बनाई।

शिकायत के बाद निगरानी ने बिछाया जाल

निगरानी अधिकारियों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने बीडीओ पर विकास योजनाओं से जुड़े काम के एवज में अवैध राशि मांगने का आरोप लगाया था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक फुल्लीडुमर प्रखंड में पंचायत की कई विकास योजनाओं से जुड़े काम लंबित थे।

निगरानी ने शिकायत मिलने के बाद पहले आरोपों का सत्यापन कराया। सत्यापन में रिश्वत मांगने की पुष्टि होने के बाद मंगलवार को कार्रवाई की गई। डीएसपी श्याम बाबू प्रसाद के नेतृत्व में टीम बांका पहुंची और बीडीओ के आवास पर निगरानी रखी गई।

75 हजार रुपये के लेन-देन के दौरान गिरफ्तारी

निगरानी के अनुसार, तय योजना के तहत शिकायतकर्ता बीडीओ के आवास पर पहुंचा और 75 हजार रुपये दिए। आरोप है कि रकम लेने के बाद बीडीओ ने उसे अपने रिश्तेदार के पास रखने के लिए दे दिया। इसके बाद निगरानी टीम ने तत्काल कार्रवाई करते हुए बीडीओ को पकड़ लिया।

तलाशी के दौरान कथित रिश्वत की रकम रिश्तेदार के पास से बरामद होने की बात सामने आई है। दोनों को पूछताछ के लिए बांका परिसदन ले जाया गया। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया निगरानी विभाग की ओर से की जा रही है।

5 प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप

शिकायत से जुड़े विवरण में विकास योजनाओं की राशि के बदले पांच प्रतिशत कमीशन मांगने का आरोप भी सामने आया है। एक रिपोर्ट के अनुसार, पंचायत समिति क्षेत्र की 26 योजनाओं की अनुमानित लागत करीब 70 से 75 लाख रुपये बताई गई थी और इसी सिलसिले में कमीशन मांगने का आरोप लगाया गया था।

हालांकि इस आरोप की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया में होगी। फिलहाल निगरानी विभाग ने कार्रवाई को शिकायत के सत्यापन और ट्रैप के आधार पर आगे बढ़ाया है।

रिश्तेदार की भूमिका की भी जांच

कार्रवाई के दौरान बीडीओ के रिश्तेदार बच्चन प्रसाद सिंह को भी निगरानी टीम ने पकड़ा। अधिकारियों के अनुसार रिश्वत की रकम उनके पास से बरामद होने की बात सामने आई है। अब जांच का एक हिस्सा यह भी है कि रकम उनके पास किस परिस्थिति में पहुंची और कथित लेन-देन में उनकी भूमिका क्या थी।

निगरानी टीम दोनों से पूछताछ कर रही है। इसके बाद दोनों को निगरानी की विशेष अदालत में पेश किए जाने की प्रक्रिया की जा रही है।

एक दिन पहले बीडीओ से हुई थी मारपीट

इस पूरे मामले का दूसरा पहलू यह है कि बीडीओ अमित प्रताप सिंह सोमवार को ही फुल्लीडुमर प्रखंड कार्यालय में हुए विवाद के बाद सुर्खियों में आए थे। जन्म प्रमाणपत्र जारी करने से जुड़े दस्तावेजों को लेकर विवाद बढ़ने के बाद उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की और मारपीट हुई थी।

घटना के बाद बीडीओ को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया था। मामले में पूर्व मुखिया संजीव कुमार मंडल समेत अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और पुलिस कार्रवाई की गई।

इस घटना के ठीक अगले दिन निगरानी की कार्रवाई होने से फुल्लीडुमर का मामला अचानक चर्चा में आ गया है। एक तरफ बीडीओ के साथ मारपीट की जांच चल रही है, वहीं दूसरी तरफ अब उन्हीं के खिलाफ रिश्वत लेने के आरोप में निगरानी कार्रवाई हुई है।

जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

निगरानी की कार्रवाई के बाद अब जांच में यह पता लगाने की कोशिश होगी कि विकास योजनाओं से जुड़े काम में कथित रिश्वत की मांग किस स्तर पर हुई और इसमें अन्य किसी व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। इसके अलावा निगरानी टीम बीडीओ के आवास से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच कर रही है।

फिलहाल बीडीओ और उनके रिश्तेदार निगरानी की कार्रवाई के दायरे में हैं। मामले में आगे की कार्रवाई जांच और अदालत की प्रक्रिया के आधार पर होगी।

महत्वपूर्ण: बीडीओ पर रिश्वत लेने का आरोप निगरानी विभाग की कार्रवाई पर आधारित है। आरोप सिद्ध होना न्यायालय के अंतिम निर्णय पर निर्भर करेगा।

भ्रष्टाचार पर कार्रवाई और प्रशासनिक जवाबदेही

सरकारी योजनाओं का उद्देश्य लोगों तक विकास का लाभ पहुंचाना है। ऐसे में योजनाओं की स्वीकृति या राशि से जुड़े काम के बदले रिश्वत की शिकायत सामने आना प्रशासनिक व्यवस्था के लिए गंभीर विषय है। निगरानी विभाग की ट्रैप कार्रवाई यह संदेश देती है कि शिकायत मिलने पर जांच और सत्यापन के बाद कार्रवाई की जा सकती है।

लेकिन केवल गिरफ्तारी से भ्रष्टाचार की समस्या खत्म नहीं होती। जरूरी यह है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और यदि आरोप साबित होते हैं तो कानून के तहत सख्त कार्रवाई हो। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि सरकारी योजनाओं से जुड़े सामान्य काम रिश्वत या किसी अनुचित दबाव के बिना समय पर पूरे हों।

फुल्लीडुमर प्रकरण में एक दिन पहले बीडीओ के साथ हुई मारपीट और अगले ही दिन रिश्वत के आरोप में गिरफ्तारी ने प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े कई सवाल खड़े किए हैं। दोनों घटनाओं की जांच अलग-अलग कानूनी मामलों के रूप में निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। किसी एक घटना के आधार पर दूसरे मामले को प्रभावित करना उचित नहीं होगा।

आम लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विकास योजनाओं का पैसा और प्रशासनिक तंत्र पारदर्शी तरीके से काम करे। शिकायतों की सुनवाई, नियमित निगरानी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही मजबूत होगी तो भ्रष्टाचार पर प्रभावी नियंत्रण संभव है।

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