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बिहार में भ्रष्टाचार पर कसा शिकंजा: रोसड़ा नगर परिषद के EO के ठिकानों पर निगरानी की धावा कार्रवाई, कैश–ज्वेलरी की बरामदगी ने खोली ‘काली कमाई’ की परतें

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पटना/समस्तीपुर:बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग का ‘ऑपरेशन क्लीन’ लगातार तेज होता जा रहा है। इसी सिलसिले में बुधवार को रोसड़ा नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी (EO) उपेंद्रनाथ वर्मा के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर निगरानी ने भारी मात्रा में नकदी, ज्वेलरी और जमीनों की डीड बरामद कर प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है।

10.5 लाख कैश — 27 लाख के गहने — और 14 जमीनों की डीड

करीब 7 घंटे चली इस कार्रवाई में समस्तीपुर और पटना स्थित उनके आवासों तथा कार्यालयों को खंगाला गया।
नतीजा चौकाने वाला रहा—

10.5 लाख रुपये नकद

27 लाख रुपये से अधिक की ज्वेलरी

11 दर्ज जमीनों के अलावा 3 नई डीड, कुल 14 संपत्तियों के कागजात

बीमा निवेश के दस्तावेज

इनोवा और स्विफ्ट डिजायर कार

बैंक पासबुक और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड

निगरानी टीम की मानें तो यह बरामदगी सिर्फ “आइसबर्ग का सिरा” है।

1.17 करोड़ की संदिग्ध संपत्ति — आय से 86% अधिक!

DSP अभिजीत कौर के अनुसार, गुप्त जांच से पता चला था कि EO वर्मा के पास 1 करोड़ 17 लाख रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति है, जो उनकी ज्ञात आय से 86.3% ज्यादा है।

FIR दर्ज होने के बाद कोर्ट से आदेश मिलते ही निगरानी की टीम तीन गाड़ियों में रवाना हुई—
11 सदस्यीय टीम, जिसमें

3 DSP

2 इंस्पेक्टर

4 सब-इंस्पेक्टर

2 कॉन्स्टेबल
शामिल थे।

समस्तीपुर में मजिस्ट्रेट बुलाकर खोला गया कमरा, कैमरा बंद मिला

जब टीम समस्तीपुर पहुंची, EO वर्मा वहां मौजूद नहीं थे।वे जिस कमरे में रहते हैं, उसका CCTV कैमरा बंद पाया गया।नियम के तहत मजिस्ट्रेट को बुलाकर कमरा खोला गया—अलमारी से फिर 5 लाख 600 रुपये मिले।

EO की सफाई: “गहरी साजिश… यह पारिवारिक संपत्ति है”

छापेमारी के बाद EO उपेंद्रनाथ वर्मा ने दावा किया—

“मेरे खिलाफ साजिश की गई है।”

“जितनी संपत्ति मिली है वह पारिवारिक है।”

“सभी कागजात कोर्ट में पेश करूंगा।”

उन्होंने यह भी कहा कि उनके नाम पर सिर्फ एक सैलरी अकाउंट है और परिवार के पास किसी भी तरह का अतिरिक्त फ्लैट या बैंक खाता नहीं है। गौरतलब है कि,यह कार्रवाई यह संकेत देती है कि बिहार निगरानी विभाग अब सिर्फ प्रतीकात्मक” छापेमारी तक सीमित नहीं रहना चाहता।यह ऑपरेशन बताता है कि अब भ्रष्टाचार की परतें ऊपर से नीचे तक उधेड़ी जा रही हैं,नगर परिषद जैसे स्थानीय निकायों में मौजूद छिपे साम्राज्यों को खोज निकालने का अभियान शुरू हो चुका है।

निगरानी के हालिया छापों की श्रृंखला यह भी साबित करती है कि
अब वह दौर बीत चुका है जब अवैध संपत्ति को परिवार और विरासत के नाम पर छुपाया जा सकता था।

बिहार की जनता यह जानना चाहती है कि,क्या यह कार्रवाई केवल शुरुआत है या आने वाले दिनों में और बड़े चेहरे बेनकाब होंगे?

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