लखीसराय।महिला एवं बाल विकास निगम और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयास से गुरुवार को बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के एक वर्ष पूर्ण होने पर मंत्रणा कक्ष में विशेष शपथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता जिलाधिकारी मिथिलेश मिश्र ने की। दीप प्रज्वलन के साथ शुरुआत हुई और इसके बाद बाल विवाह उन्मूलन पर अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के बीच सार्थक विमर्श हुआ।
डीएम मिश्र बोले—बाल विवाह एक सामाजिक जख्म, पीढ़ियों का भविष्य छीन लेता है
अपने संबोधन में डीएम मिथिलेश मिश्र ने कहा कि बाल विवाह सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि समाज पर लगा वह घाव है, जिसके दुष्परिणाम पूरे जीवन तक पीड़ितों को झेलने पड़ते हैं।
उन्होंने बताया कि कम उम्र में गर्भधारण से
– गर्भपात
– बच्चेदानी संबंधी रोग
– एनीमिया
– मातृ एवं शिशु मृत्यु
जैसी गंभीर समस्याएँ बढ़ती हैं।
डीएम ने कहा कि बाल विवाह लड़की का बचपन, शिक्षा और भविष्य—सब कुछ छीन लेता है। घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न जैसी चुनौतियाँ भी इसके साथ जुड़ी रहती हैं। उन्होंने अपील की कि हर लड़की को स्नातक स्तर तक शिक्षा मिले, तभी वह सरकारी योजनाओं और अवसरों का लाभ उठाकर मजबूत भारत के निर्माण में योगदान दे सकेगी।
डीएम ने स्पष्ट कहा, “अगर बाल विवाह रोकने की अपील के बाद कोई कार्रवाई नहीं करता, तो प्रशासन कानूनी कदम उठाने में बिल्कुल नहीं हिचकेगा।”
इसी अवसर पर उन्होंने 100 दिवसीय जन-जागरूकता अभियान के तहत नुक्कड़ नाटक टीम को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
एसडीओ बोले—चांद पर पहुंच गए, पर समाज में अभी भी बाल विवाह मौजूद
अनुमंडल पदाधिकारी सह बाल विवाह निषेध पदाधिकारी ने कहा कि 21वीं सदी का भारत अंतरिक्ष में कदम बढ़ा चुका है, लेकिन बाल विवाह जैसी कुरीतियाँ अब भी जड़ जमाए हुए हैं। उन्होंने बताया कि सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों के सहयोग से अभियान को सख्ती से लागू किया जा रहा है और आगे और कठोर कदम उठाए जाएंगे।
उप विकास आयुक्त सुमित कुमार—‘लड़कों-लड़कियों के भेदभाव को खत्म किए बिना यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती’
डीडीसी सुमित कुमार ने कहा कि कानून के अनुसार बाल विवाह दंडनीय अपराध है। दोषी पाए जाने पर दो वर्ष की सजा या एक लाख रुपये के जुर्माने का प्रावधान है।
उन्होंने समाज के हर वर्ग—पंडित, नाई, रसोइया, बाराती और सराती—से अपील की कि वे साहस के साथ बाल विवाह का विरोध करें।
लखीसराय में स्थिति गंभीर—जिले का स्थान देश में दूसरे नंबर पर
आईसीडीएस की जिला प्रोग्राम पदाधिकारी एवं मिशन शक्ति की नोडल पदाधिकारी बंदना पांडेय ने बताया कि बाल विवाह के मामलों में लखीसराय बिहार में पहले और देश में दूसरे स्थान पर है, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि इस कलंक को मिटाने के लिए समाज को साथ आना ही होगा, बिना जन आंदोलन के यह समस्या समाप्त नहीं हो सकती।
सामाजिक संगठनों की सक्रिय पहल
विकासार्थ ट्रस्ट की सचिव सुनीता कुमारी ने बताया कि संस्था द्वारा निरंतर अभियान चलाया गया, जिसके दौरान कई बाल विवाह रोके गए और आगे जागरूकता अभियान को और मजबूत किया जाएगा।
संकल्प के साथ कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम में “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” के संदेश को मजबूत किया गया। सभी अधिकारियों, कर्मियों, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और जीविका दीदियों ने सामूहिक रूप से बाल विवाह को जड़ से खत्म करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम में जिला सूचना पदाधिकारी, जिला शिक्षा पदाधिकारी, श्रम अधीक्षक, जिला कल्याण पदाधिकारी, जीविका प्रतिनिधि, मिशन शक्ति टीम सहित कई विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।