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समस्तीपुर को ‘बाल विवाह मुक्त जिला’ बनाने का संकल्प—जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने थामा अभियान की कमान

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अमरदीप नारायण प्रसाद समस्तीपुर

समस्तीपुर।बाल विवाह के उन्मूलन के लिए चल रहे राष्ट्रीय अभियान को मजबूत गति देते हुए जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र ने घोषणा की है कि वह एक वर्ष के भीतर पूरे समस्तीपुर जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने के लक्ष्य पर काम करेगा। संगठन ने यह पहल भारत सरकार की ओर से चलाए जा रहे 100 दिवसीय विशेष जागरूकता अभियान से प्रेरित होकर शुरू की है।

स्कूलों, धार्मिक स्थलों और पंचायतों पर रहेगा फोकस

देशभर में शुरू हुए ‘बाल विवाह मुक्त भारत’ अभियान के तहत एक स्पष्ट रणनीति बनाई गई है। इसके अनुसार—

स्कूलों और कॉलेजों

विवाह संपन्न कराने वाले धार्मिक स्थल

कैटरिंग, टेंट, बैंड जैसे सेवा प्रदाता

पंचायत एवं नगरपालिका वार्ड
इन सभी जगहों पर विशेष जागरूकता अभियान चलाया जाएगा, ताकि इस लंबे समय से चले आ रहे अपराध पर पूर्ण विराम लगाया जा सके।

देशभर में अब तक 1 लाख से अधिक बाल विवाह रोके

जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र, बाल अधिकारों पर काम कर रहे देशव्यापी नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन का सहयोगी संगठन है। इस नेटवर्क के 451 जिलों में फैले 250 से अधिक संगठन अब तक एक लाख से ज्यादा बाल विवाह रोक चुके हैं।
समस्तीपुर में अकेले पिछले एक साल में संस्था ने 500 से अधिक बाल विवाह होने से रोके हैं।

जिला स्तर पर शपथ कार्यक्रम और जागरूकता अभियान

अभियान के एक वर्ष पूरे होने पर संगठन ने स्कूलों, गांवों और संस्थानों में व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाए।लोगों को बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम की जानकारी दी गई और बताया गया कि—
मेहमान, कैटरर, बैंड वाले, पुरोहित किसी भी रूप में शामिल होने पर कानूनन सजा हो सकती है।

“बेटियों को अवसर से वंचित नहीं होने देंगे”—सचिव सुरेंद्र कुमार

संगठन के सचिव सुरेंद्र कुमार ने 100 दिवसीय अभियान को ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि यह पहल देश को विकसित भारत के लक्ष्य के करीब ले जाएगी।
उन्होंने कहा“सदीयों से बेटियों को बाल विवाह के नाम पर शोषण का सामना करना पड़ा है। अब सरकार, समाज और संस्थाओं का एकजुट होना इस अपराध को खत्म करने में निर्णायक मोड़ साबित होगा।”

तीन चरणों में चलेगा विशेष अभियान

अभियान को तीन चरणों में बांटा गया है—
1. पहला चरण (31 दिसंबर तक): स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता

2. दूसरा चरण (1–31 जनवरी): मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारे व विवाह सेवा प्रदाताओं पर फोकस

3. तीसरा चरण (8 मार्च तक): पंचायतों, वार्डों और समुदायों में सहभागिता का विस्तार

कैंडल मार्च को मिली हरी झंडी

जिला विधिक सेवा प्राधिकार, समस्तीपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रशिक्षण सह जागरूकता कार्यशाला में अधिकारियों और सामाजिक संगठनों ने शामिल होकर बाल विवाह मुक्त भारत के संकल्प को मजबूत किया।प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष समीर कुमार ने कैंडल मार्च को हरी झंडी दिखाते हुए जिले को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त बनाने का आह्वान किया

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