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Jamui News: नाबालिग से जुड़े वायरल वीडियो पर पुलिस का बड़ा एक्शन, 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Jamui में नाबालिग पीड़िता से जुड़े वीडियो को प्रसारित करने वाले 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल पर FIR, 132 अकाउंट से वीडियो हटवाया गया।

जमुई, 22 सितंबर 2026, Alam Ki Khabar: बिहार के जमुई में नाबालिग छात्र-छात्रा से बदसलूकी के मामले से जुड़े वीडियो को सोशल मीडिया पर फैलाने वालों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने से रोकने के लिए वीडियो के प्रसार की निगरानी शुरू की है। इस मामले में करीब 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल धारकों के खिलाफ जमुई साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।

जमुई पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया के अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर घटना से संबंधित वीडियो प्रसारित किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद साइबर स्तर पर प्रोफाइलों की जांच शुरू की गई। जांच में ऐसे कई अकाउंट सामने आए, जिनके माध्यम से वीडियो को आगे प्रसारित किए जाने की बात सामने आई। पुलिस ने इन प्रोफाइलों को कार्रवाई के दायरे में लिया है।

मामले में BNS की संबंधित धाराओं और पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। पुलिस का कहना है कि नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने वाले किसी भी कंटेंट का प्रसार गंभीर कानूनी मामला है।

132 सोशल मीडिया अकाउंट से हटवाया गया वीडियो

पुलिस ने वायरल वीडियो को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से हटवाने की कार्रवाई भी शुरू की है। पुलिस के अनुसार अब तक 132 सोशल मीडिया अकाउंट से वीडियो हटवाया जा चुका है।

पुलिस का उद्देश्य केवल मौजूदा वीडियो को हटाना नहीं, बल्कि उसके दोबारा अपलोड और प्रसार को रोकना भी है। इसके लिए उन अकाउंट्स की पहचान की जा रही है, जहां वीडियो मौजूद था या जिसे आगे शेयर किया गया।

नाबालिग पीड़िता की पहचान सार्वजनिक न हो, इसे लेकर पुलिस विशेष सावधानी बरत रही है। इसी वजह से वीडियो को हटाने के साथ उसके प्रसार से जुड़े डिजिटल अकाउंट्स की भी जांच की जा रही है।

वीडियो वायरल करने के आरोप में युवक गिरफ्तार

मामले की जांच के दौरान पुलिस ने रामाशीष चौधरी नाम के युवक को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, युवक पर घटनास्थल से संबंधित वीडियो को सोशल मीडिया पर प्रसारित करने का आरोप है।

रामाशीष चौधरी की गिरफ्तारी नगर थाना क्षेत्र से की गई है। पुलिस अब उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वीडियो उसके पास किस माध्यम से पहुंचा तथा उसके बाद उसे किन-किन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अकाउंट्स के जरिए आगे प्रसारित किया गया।

पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर इस मामले की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।

सोशल मीडिया अकाउंट्स की तकनीकी जांच

जमुई पुलिस ने मामले में सोशल मीडिया गतिविधियों की तकनीकी जांच शुरू की है। पुलिस की नजर उन प्रोफाइलों पर है, जिन्होंने घटना से संबंधित वीडियो को अपलोड, शेयर या दोबारा प्रसारित किया।

जांच के दौरान सामने आने वाले डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर संबंधित लोगों की भूमिका निर्धारित की जाएगी। पुलिस का कहना है कि जिन लोगों की भूमिका कानून के दायरे में सामने आएगी, उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

इस कार्रवाई का एक अहम पहलू यह भी है कि पुलिस मूल घटना की जांच के साथ-साथ उसके वीडियो के डिजिटल प्रसार को भी अलग स्तर पर देख रही है।

नाबालिग की पहचान सार्वजनिक होने से रोकने पर जोर

पुलिस के लिए इस मामले में नाबालिग पीड़िता की पहचान की सुरक्षा महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया पर किसी संवेदनशील घटना का वीडियो तेजी से फैलने की स्थिति में पीड़िता की पहचान सार्वजनिक होने का खतरा बढ़ जाता है।

इसी को देखते हुए पुलिस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से वीडियो हटवाने की प्रक्रिया शुरू की। 132 अकाउंट से वीडियो हटाए जाने की कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है।

पुलिस ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग पीड़िता से संबंधित वीडियो को आगे शेयर, डाउनलोड या दोबारा अपलोड न करें। किसी संवेदनशील वीडियो को वायरल करने के बजाय उसकी सूचना पुलिस को देना उचित है।

मुख्य घटना की जांच भी जारी

जमुई में छात्र-छात्रा के साथ हुई बदसलूकी के मूल मामले की जांच भी पुलिस द्वारा जारी है। घटना से जुड़े आरोपियों की भूमिका की जांच के साथ अब वीडियो के प्रसार से जुड़े लोगों पर भी कार्रवाई की जा रही है।

जमुई एसपी विश्वजीत दयाल ने स्पष्ट किया है कि नाबालिग की पहचान सार्वजनिक करने वाले वीडियो के प्रसार को रोकना पुलिस की प्राथमिकताओं में शामिल है।

फिलहाल पुलिस 120 सोशल मीडिया प्रोफाइल के खिलाफ दर्ज मामले और 132 अकाउंट से हटाए गए वीडियो से संबंधित डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। आगे की कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर की जाएगी।

सोशल मीडिया पर संवेदनशील वीडियो साझा करना पड़ सकता है भारी

जमुई की यह कार्रवाई एक बार फिर यह बताती है कि किसी नाबालिग से जुड़ी संवेदनशील घटना के वीडियो को सोशल मीडिया पर साझा करना केवल सामान्य पोस्ट या शेयर की तरह नहीं देखा जा सकता। खासकर तब, जब उससे पीड़िता की पहचान उजागर होने की स्थिति पैदा हो।

ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर किसी सामग्री को आगे बढ़ाने से पहले उसके कानूनी प्रभाव को समझना जरूरी है। पुलिस द्वारा 120 प्रोफाइल के खिलाफ प्राथमिकी और 132 अकाउंट से वीडियो हटाने की कार्रवाई इसी दिशा में की गई है।

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जमुई में नाबालिग से बदसलूकी मामले में पुलिस की कार्रवाई और जांच से जुड़ी ताजा जानकारी Alam Ki Khabar पर पढ़ें।

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