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जब पत्रकार ने पूछा ‘मुसलमान आपको वोट क्यों नहीं देते?’— सम्राट का जवाब सुनकर स्टूडियो तालियों से गूँज उठा”

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देश के एक प्रमुख नेशनल चैनल के प्राइम टाइम शो में उस रात कुछ ऐसा हुआ जिसने न सिर्फ पत्रकारिता के गिरते स्तर पर सवाल खड़े कर दिए, बल्कि बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी की राजनीतिक सूझबूझ, समझदारी और त्वरित जवाब देने की क्षमता को पूरी तरह उजागर कर दिया।
स्टूडियो भरा था, कैमरे ऑन थे, और माहौल शुरू से ही गरमाया हुआ लग रहा था। इसी बीच एक महिला पत्रकार ने अचानक एक भड़काऊ सवाल दाग दिया—

“मुसलमान आपको वोट क्यों नहीं देते?”

सवाल का अंदाज़ ऐसा था जिसमें सूचना से ज़्यादा इрादा झलक रहा था। इरादा—माहौल को उकसाने का।लेकिन सामने बैठे सम्राट चौधरी कोई नए खिलाड़ी नहीं थे।
वह ऐसे नेता हैं जो राजनीति को सिर्फ “सत्ता” नहीं, बल्कि “समाज” की नब्ज़ समझकर करते हैं।

पत्रकार के सवाल पर मुस्कुराते हुए उन्होंने जो जवाब दिया, उसने पूरे स्टूडियो का माहौल ही बदल दिया—
“हमें सब vote करते हैं… हर जाति और हर समाज का प्यार मिलता है। और सुनिए… हम तो मुस्लिम गांव में पैदा हुए हैं। पहले अलिफ-बे पढ़ा है, बाद में क-ख-ग सीखा।”

जवाब खत्म हुआ ही था कि स्टूडियो तालियों की गड़गड़ाहट से भर उठा।
दरअसल, यह सिर्फ एक जवाब नहीं था—यह “नफ़रत के जाल को समझदारी से काटना” था।
यह शब्दों में लिपटा हुआ ऐसा तीर था जो बिना आवाज़ किए सीधा निशाने पर जा लगा।

सवाल पूछने वाली पत्रकार का चेहरा उस समय देखने लायक था।
जिस अंदाज़ में वह शो को बांटने वाली दिशा देना चाह रही थी, उसी दिशा को सम्राट चौधरी ने मुस्कुराहट से बदल दिया।उसकी उम्मीद थी कि जवाब में विवाद मिलेगा, लेकिन मिला—बुद्धिमत्ता, संतुलन, और समाज को जोड़ने वाली सोच।

सम्राट चौधरी ने आगे और भी सटीक बात कही“बिहार में नफ़रत की राजनीति की कोई जगह नहीं है। जनता सब देख रही है।यह लाइन केवल बयान नहीं थी—यह पत्रकारों और राजनीतिक एजेंडा चलाने वालों के लिए एक सीधा संदेश था।

सम्राट चौधरी की राजनीतिक शैली हमेशा से साफ रही है—वो उत्तेजना में नहीं आते,वो बातों को लंबा नहीं करते,वो सीधे, सरल और सटीक शब्दों में अपना पक्ष रखते हैं।और यही वजह है कि उनके जवाब में एक नेता की परिपक्वता, एक जनप्रतिनिधि की ज़िम्मेदारी और एक इंसान की साफ नीयत—तीनों साफ झलकते हैं।

सोशल मीडिया पर यह पूरा वीडियो तेज़ी से वायरल हो चुका है।
लोग लिख रहे हैं“सम्राट चौधरी ने नफ़रत फैलाने की कोशिश को वहीं ध्वस्त कर दिया।“पत्रकार सवाल लेकर आई थी, जवाब लेकर गई!”
“ऐसे नेता ही राजनीति का स्तर उठाते हैं।”

आज जब टीवी डिबेट्स अक्सर शोर, आरोप-प्रत्यारोप और ज़हर में बदल चुकी हैं,ऐसे में सम्राट चौधरी जैसे नेता यह याद दिलाते हैं कि राजनीति में “शालीनता” और “सद्बुद्धि” का कोई विकल्प नहीं होता।

इस घटना ने साफ कर दिया कि—
समझदारी, सूझबूझ और संयम से दिया गया जवाब, सबसे तेज़ हथियार साबित होता है।
और नफ़रत फैलाने के लिए बनाई गई स्क्रिप्ट,सच्चाई के सामने एक सेकंड भी नहीं टिकती।

स्टूडियो में उस रात सिर्फ तालियाँ ही नहीं बजीं—वहाँ एक पत्रकार की नीयत और एक नेता की परिपक्वता का फर्क भी साफ-साफ दिखाई दिया।

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