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नितीश सरकार के सुधारों के बीच रोसड़ा व समस्तीपुर में अल्ट्रासाउंड की कमी सबसे बड़ी चुनौती

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बिहार सरकार ने हाल के वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं में कई सुधार किए हैं.दवाओं की उपलब्धता, डॉक्टरों की तैनाती, प्रसूति सेवाएँ और डिजिटल जांच व्यवस्था जैसे कदम सराहनीय हैं।लेकिन अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधा का रोसड़ा अनुमंडल अस्पताल में पूरी तरह अनुपस्थित होना अब बड़ी चुनौती बन गया है।रोसड़ा अनुमंडल अस्पताल की स्थिति कम गंभीर नहीं है। यहाँ अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं होने से मरीज बार-बार बाहर जाने को मजबूर हैं। डॉक्टर और दवा मौजूद होने के बावजूद जांच अधूरी रहने से इलाज अधूरा रह जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है— “सुविधाएँ बढ़ी हैं, पर अल्ट्रासाउंड नहीं होने से पूरा सिस्टम रुक जाता है।”यह समस्या केवल समस्तीपुर जिले के अस्पतालों की नहीं, बल्कि पूरे बिहार के कई PHC, CHC और अनुमंडल अस्पतालों में एक आम स्थिति है।गर्भवती महिलाएँ, किडनी या गॉल ब्लैडर के मरीज, आंतरिक चोट और संक्रमण वाले केस—इन सभी के लिए अल्ट्रासाउंड सबसे पहली और जरूरी जांच है।नितीश सरकार द्वारा किए गए सुधारों के बीच अब जरूरत इस बात की है कि रोसड़ा अनुमंडल अस्पताल और हर जिले/अनुमंडल के प्रमुख सरकारी अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन को तुरंत उपलब्ध कराया जाए।जनता और चिकित्सक एक ही बात कह रहे हैं।दवा, डॉक्टर और भवन सब हैं… अब अल्ट्रासाउंड भी हो, तभी इलाज पूरा होगा।”सरकार की सक्रियता को देखते हुए उम्मीद है कि इस मूलभूत सुविधा को भी जल्द प्राथमिकता मिलेगी,क्योंकि अल्ट्रासाउंड न सिर्फ जांच है.बल्कि हर नागरिक का अधिकार भी है।

समस्तीपुर सदर अस्पताल: मशीन मौजूद, लेकिन डॉक्टर नहीं—सेवा लगभग ठप

समस्तीपुर सदर अस्पताल, जो जिला का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल है, वहाँ अल्ट्रासाउंड मशीन तो मौजूद है,लेकिन हैरानी की बात यह है कि उस मशीन को चलाने के लिए डॉक्टर ही उपलब्ध नहीं है।
अस्पताल से जुड़े एक डॉक्टर नाम न प्रकाशित करने की शर्त पर) ने बताया—अल्ट्रासाउंड मशीन है, लेकिन विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं होने के कारण नियमित जांच नहीं हो पाती।यानी मशीन होने के बावजूद सुविधा व्यवहार में शून्य हो गई है।इसके कारण गर्भवती महिलाओं से लेकर एक्सीडेंट और पेट दर्द के मरीजों तक सभी को निजी क्लिनिकों में महंगे दाम चुकाने या दूर-दराज़ जांच केंद्रों तक जाने की मजबूरी होती है। कई मामलों में यह देरी जान के जोखिम तक पहुंच जाती है।

सिर्फ गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड—अन्य महिलाएँ व मरीज वंचित

डॉक्टर्स के अनुसार, जब कभी अल्ट्रासाउंड होता भी है, तो वह केवल गर्भवती महिलाओं तक सीमित है।अन्य महिलाओं या पेट, किडनी, गॉल ब्लैडर आदि की समस्या वाली मरीजों का अल्ट्रासाउंड नहीं किया जाता।

यह स्थिति न सिर्फ मनमानी दिखाती है, बल्कि जिला अस्पताल में
एक समान स्वास्थ्य सेवा देने के सिद्धांत पर भी सवाल उठाती है।


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