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समस्तीपुर में GNM छात्राओं की अनोखी जागरूकता रैली, बोल्ड नारों ने खींचा लोगों का ध्यान

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समस्तीपुर। विश्व एड्स दिवस पर समस्तीपुर सदर अस्पताल में रविवार का दिन कुछ अलग ही नज़ारा लेकर आया। सामान्य दिनों की भीड़-भाड़ से हटकर इस बार अस्पताल परिसर से लेकर शहर की सड़कों तक गूँज रही थीं—GNM छात्राओं की जागरूकता की बुलंद आवाजें।
लेकिन जो चीज़ सबसे ज़्यादा चर्चा में रही, वह थे उनके दो-टूक, चुभते हुए और बेझिझक नारे, जिन्होंने लोगों को पहले मुस्कुराया, फिर सोचने पर मजबूर कर दिया।

रैली में छात्राओं ने हाथों में पोस्टर और तख्तियाँ थाम रखी थीं। उनमें लिखे संदेश बेहद साफ थे—सुरक्षा, जागरूकता और जिम्मेदारी ही एड्स से बचाव का हथियार है।
उनके नारों का उद्देश्य मज़ाक उड़ाना नहीं, बल्कि यह बताना था कि रिश्तों में विश्वास के साथ-साथ सावधानी भी जरूरी है।

अस्पताल प्रशासन और डॉक्टर्स की मौजूदगी में आयोजित यह रैली सदर अस्पताल से शुरू होकर पटेल गोलंबर, कलेक्ट्रेट, ओवरब्रिज होते हुए वापस अस्पताल तक पहुंची। रास्ते में लोगों का उत्साह देखने लायक था।
राहगीर रुक-रुककर पोस्टर पढ़ते, नारे सुनते और कई तो अपने मोबाइल से तस्वीरें और वीडियो भी बनाते नज़र आए।

छात्राओं के हाथ में लाल रिबन और संदेश वाले रंगीन पोस्टर थे, और चेहरों पर थी एक ऐसी बेबाकी, जिसकी अक्सर चर्चा कम ही होती है। उनका कहना था कि एड्स कोई कलंक नहीं, बल्कि एक बीमारी है—और बीमारी से लड़ा जाता है, छिपाया नहीं जाता।

उनका यह भी संदेश था कि सुरक्षित व्यवहार अपनाना शर्म नहीं, समझदारी है।
पुरानी झिझक और संकोच को किनारे कर, महिलाएँ और पुरुष दोनों ही इस विषय पर खुलकर बात करें—यही इस रैली का मूल मकसद था।

रैली के खत्म होने तक समस्तीपुर की सड़कों पर एक ही चर्चा थी—
"इस बार की एड्स अवेयरनेस रैली सिर्फ कार्यक्रम नहीं, एक सोच में बदलाव थी।"

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