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Census 2027: निजी स्कूलों के शिक्षक, बैंक कर्मचारी भी करेंगे जनगणना ड्यूटी, केंद्र ने बदले नियम

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | Census 2027 को लेकर केंद्र सरकार ने जनगणना नियम 1990 में संशोधन किया है। अब निजी स्कूल-कॉलेज के शिक्षक, बैंक कर्मचारी और अन्य संस्थानों के अधिकारी भी जनगणना कर्मी बनाए जा सकेंगे।

3 नवंबर 2026 | Alam Ki Khabar


जनगणना 2027 में बड़ा बदलाव, अब निजी शिक्षकों और बैंक कर्मचारियों को भी मिल सकती है ड्यूटी


नई दिल्ली। देश में होने वाली आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों के बीच केंद्र सरकार ने जनगणना कर्मियों की नियुक्ति से जुड़े नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब इस राष्ट्रीय अभियान में केवल सरकारी स्कूलों के शिक्षक ही नहीं, बल्कि निजी स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षक, बैंक कर्मचारी तथा विभिन्न सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों में कार्यरत अधिकारी भी शामिल किए जा सकेंगे।


केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के कार्यालय ने 16 अक्टूबर 2026 को जनगणना नियम, 1990 में संशोधन की अधिसूचना जारी की। इसके तहत जनगणना कार्य के लिए योग्य कर्मियों की श्रेणी का विस्तार किया गया है।


निजी स्कूल-कॉलेज के शिक्षकों को भी मिलेगा मौका


संशोधित नियमों के अनुसार अब सरकारी शिक्षण संस्थानों के अलावा स्थानीय निकायों, सहायता प्राप्त और गैर-सहायता प्राप्त निजी शिक्षण संस्थानों, सोसाइटी तथा ट्रस्ट के अंतर्गत संचालित संस्थानों के शिक्षकों को भी जनगणना कर्मी यानी एन्यूमरेटर नियुक्त किया जा सकता है।


इस बदलाव से जनगणना कार्य के लिए कर्मचारियों का दायरा पहले की तुलना में व्यापक हो गया है। प्रशासन को जरूरत के अनुसार विभिन्न शिक्षण संस्थानों से कर्मियों की नियुक्ति करने का विकल्प मिलेगा।


बैंक और PSU कर्मचारियों की भी हो सकती है नियुक्ति


नए प्रावधान में केवल शिक्षकों को ही शामिल नहीं किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारों, स्थानीय निकायों तथा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSU) में काम करने वाले लिपिकों और अधिकारियों को भी जनगणना कार्य सौंपा जा सकता है।


इसके अलावा बैंकों, वैधानिक निकायों, कंपनियों, संस्थानों, सोसाइटी और ट्रस्ट से जुड़े कर्मचारियों को भी इस जिम्मेदारी के लिए चुना जा सकेगा। राज्य सरकार या केंद्रशासित प्रदेश प्रशासन ऐसे अन्य व्यक्तियों को भी नियुक्त कर सकता है, जिन्हें वह इस कार्य के लिए उपयुक्त समझे।


सरकारी शिक्षकों पर कम हो सकता है काम का दबाव


अब तक जनगणना जैसे बड़े अभियानों में सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की बड़ी भूमिका रही है। जनगणना के अलावा चुनाव और अन्य प्रशासनिक गतिविधियों में भी शिक्षकों की ड्यूटी लगाई जाती है।


इस कारण कई बार स्कूलों में नियमित पढ़ाई प्रभावित होने की शिकायतें सामने आती रही हैं। नए नियमों के तहत निजी संस्थानों और दूसरे विभागों के कर्मचारियों को भी शामिल करने से जनगणना की जिम्मेदारी अधिक लोगों के बीच बांटने में मदद मिल सकती है।


प्रशिक्षण और मानदेय को लेकर क्या है व्यवस्था?


जनगणना कार्य में नियुक्त कर्मियों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे घर-घर जाकर सही जानकारी जुटाने और आंकड़ों को दर्ज करने का काम कर सकें।


इस कार्य के लिए मिलने वाला मानदेय सरकार की निर्धारित व्यवस्था और संबंधित निर्देशों के अनुसार होगा। हालांकि 16 अक्टूबर की संशोधन अधिसूचना में मानदेय की कोई निश्चित राशि घोषित नहीं की गई है।


देशभर में बड़े स्तर पर होगी जनगणना


जनगणना 2027 देशव्यापी स्तर पर आयोजित की जा रही है। इस अभियान में लगभग 30 लाख कर्मियों की आवश्यकता बताई गई है। जनगणना की प्रक्रिया दो चरणों में निर्धारित है। पहले चरण में मकानों की सूची और आवास संबंधी जानकारी जुटाई जाती है, जबकि दूसरे चरण में प्रत्येक व्यक्ति से जुड़ी जनसांख्यिकीय और सामाजिक-आर्थिक जानकारी एकत्र की जाती है।


कर्मियों की नई श्रेणियां निर्धारित होने से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रशासन को नियुक्ति के लिए अधिक विकल्प मिलेंगे। इस बदलाव का उद्देश्य जनगणना अभियान के लिए पर्याप्त मानव संसाधन उपलब्ध कराना और कार्य को व्यवस्थित ढंग से पूरा करने में मदद करना है।


इस प्रकार जनगणना नियम, 1990 में हुए संशोधन के बाद अब निजी शिक्षकों, बैंक कर्मचारियों और अन्य संस्थानों के अधिकारियों की भूमिका भी देश की जनगणना प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो सकती है।

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