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समस्तीपुर एसपी की कार्रवाई ने कुख्यात गैंग को घुटने टेकने पर किया मजबूर

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मोहम्मद आलम प्रधान संपादक
       (alamkikhabar)

समस्तीपुर जिले में हाल के वर्षों में पुलिस की सक्रियता और तत्परता पर कई बार सवाल खड़े होते रहे हैं, लेकिन पुलिस अधीक्षक अरविन्द प्रताप सिंह के कार्यकाल ने कानून-व्यवस्था की तस्वीर को एक नई दिशा दी है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र, काशीपुर में हुई करोड़ों की डकैती का पर्दाफाश और उसके कुख्यात मास्टरमाइंड धर्मनाथ सिंह उर्फ धर्मा की गिरफ्तारी इसका ताज़ा और अत्यंत प्रभावी प्रमाण है।

7 मई को 6–7 हथियारबंद अपराधियों ने बैंक में घुसकर ग्राहकों और कर्मियों को बंधक बनाते हुए 15 लाख 2 हजार 791 रुपये नकद, सोना और आवश्यक दस्तावेज लूट लिए थे। यह घटना जिले की पुलिस के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बन चुकी थी। ऐसे में एसपी ने मामले को सामान्य अपराध न मानकर कानून-व्यवस्था पर सीधा हमला माना और उसी गंभीरता से कार्रवाई प्रारंभ की।

एसपी सिंह ने एएसपी सह एसडीपीओ संजय कुमार पाण्डेय, नगर थाना पुलिस और STF पटना की एक संयुक्त टीम का गठन किया। लगातार तकनीकी निगरानी, खुफिया इनपुट की बारीक मॉनिटरिंग और जिले से बाहर तक गठित नेटवर्क की ट्रैकिंग—इन सबने ऑपरेशन को सफलता तक पहुँचाया। परिणाम—पटना के रामकृष्णानगर से कुख्यात धर्मा की गिरफ्तारी।

गिरफ्तार अपराधी ने अपराध स्वीकार किया और उसकी निशानदेही पर पुलिस ने 374.574 ग्राम सोना, जो डकैती के बाद बेचा गया था, तथा ₹2 लाख नकद जब्त किया। यह वही धनराशि थी जिससे वह पटना में जमीन खरीदकर मकान निर्माण कर रहा था। एक दशक से अधिक समय में 19 गंभीर मामलों में वांछित यह अपराधी लंबे अरसे से पुलिस की पकड़ से बचता रहा, लेकिन इस बार पुलिस की रणनीति और धैर्य ने इसे कहीं भी छिपने का अवसर नहीं दिया।

उल्लेखनीय है कि इस कांड में शामिल 13 से ज्यादा अपराधी पुलिस पहले ही जेल भेज चुकी है और अब तक कुल 3 किलो 420 ग्राम 186 मिलीग्राम सोना, ₹2.19 लाख नकद, लूटे गए मोबाइल, बैंक दस्तावेज, घटना में प्रयुक्त वाहन व हथियार बरामद किए जा चुके हैं—यह संख्या ही पुलिस की अथक मेहनत की गवाह है।

इस कार्रवाई ने साबित किया है कि समस्तीपुर पुलिस अब न केवल अपराधियों के इरादों को समझ रही है, बल्कि उन्हें तोड़ने की क्षमता भी रखती है। एसपी अरविन्द प्रताप सिंह ने स्पष्ट किया है कि शेष फरार अपराधियों और बाकी बरामदगी के लिए छापेमारी जारी है, साथ ही विस्तृत पूछताछ के लिए पुलिस रिमांड लिया जाएगा।

यह घटना सिर्फ एक डकैती कांड की सफलता नहीं, बल्कि समस्तीपुर पुलिस की व्यवस्थित, संवेदनशील और परिणाम देने वाली कार्यशैली का परिचायक है। जिला अब उस दिशा में बढ़ रहा है जहां अपराधी यह समझ लें कि चाहे वे कितने भी शातिर क्यों न हों—कानून की पकड़ सख़्त है, और उससे बच पाना अब आसान नहीं।

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