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सीमांचल में हाई अलर्ट: पूर्णिया में होगी बड़ी सुरक्षा समीक्षा बैठक, अमित शाह की संभावित उपस्थिति से हलचल तेज

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पूर्णिया/पटना। बिहार के सीमांचल क्षेत्र में हाल के दिनों में बढ़ी संदिग्ध गतिविधियों और सीमा पार हलचलों के बाद सरकार अब प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से कसने की तैयारी में है। इसी कड़ी में पूर्णिया अगले हफ्ते राज्य की सबसे अहम हाई‑लेवल सुरक्षा बैठक की मेजबानी करने जा रहा है। राज्य के गृह मंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में होने वाली इस बैठक में बिहार पुलिस के शीर्ष अधिकारी शामिल रहेंगे। सूत्रों के अनुसार, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी की भी प्रबल संभावना है, जिससे प्रशासनिक हलकों में गतिविधियां तेज हो गई हैं।

दो दिवसीय मंथन—सीमांचल से लेकर पूरे बिहार की सुरक्षा पर गहन समीक्षा

14–15 दिसंबर की तिथियाँ लगभग तय मानी जा रही हैं। दोनों दिनों में पुलिस मुख्यालय से लेकर जिला स्तर तक की सुरक्षा रिपोर्टों पर विस्तृत चर्चा होगी। बैठक में इन मुद्दों पर रेखांकित समीक्षा की सम्भावना है—

सीमांचल में बढ़ी संदिग्ध आवाजाही

अंतरराज्यीय गिरोहों की गतिविधियाँ

सीमा क्षेत्रों पर फोकस्ड इंटेलिजेंस

कट्टरपंथी तत्वों की संभावित सक्रियता

क्रॉस-बॉर्डर तस्करी और अवैध आवागमन


गृह मंत्री सम्राट चौधरी, पुलिस कप्तानों और रेंज स्तर के अधिकारियों के साथ कानून-व्यवस्था के मौजूदा मॉडल में आवश्यक सुधारों पर विचार करेंगे। अधिकारियों के अनुसार, इस बैठक का उद्देश्य “सुरक्षा ढांचे की पुनर्संरचना” को व्यवहारिक रूप देना है।

पूर्णिया का चयन—रणनीतिक दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण

पूर्णिया को इस उच्चस्तरीय आयोजन का केंद्र चुने जाने के पीछे कई ठोस कारण बताए जा रहे हैं। सीमांचल का भूगोल बिहार की सुरक्षा शृंखला में कमजोर लेकिन निर्णायक कड़ी माना जाता है—

नेपाल और बंगाल की सीमाओं से सीधा संपर्क

किशनगंज के पार बंगाल से लगे इलाकों में अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर

तस्करी, अवैध व्यापार और कट्टरपंथी नेटवर्क की संभावनाएं

संवेदनशील स्थानों पर लगातार इंटेलिजेंस की जरूरत


इसीलिए, केंद्र और राज्य—दोनों सरकारें सीमांचल पर पहले से विशेष नजर बनाए हुए हैं। शाह की संभावित मौजूदगी इसी रणनीतिक महत्व को संकेत देती है।

बैठक से बदल सकती है बिहार की सुरक्षा रणनीति

सुरक्षा विशेषज्ञों की राय में, पूर्णिया की यह बैठक आने वाले महीनों में बिहार की आंतरिक सुरक्षा नीति, पुलिसिंग मॉडल और खुफिया तंत्र में बड़े बदलावों की नींव रख सकती है। केंद्र और राज्य के संयुक्त समीकरण से सीमांचल में एक मजबूत, तकनीक-केंद्रित और अलर्ट-ड्रिवेन सुरक्षा ढांचा खड़ा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

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