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भाषी छात्रों के लिए लखीसराय में जिला स्तरीय भाषण प्रतियोगिता सम्पन्न — टाउन हॉल में गूँजी उर्दू अदब की नई रौशनी

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लखीसराय शहर का टाउन हॉल आज उर्दू अदब और अभिव्यक्ति की नई ऊर्जा से भर उठा, जब उर्दू निदेशालय, मंत्रीमंडल सचिवालय विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में जिले के उर्दू भाषी छात्र-छात्राओं के लिए जिला स्तरीय भाषण प्रतियोगिता का सफल आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मूल उद्देश्य—उर्दू भाषा को बढ़ावा देना, उसकी सांस्कृतिक परंपरा को मजबूत करना तथा युवा विद्यार्थियों में आत्मविश्वास और वक्तृत्व-कौशल विकसित करना—पूरी तरह सार्थक होता दिखा।

मुख्य अतिथि ने की प्रतियोगिता की शुरुआत

कार्यक्रम का शुभारंभ अपर जिला दंडाधिकारी (ADM) श्री नीरज कुमार ने दीप प्रज्वलन कर किया।
इस अवसर पर उप विकास आयुक्त श्री सुमित कुमार, बंदोबस्त पदाधिकारी मोहम्मद मुस्तकीम और अल्पसंख्यक कल्याण पदाधिकारी सह उर्दू भाषा प्रकोष्ठ की पदाधिकारी सुश्री प्रियंका कुमारी विशिष्ट रूप से उपस्थित रहे।

जिलेभर के विद्यार्थियों ने दिखाया हुनर

जिले के विभिन्न विद्यालयों से पहुँचे उर्दू माध्यम एवं उर्दू भाषी छात्र-छात्राओं ने प्रतियोगिता में उल्लेखनीय उत्साह दिखाया।
प्रतिभागियों ने उर्दू अदब, साहित्यिक धरोहर, सामाजिक सरोकार, देश की बदलती तस्वीर और समसामयिक चुनौतियों पर अपने विचार बेहद प्रभावी अंदाज में रखे।
छात्रों की भाषा पर पकड़, प्रस्तुति की स्पष्टता और विषय की गहराई ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

निर्णायक मंडल ने किए श्रेष्ठ वक्ताओं का चयन

निर्णायक मंडल ने भाषाई शुद्धता, प्रस्तुति शैली, विषय की प्रासंगिकता, तर्कों की मजबूती और आत्मविश्वास जैसे प्रमुख मानकों पर प्रतिभागियों का मूल्यांकन किया।
प्रतियोगिता के दौरान कई वक्ताओं ने अपनी ओजस्वी वाणी और प्रभावशाली विचारों से सभा को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिससे यह स्पष्ट संदेश गया कि उर्दू भाषा आज भी युवाओं के बीच उतनी ही जीवंत और लोकप्रिय है।

पदाधिकारियों ने की सराहना

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि ऐसे आयोजन छात्रों को अभिव्यक्ति का मंच देते हैं और उन्हें भाषा, साहित्य तथा समाज के प्रति संवेदनशील बनाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि उर्दू की गहरी तहजीब और साहित्यिक समृद्धि युवाओं को नई प्रेरणा देती है और ऐसे कार्यक्रम उसकी परंपरा को सहेजने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पुरस्कार एवं प्रमाण-पत्र का वितरण

समापन सत्र में सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए, जबकि विजेता छात्रों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।
आयोजकों ने आगे भी इस प्रकार के रचनात्मक और सार्थक कार्यक्रमों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प दोहराया।

लखीसराय में आयोजित यह प्रतियोगिता न सिर्फ भाषाई प्रतिभा का मंच साबित हुई, बल्कि उर्दू भाषा के प्रति नई पीढ़ी के उत्साह और समर्पण की मिसाल भी बनी।

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