पटना। राजधानी की सबसे महत्त्वाकांक्षी पटना मेट्रो परियोजना अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच चुकी है। शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने की दिशा में यह परियोजना एक बड़े “अर्बन ट्रांसफॉर्मेशन” की नींव रखने जा रही है। निर्माण एजेंसियों के अनुसार दिसंबर के अंतिम सप्ताह तक पटना में मेट्रो का पहला संचालन संभव है। शुरुआती चरण में ISBT से मलाही पकड़ी तक पाँच स्टेशनों पर ट्रेनें चलने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे पूर्वी पटना में तेज़ और सुगम सार्वजनिक परिवहन का नया दौर शुरू होगा।
मलाही पकड़ी और खेमनीचक स्टेशनों पर तेजी से अंतिम काम
मलाही पकड़ी स्टेशन पर सिविल स्ट्रक्चर का लगभग 95% काम पूरा माना जा रहा है। वहीं खेमनीचक—जो दोनों कॉरिडोर को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण ट्रांजिट पॉइंट है—पर आंतरिक निर्माण, एस्केलेटर फिटिंग और ट्रैक अलाइनमेंट तेज़ी से जारी है।
अधिकारियों का कहना है कि अब प्रोजेक्ट टेस्टिंग, सिग्नलिंग और सेफ्टी वैलिडेशन के अंतिम चरण में पहुँच चुका है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होते ही जनता के लिए कॉरिडोर खोलने की तैयारी शुरू कर दी जाएगी।
21 मीटर गहराई में बनेगा बिहार का सबसे गहरा स्टेशन
पटना मेट्रो का अंडरग्राउंड सेक्शन भी चर्चा में है। पटना जंक्शन से रुकनपुरा और मीठापुर तक 9.35 किमी का भूमिगत मार्ग शहर की नई पहचान बन सकता है।
इसी रूट पर तैयार किया जा रहा राजेंद्र नगर मेट्रो स्टेशन बिहार का सबसे गहरा स्टेशन होगा—पूरे 21 मीटर नीचे। ऊपर चल रही राजेंद्र नगर रेलवे लाइन को प्रभावित किए बिना मेट्रो को नीचे से पार कराया जाएगा। यह स्टेशन एक “डुअल कनेक्टिविटी हब” बनेगा, जहाँ यात्री एक ही परिसर में मेट्रो से निकलकर रेलवे टर्मिनल तक पहुँच सकेंगे।
पटना जंक्शन बनेगा पूरे नेटवर्क का ‘हृदय’
पटना जंक्शन मेट्रो स्टेशन को दोनों कॉरिडोर—रेड लाइन और ब्लू लाइन—का मुख्य इंटरचेंज बनाया गया है। इससे दानापुर से खेमनीचक, न्यू ISBT से पटना जंक्शन और अन्य प्रमुख इलाकों के बीच यात्रा बेहद आसान और समयबद्ध हो जाएगी।
दिल्ली मेट्रो टीम करेगी निरीक्षण
15 जनवरी को दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) की तकनीकी टीम पटना आएगी। टीम राजेंद्र नगर, मोइनुल हक और पटना जंक्शन—इन तीन प्रमुख भूमिगत स्टेशनों का विस्तृत निरीक्षण करेगी। यह दौरा परियोजना को अंतिम मंजूरी दिलाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पटना को नई पहचान देने जा रहा है मेट्रो सिस्टम
पटना मेट्रो केवल एक परिवहन सुविधा नहीं, बल्कि राजधानी की शहरी संरचना में क्रांतिकारी बदलाव लाने वाली परियोजना है। आधुनिक, सुरक्षित और तेज़ यात्रा के साथ यह आने वाले वर्षों में शहर की लाइफस्टाइल, ट्रैफिक पैटर्न और आर्थिक गतिविधियों को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।