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मिथिला मंडन मंच, रोसड़ा की मासिक साहित्यिक बैठक सम्पन्न

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रोसड़ा। मिथिला मंडन मंच, रोसड़ा की मासिक साहित्यिक बैठक निबंधक आवास में संस्कृति और साहित्य की गरिमा से भरे माहौल में आयोजित हुई। जनकसुता जानकी के चित्र पर दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पित कर कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। मंच अध्यक्ष डॉ. प्रवीण प्रभंजन ने कहा कि रोसड़ा की धरती ने हमेशा मैथिली साहित्य को ऊर्जा दी है, और खोई हुई साहित्यिक अस्मिता को पुनर्स्थापित करना आज की प्रमुख जिम्मेदारी है। संरक्षक डॉ. भास्कर ज्योति ने बताया कि नियमित बैठकों से नवोदित, उपेक्षित और वरिष्ठ रचनाकारों को समान रूप से अभिव्यक्ति का अवसर मिल रहा है, जिससे साहित्यिक वातावरण मजबूत हो रहा है।

काव्यपाठ का दौर बेहद सजीव रहा। सुश्री डॉली ने कवि आर.सी. प्रसाद सिंह पर आधारित स्वलिखित कविता पढ़कर श्रोताओं की खूब सराहना पाई। श्री तृप्तिनारायण झा ने बाल-मन की भावनाओं को छूती कविता प्रस्तुत की, जबकि मनोज कुमार झा शशि ने मधुर स्वर में मिथिला की प्रकृति और सांस्कृतिक बिंबों से सजी कविता सुनाई। श्री चंद्रभूषण सिंह का बटगमनी गायन पूरे वातावरण को भावविभोर कर गया। 80 वर्षीय श्री त्रिलोकनाथ ने तीखे व्यंग्य से भरपूर कविता से लोगों की तालियाँ बटोरीं। वरिष्ठ साहित्यकार अनिरुद्ध झा दिवाकर ने राष्ट्रीय चेतना और मिथिला-वैभव की गौरवगाथा पर केंद्रित कविता का ओजपूर्ण पाठ किया। इसके अलावा डॉ. परमानन्द मिश्र, डॉ. भास्कर ज्योति, डॉ. प्रवीण प्रभंजन, शशिलाल झा और शेफालिका झा ने भी अपनी रचनाओं से सभा को समृद्ध किया।

समापन सत्र में श्री कृष्ण सारस्वत ने कवि कोकिल विद्यापति के विरह गीत का मार्मिक गायन किया। मंच की परंपरा अनुसार उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए सुश्री डॉली को ₹500 की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई, जिससे नवोदित रचनाकारों का मनोबल बढ़ता है।

बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए। मंच का प्रवेशांक शीघ्र प्रकाशित करने पर सहमति बनी और सभी सदस्यों से रचनाएँ आमंत्रित की जाएँगी। सहरसा लिटरेचर फेस्टिवल में सामूहिक भागीदारी तथा आने वाले वर्ष में नवयुवाओं के लिए लेखन-कविता कार्यशाला आयोजित करने का भी निर्णय हुआ। कार्यक्रम में रोसड़ा के उद्यमी कृष्ण कुमार लाखौटिया, अरविन्द ठाकुर सहित समाजसेवी एवं साहित्य-प्रेमियों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अंत में धन्यवाद ज्ञापन मंच के कोषाध्यक्ष सत्यनारायण यादव ने किया।

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Aniruddha jha 'Diwakar'

It felt the meeting very charming and interesting.All the poems and sons presented by the poets were very nice and sweets. So many thanks to them all.