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भूमाफिया–राजस्व अफसर गठजोड़ पर मुख्य सचिव का बड़ा प्रहार, बिहार भर में हड़कंप

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पटना।बिहार में वर्षों से चल रहे सरकारी जमीन के संगठित खेल पर आखिरकार सरकार की नींद टूट ही गई। बड़े पैमाने पर सरकारी भूमि को निजी व्यक्तियों के नाम कर दिए जाने, फर्जी दाखिल-खारिज और अवैध जमाबंदी के खुलासों के बाद अब शासन ने सख्त रुख अपनाया है। इस पूरे गोरखधंधे में राजस्व से जुड़े अधिकारियों और भूमाफियाओं के गठजोड़ की भूमिका सामने आने के बाद प्रशासनिक महकमे में खलबली मच गई है।

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने 19 दिसंबर को राज्य के सभी प्रमंडलीय आयुक्तों, जिलाधिकारियों, अनुमंडल पदाधिकारियों और अंचल अधिकारियों को कड़ा पत्र जारी कर सरकारी भूमि के किसी भी प्रकार के अवैध हस्तांतरण पर तत्काल ब्रेक लगा दिया है। साफ शब्दों में कहा गया है कि अब एक इंच भी सरकारी जमीन निजी हाथों में गई तो जिम्मेदार अफसरों पर कठोर कार्रवाई तय है।

मुख्य सचिव ने अपने पत्र में स्वीकार किया है कि हाल के दिनों में ऐसे कई चौंकाने वाले मामले सामने आए हैं, जिनमें सरकारी जमीन को नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए निजी व्यक्तियों और भूमाफियाओं के नाम दर्ज कर दिया गया। कहीं फर्जी दाखिल-खारिज तो कहीं अवैध तरीके से जमाबंदी कायम कर दी गई। इसे उन्होंने न सिर्फ अनियमित बल्कि पूरी तरह अनैतिक और आपराधिक कृत्य करार दिया है।

इतना ही नहीं, जांच में यह भी सामने आया है कि भूमिहीनों के नाम आवंटित जमीन, गैरमजरूआ खास, गैरमजरूआ आम, सीलिंग की भूमि और विशेष अधिकार प्राप्त व्यक्तियों के लिए निर्धारित भूखंडों तक की खरीद-फरोख्त और हस्तांतरण खुलेआम कर दिए गए। यानी जिनके हक के लिए ये जमीनें थीं, वही बेदखल हो गए और फायदा उठाया गया रसूखदारों ने।

इन खुलासों के बाद सरकार ने अवैध भू-हस्तांतरण की समीक्षा कर बड़ा फैसला लिया है। मुख्य सचिव ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे सभी मामलों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगेगी और इसमें शामिल कर्मियों को कठोर दंड दिया जाएगा, चाहे वे किसी भी स्तर के अधिकारी क्यों न हों।

पांच सख्त निर्देश, अब नहीं चलेगी मनमानी

मुख्य सचिव ने इस मामले में पांच अहम निर्देश जारी किए हैं। पहला— बिना सरकार की अनुमति के किसी भी सरकारी भूमि का हस्तांतरण या आवंटन नहीं होगा। दूसरा— भूमि हस्तांतरण के मामलों में विभागीय नियमों के तहत कैबिनेट की मंजूरी अनिवार्य होगी। तीसरा— जो मामले निचले स्तर पर लंबित हैं, उन्हें सीधे उच्च अधिकारी या आयुक्त की मंजूरी के बिना आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट और पटना हाईकोर्ट के पूर्व आदेशों पर यह नई प्रक्रिया लागू नहीं होगी, लेकिन 2014 में राजस्व विभाग द्वारा जारी परिपत्रों का सख्ती से पालन कराने का आदेश दिया गया है।

भूमाफियाओं पर नकेल, अफसरों की बढ़ी बेचैनी

सरकार ने यह भी साफ कर दिया है कि राज्य में सरकारी भूमि का लैंड बैंक बनाया जाएगा, जो औद्योगिकीकरण के लिए बेहद जरूरी है। इसके तहत सभी जिलों में समाहर्ता स्तर पर लैंड बैंक पोर्टल तैयार किया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे जमीन के खेल में शामिल कई चेहरे बेनकाब हो सकते हैं।

सरकारी जमीन की इस लूट पर अब कार्रवाई का डंडा चलने वाला है। सवाल सिर्फ इतना है— क्या यह कार्रवाई कागजों तक सीमित रहेगी या वाकई भूमाफिया और उनके सरपरस्त अफसरों पर गाज गिरेगी? फिलहाल मुख्य सचिव के पत्र से बिहार के राजस्व महकमे में खौफ का माहौल जरूर बन गया है।

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