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नबीनगर NTPC में भीषण अग्निकांड, कूलिंग टावर ध्वस्त—कई किलोमीटर दूर तक दिखा धुएं का साया

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औरंगाबाद जिले के अंकोरहा स्थित एनटीपीसी नबीनगर पावर प्लांट में शुक्रवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब सीटी-1बी कूलिंग टावर अचानक आग की चपेट में आ गया। कुछ ही पलों में आग इतनी भयानक हो गई कि काले धुएं का विशाल गुबार कई किलोमीटर दूर से नजर आने लगा। इससे न सिर्फ प्लांट परिसर, बल्कि आसपास के गांवों में भी दहशत का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आग की शुरुआत कूलिंग टावर के ऊपरी हिस्से से हुई और तेज हवा के साथ नीचे की ओर फैलती चली गई। टावर में इस्तेमाल की गई प्लास्टिक और फाइबर सामग्री ने आग को और भड़काने का काम किया। सूचना मिलते ही एनटीपीसी की फायर सेफ्टी यूनिट हरकत में आई और स्थानीय दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। करीब तीन घंटे तक चले रेस्क्यू और फायरफाइटिंग ऑपरेशन के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक कूलिंग टावर का बड़ा हिस्सा पूरी तरह जल चुका था।

करोड़ों की क्षति, बिजली उत्पादन पर असर की आशंका

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार इस हादसे में करोड़ों रुपये के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। कूलिंग टावर बिजली उत्पादन की अहम कड़ी होता है, ऐसे में इसके क्षतिग्रस्त होने से प्लांट के उत्पादन पर अस्थायी असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि राहत की बात यह रही कि समय रहते सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

जांच के आदेश, सुरक्षा व्यवस्था कटघरे में

आग लगने की वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं है। शुरुआती तौर पर शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। एनटीपीसी प्रबंधन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। घटना के बाद प्लांट की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों और मजदूर संगठनों ने भविष्य में ऐसे हादसों से बचाव के लिए सुरक्षा मानकों को और सख्त करने की मांग की है। वहीं, प्लांट प्रशासन फिलहाल मीडिया के सामने खुलकर बोलने से बचता नजर आ रहा है।

नबीनगर NTPC में हुआ यह हादसा एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा इंतजामों की गंभीरता पर सवाल खड़ा करता है। अब सबकी नजरें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो बताएगी कि यह हादसा लापरवाही का नतीजा था या तकनीकी मजबूरी।

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