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मधेपुरा में सरहदें टूटीं, रिश्ते जुड़े: जापान से बिहार तक प्रेम की अनोखी कहानी

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मधेपुरा जिले के पुरैनी प्रखंड अंतर्गत रौता गांव इन दिनों एक अनोखे कारण से चर्चा में है। गांव के बेटे राहुल कुमार और जापान की युवती मारिया के विवाह ने यह साबित कर दिया कि सच्चे रिश्तों के लिए न दूरी मायने रखती है और न ही भाषा।

रौता गांव निवासी राहुल कुमार आईआईटी से शिक्षित इंजीनियर हैं और वर्ष 2020 से जापान की राजधानी टोक्यो में होंडा कंपनी में सीनियर इंजीनियर के रूप में कार्यरत हैं। वहीं एक बहुराष्ट्रीय कंपनी में ग्लोबल सेल्स मैनेजर के पद पर कार्य कर रही मारिया से उनकी मुलाकात हुई। पेशेवर जान-पहचान से शुरू हुआ यह संबंध धीरे-धीरे आपसी विश्वास और प्रेम में बदल गया।

दो संस्कृतियों की सहमति से हुआ विवाह

करीब दो वर्षों के संबंध के बाद दोनों परिवारों की रजामंदी से नवंबर माह में जापान में विवाह संपन्न हुआ। विशेष बात यह रही कि विवाह समारोह में पहले जापानी परंपराओं का निर्वहन किया गया, इसके बाद बिहारी रीति-रिवाजों के अनुसार रस्में पूरी की गईं। विवाह के लिए आमंत्रण पत्र भी पारंपरिक भारतीय शैली में तैयार कराया गया, जिसमें दूल्हा-दुल्हन दोनों परिवारों का उल्लेख किया गया था।

ससुराल पहुंचते ही बनीं गांव की बहू

विवाह के बाद जब राहुल अपनी पत्नी मारिया को लेकर रौता गांव पहुंचे तो ग्रामीणों में उत्सुकता देखने लायक थी। आसपास के गांवों से भी लोग विदेशी बहू को देखने पहुंचे। साड़ी में सजी मारिया ने घर के बुजुर्गों का सम्मान करते हुए आशीर्वाद लिया। हिंदी भाषा से अनभिज्ञ होने के बावजूद उन्होंने भारतीय अभिवादन शैली अपनाकर सभी का दिल जीत लिया।

प्रीतिभोज में उमड़ा जनसैलाब

राहुल के पिता सुदिष्ट यादव के आवास पर आयोजित प्रीतिभोज कार्यक्रम में उत्सव का माहौल रहा। युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक, हर वर्ग में इस अनोखे विवाह को लेकर खास उत्साह देखा गया। विदेशी बहू को अपनाने की ग्रामीणों की सहजता और स्नेह ने यह दिखा दिया कि परंपरा और आधुनिकता एक साथ चल सकती हैं।

यह विवाह न केवल दो व्यक्तियों का मिलन है, बल्कि दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच विश्वास और अपनापन स्थापित करने का प्रतीक भी बन गया है।

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