:
Breaking News

मेयर का नॉमिनेशन खत्म, पार्षद चुनेंगे स्थायी समिति

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

बिहार की शहरी राजनीति में सत्ता संतुलन को नए सिरे से परिभाषित करने वाला फैसला नीतीश कुमार सरकार ने ले लिया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक को मंजूरी मिलते ही नगर निकायों की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव तय हो गया है। अब नगर निगमों, नगर परिषदों और नगर पंचायतों में सशक्त स्थायी समिति का गठन किसी एक पदाधिकारी की पसंद से नहीं, बल्कि निर्वाचित पार्षदों के लोकतांत्रिक मत से होगा।
अब तक स्थायी समिति के सदस्यों का चयन महापौर या मुख्य पार्षद के नामांकन से होता था। इस व्यवस्था को लेकर लंबे समय से मनमानी, पक्षपात और एकतरफा फैसलों के आरोप लगते रहे हैं। संशोधन विधेयक के बाद यह अध्याय समाप्त होने जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत नगर निकायों के सभी निर्वाचित सदस्य मतदाता होंगे और गुप्त मतदान के जरिए स्थायी समिति का चुनाव किया जाएगा। इससे निर्णय प्रक्रिया में सामूहिकता और पारदर्शिता दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार के इस कदम को शहरी निकायों में “एकछत्र नेतृत्व” पर लगाम के तौर पर देखा जा रहा है। अब विकास योजनाओं का चयन, फंड का वितरण और नीतिगत फैसले किसी एक चेहरे के इशारे पर नहीं, बल्कि बहुमत की राय से तय होंगे। इससे अलग-अलग वार्डों और क्षेत्रों की भागीदारी बढ़ेगी और अंदरूनी खींचतान कम होने की संभावना है।
नए प्रावधानों के मुताबिक, स्थायी समिति के चुनाव की पूरी प्रक्रिया जिला पदाधिकारी (DM) के पर्यवेक्षण, निर्देशन और नियंत्रण में होगी। नगर विकास एवं आवास विभाग समय-समय पर इससे जुड़ी विस्तृत गाइडलाइन जारी करेगा, ताकि चुनाव निष्पक्ष और नियमसम्मत तरीके से संपन्न हो सके। गुप्त मतदान की व्यवस्था होने से पार्षदों पर किसी तरह के दबाव या प्रभाव की गुंजाइश भी कम होगी।
कैबिनेट बैठक में एक और अहम फैसला लेते हुए सरकार ने जिलास्तरीय विकास बैठकों में सांसदों और विधायकों की भूमिका को भी स्पष्ट और मजबूत किया है। अब संबंधित जिले के सांसद और विधायक, या उनके प्रतिनिधि, इन बैठकों में शामिल होंगे। सरकार का मानना है कि इससे शहरी विकास योजनाओं के चयन और क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित होगी और योजनाएं जमीनी जरूरतों के अनुरूप बनेंगी।
सरकार इस संशोधन विधेयक को चालू बजट सत्र में ही विधानमंडल से पारित कराकर कानून का रूप देने की तैयारी में है। कानून बनते ही बिहार के शहरी निकायों में नई व्यवस्था लागू हो जाएगी। कुल मिलाकर, यह फैसला शहरी स्थानीय स्वशासन को अधिक लोकतांत्रिक, संतुलित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *