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सिपाही भर्ती परीक्षा में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर, पटना में सॉल्वर गैंग धराया, लाखों की डील और नकली फिंगरप्रिंट का खेल

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पटना।बिहार सिपाही भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता को चुनौती देने वाला एक संगठित फर्जीवाड़ा पटना में सामने आया है। शारीरिक दक्षता परीक्षा के दौरान पुलिस ने एक सॉल्वर गिरोह का पर्दाफाश करते हुए तीन सक्रिय सदस्यों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई ने साफ कर दिया है कि नौकरी के नाम पर अभ्यर्थियों से लाखों रुपये वसूलने का एक पूरा नेटवर्क लंबे समय से सक्रिय था, जो तकनीक और साजिश के जरिए परीक्षा प्रणाली को गुमराह करने की कोशिश कर रहा था।
गिरफ्तारी गर्दनीबाग थाना क्षेत्र स्थित राजकीय उच्च विद्यालय के पास हुई, जहां सिपाही भर्ती की शारीरिक दक्षता परीक्षा चल रही थी। पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि कुछ बिचौलिये परीक्षा पास कराने के नाम पर अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूल रहे हैं। इसी इनपुट पर पुलिस ने गेट के आसपास निगरानी बढ़ाई। इसी दौरान तीन संदिग्ध युवक पुलिस को देखकर भागने लगे, जिन्हें तत्परता दिखाते हुए दबोच लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान खगड़िया निवासी संजीव कुमार, भोजपुर निवासी राहुल सिंह और न्यू अनिसाबाद निवासी संतोष कुमार के रूप में हुई है। तलाशी और मोबाइल जांच में चौंकाने वाले सबूत सामने आए। तीनों के फोन से 45 अभ्यर्थियों के एडमिट कार्ड की तस्वीरें, आपसी चैट, वॉकी-टॉकी से जुड़ी जानकारियां और पैसों के लेनदेन का पूरा हिसाब बरामद हुआ है। इससे यह स्पष्ट हुआ कि गिरोह योजनाबद्ध तरीके से अभ्यर्थियों को जाल में फंसा रहा था।
जांच के दौरान पुलिस ने दो ऐसे अभ्यर्थियों को भी गिरफ्तार किया है, जो शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल होने पहुंचे थे, लेकिन लिखित परीक्षा में उनकी जगह सॉल्वर बैठाए गए थे। दोनों से पूछताछ में कई अहम जानकारियां सामने आने की उम्मीद है। पुलिस अब यह भी खंगाल रही है कि इन अभ्यर्थियों के अलावा और कितने उम्मीदवार इस गिरोह के संपर्क में थे।
डीएसपी सचिवालय-1 डॉ. अनु कुमारी के अनुसार, शुरुआती जांच में यह सामने आया है कि गिरोह दो स्तर पर सौदे करता था। सिर्फ लिखित परीक्षा पास कराने के लिए प्रति अभ्यर्थी पांच से छह लाख रुपये वसूले जाते थे, जबकि लिखित के साथ शारीरिक दक्षता परीक्षा भी पास कराने की डील 10 लाख रुपये तक में तय होती थी। रकम का एक हिस्सा पहले और शेष परिणाम के बाद लिया जाता था।
जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि गिरोह बायोमेट्रिक जांच को चकमा देने के लिए कोलकाता से विशेष तकनीक के जरिए नकली फिंगरप्रिंट तैयार कराता था। लिखित परीक्षा में जिस व्यक्ति को अभ्यर्थी की जगह बैठाया जाता था, उसी का फिंगरप्रिंट बनवाकर शारीरिक दक्षता परीक्षा से पहले अभ्यर्थी की उंगली पर लगाया जाता था, ताकि मिलान के दौरान गड़बड़ी न पकड़ी जा सके। इसी साजिश को अंजाम देने के लिए आरोपी परीक्षा स्थल के आसपास मौजूद थे।
पुलिस का कहना है कि मोबाइल में मिले एडमिट कार्ड के आधार पर अब उन सभी अभ्यर्थियों की पहचान की जा रही है, जो इस गिरोह के संपर्क में थे। यह भी जांच की जा रही है कि वे लिखित परीक्षा में सफल हुए थे या नहीं और शारीरिक दक्षता परीक्षा में शामिल हुए या नहीं। लेनदेन से जुड़े डिजिटल साक्ष्यों का सत्यापन भी किया जा रहा है।
लगातार सामने आ रहे बायोमेट्रिक फर्जीवाड़े के मामलों को देखते हुए चयन आयोग और जिला प्रशासन पहले से सतर्क था। इसी सतर्कता के चलते पुलिस को विशेष निगरानी में लगाया गया, जिसका नतीजा यह बड़ी कार्रवाई बनी। पुलिस ने साफ किया है कि इस नेटवर्क से जुड़े सभी लोगों को चिन्हित कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शुरुआती संकेत बताते हैं कि आने वाले दिनों में इस सिपाही भर्ती घोटाले में कई और बड़े नाम सामने आ सकते हैं।

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