पटना।बिहार में राजस्व अधिकारियों की हड़ताल को लेकर राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि प्रशासनिक कार्यों में किसी भी तरह का व्यवधान स्वीकार नहीं किया जाएगा। उपमुख्यमंत्री एवं राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने हड़ताल पर गए सभी अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों को 9 फरवरी तक अनिवार्य रूप से ड्यूटी पर लौटने का निर्देश दिया है।
डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने साफ शब्दों में कहा कि जो अधिकारी निर्धारित समय सीमा के भीतर योगदान नहीं करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी अनुशासनिक कार्रवाई की जाएगी। हालांकि उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सरकार राजस्व अधिकारियों की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने को तैयार है और इस दिशा में ठोस पहल की जा रही है।
सरकार की ओर से यह भी घोषणा की गई है कि राजस्व अधिकारियों के कार्य, अधिकार और दायित्वों की समीक्षा के लिए गठित तीन सदस्यीय समिति की बैठक शीघ्र आयोजित की जाएगी। यह समिति अपनी विस्तृत रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा। उपमुख्यमंत्री ने बताया कि कई जिलों में अधिकारी पहले ही ड्यूटी पर लौट चुके हैं, जिसे सरकार ने सकारात्मक संकेत माना है।
विजय सिन्हा ने कहा कि सरकार स्तर से सभी अंचल अधिकारियों से तत्काल प्रभाव से योगदान देने की अपील की गई है। जो अधिकारी अब तक अनुपस्थित हैं, उन्हें सोमवार को हर हाल में कार्यभार संभालना होगा। सोमवार को प्रधान सचिव सी.के. अनिल और सचिव जय सिंह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सभी जिलों की स्थिति की समीक्षा करेंगे।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईमानदारी और मेहनत से काम करने वाले अधिकारियों के सम्मान में सरकार कभी कमी नहीं करेगी। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे राज्य सरकार की प्राथमिक योजनाओं—एग्रीस्टैक महाअभियान, ई-मापी महाअभियान और राजस्व महाअभियान—को सर्वोच्च प्राथमिकता पर पूरा करें। इन अभियानों का सीधा लाभ आम जनता को मिलेगा, इसलिए इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपमुख्यमंत्री ने सभी हल्का कर्मचारियों से भी अपील की कि वे किसी के बहकावे में न आएं और जनता के भरोसे पर खरा उतरते हुए पूरे समर्पण के साथ अपने दायित्व निभाएं। उन्होंने कहा कि 31 मार्च तक विभाग के लिए जो सुधारात्मक लक्ष्य तय किए गए हैं, उनकी बेहतर उपलब्धि से सभी को लाभ मिलेगा। उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि कृषि मंत्री रहते हुए बेहतर प्रदर्शन करने वाले कृषि समन्वयकों को रिकॉर्ड वेतन वृद्धि का लाभ दिया गया था, और ऐसा ही अवसर राजस्व कर्मियों के सामने भी है।
वहीं, प्रधान सचिव सी.के. अनिल ने कहा कि विजय कुमार सिन्हा के नेतृत्व में चल रहे भूमि सुधार और जनकल्याण संवाद कार्यक्रमों से विभाग की छवि में लगातार सुधार हुआ है और जनता का भरोसा बढ़ा है। उन्होंने दो टूक कहा कि इन प्रयासों में किसी भी तरह का व्यवधान स्वीकार नहीं किया जाएगा। विभाग में सुधार की प्रक्रिया जारी रहेगी और 31 मार्च तक तय लक्ष्यों को पूरा करना सभी अधिकारियों और कर्मचारियों की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
संपादकीय दृष्टि
राजस्व विभाग राज्य प्रशासन की रीढ़ है और इससे जुड़े अधिकारी सीधे आम जनता के रोजमर्रा के कामकाज से जुड़े होते हैं। ऐसे में हड़ताल का असर सिर्फ सरकार पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ता है। सरकार का यह दायित्व है कि वह अधिकारियों की वास्तविक समस्याओं को गंभीरता से सुने और समयबद्ध समाधान निकाले, वहीं अधिकारियों से भी यह अपेक्षा की जाती है कि वे जनहित को सर्वोपरि रखते हुए संवाद और व्यवस्था के दायरे में रहकर अपनी बात रखें। मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार और साथ ही काम में व्यवधान न होने देने का संतुलन ही इस पूरे विवाद का स्थायी समाधान हो सकता है।