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जन्मदिन की खुशियां मातम में बदलीं, अमनौर में आठवीं की छात्रा की संदिग्ध आत्महत्या से इलाके में शोक

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छपरा।सारण जिले के अमनौर थाना क्षेत्र से एक बेहद मार्मिक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। अमनौर हरनारायण पंचायत के ब्लॉक रोड स्थित पेट्रोल पंप के पास रहने वाली आठवीं कक्षा की 14 वर्षीय छात्रा खुशबू कुमारी की मौत ने पूरे इलाके को स्तब्ध कर दिया है। खास बात यह है कि जिस दिन यह घटना हुई, उसी दिन छात्रा का जन्मदिन भी था।
मृत छात्रा खुशबू कुमारी स्थानीय निवासी एवं पेशे से प्लंबर कारीगर हीरा लाल शर्मा की बड़ी बेटी थी। वह तीन बहनों और एक भाई में सबसे बड़ी थी और पढ़ाई में होनहार मानी जाती थी। परिजनों के अनुसार, जन्मदिन के अवसर पर उसके हाथों में मेहंदी रची हुई थी, लेकिन कुछ ही घंटों में घर की खुशियां गहरे मातम में बदल गईं।
घटना के समय खुशबू के पिता काम के सिलसिले में घर से बाहर गए हुए थे। घर में छोटे बच्चे मौजूद थे। इसी दौरान पड़ोसियों को घर के अंदर से असामान्य आवाज सुनाई दी। लोगों ने तत्काल घर पहुंचकर छात्रा को नीचे उतारा और इसकी सूचना पुलिस को दी।
मामले की जानकारी मिलते ही अमनौर थाना पुलिस मौके पर पहुंची। मढ़ौरा के डीएसपी नरेश पासवान और इंस्पेक्टर नागेंद्र सहनी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। बाद में एफएसएल की टीम ने भी साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस के अनुसार, छात्रा के गले पर रस्सी के हल्के निशान पाए गए हैं, जिससे प्रथम दृष्टया मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि घटना से एक दिन पहले किसी बात को लेकर खुशबू का मोबाइल फोन टूट गया था और उसे डांट भी पड़ी थी। हालांकि पुलिस का कहना है कि इस घटना को सीधे आत्महत्या के कारण से जोड़कर देखना अभी जल्दबाजी होगी। वास्तविक वजह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगी।
मां की मौत के बाद बदली थी जिंदगी
परिजनों ने बताया कि खुशबू की मां का करीब एक साल पहले बीमारी के कारण निधन हो गया था। इसके बाद घर की जिम्मेदारियों का बोझ भी काफी हद तक उसी पर आ गया था। मां के न रहने से वह मानसिक रूप से भी संवेदनशील रहने लगी थी।
घटना की जानकारी मिलने के बाद जब पिता घर पहुंचे और बेटी को इस हालत में देखा, तो वे बदहवास हो गए। पुलिस ने पिता के बयान के आधार पर शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए छपरा सदर अस्पताल भेज दिया है।
फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि इस दुखद घटना के पीछे कौन-कौन से कारण जिम्मेदार रहे।

संपादकीय दृष्टि
किशोर उम्र में लिया गया कोई भी चरम कदम पूरे समाज के लिए आत्ममंथन का विषय होना चाहिए। खुशबू की मौत यह संकेत देती है कि पढ़ाई के दबाव, पारिवारिक परिस्थितियां और भावनात्मक सहारे की कमी किस तरह मासूम मन पर गहरा असर डाल सकती है। जरूरत इस बात की है कि परिवार, स्कूल और समाज मिलकर बच्चों की मानसिक स्थिति को समझें, उनसे संवाद बढ़ाएं और समय रहते सहयोग का हाथ बढ़ाएं, ताकि कोई और जन्मदिन इस तरह मातम में न बदले।

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