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बिहार बंगला विवाद पर सम्राट चौधरी का बड़ा बयान: 24 घंटे में सरकारी आवास छोड़ दूंगा, पद स्थायी नहीं

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बिहार में बंगला विवाद के बीच सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं है और जरूरत खत्म होने पर वह 24 घंटे में इसे छोड़ देंगे।

पटना/बिहार/आलम की खबर:बिहार की राजनीति एक बार फिर सरकारी आवास और बंगला विवाद को लेकर गर्म हो गई है। इस बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने एक बड़ा और सख्त बयान देकर राजनीतिक हलचल और तेज कर दी है। उन्होंने साफ कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होती और पद से हटते ही उसे छोड़ देना चाहिए।

शेखपुरा में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि वह उन नेताओं में नहीं हैं जिन्हें सरकारी बंगले या सुविधाओं से विशेष लगाव हो। उन्होंने कहा कि जिस दिन पार्टी और नेतृत्व यह तय कर देगा कि उनकी जिम्मेदारी समाप्त हो गई है, वह 24 घंटे के भीतर सरकारी आवास छोड़कर अपने निजी घर लौट जाएंगे।

उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर सियासी विवाद पहले से ही चर्चा में है। इस मुद्दे पर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे राजनीतिक माहौल और अधिक गरमा गया है।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि लोकतंत्र में पद स्थायी नहीं होते और न ही सरकारी सुविधाएं किसी की निजी संपत्ति होती हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन में हमेशा सेवा को प्राथमिकता दी है, न कि पद या आवास को।

उन्होंने यह भी कहा कि जब वह मुख्यमंत्री बने थे, तो उन्होंने अधिकारियों से यह सुनिश्चित करने को कहा था कि सरकारी आवास पर यह स्पष्ट लिखा जाए कि यह जनता की सेवा का केंद्र है, न कि किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति। उनके अनुसार, यह सोच ही लोकतंत्र की असली भावना को दर्शाती है।

अपने राजनीतिक सफर का उल्लेख करते हुए सम्राट चौधरी ने कहा कि वह लंबे समय तक मंत्री, उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहे हैं, लेकिन उन्होंने कभी सरकारी आवास या सुविधाओं को प्राथमिकता नहीं दी। उन्होंने यह भी बताया कि अब तक वह कई सरकारी आवासों में रह चुके हैं और वर्तमान आवास उनका ग्यारहवां सरकारी आवास है।

बिना किसी का नाम लिए उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधा और कहा कि कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें केवल अपने आवास और परिवार की सुविधाओं की चिंता रहती है, जबकि उनकी सरकार जनता के हितों को सर्वोपरि मानती है।

उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनप्रतिनिधियों का असली कर्तव्य जनता की सेवा करना है, न कि सरकारी सुविधाओं से चिपके रहना। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल विकास और सुशासन है और इसी दिशा में लगातार काम किया जा रहा है।

सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि बिहार में विकास की प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी और उनकी सरकार जनता के हितों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में जनता सबसे बड़ी शक्ति होती है और हर जनप्रतिनिधि को उसके प्रति जवाबदेह रहना चाहिए।

उनके इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है और बंगला विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। राजनीतिक विशेषज्ञ इसे आने वाले दिनों में और तेज होने वाली सियासी हलचल का संकेत मान रहे हैं।

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