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Patna Crime: बिहटा के पूर्व मुखिया संजय यादव की संदिग्ध मौत, छह लोगों पर हत्या का केस दर्ज

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Alam Ki Khabar: पटना के बिहटा में राघोपुर पंचायत के पूर्व मुखिया संजय यादव की संदिग्ध मौत मामले में छह लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस जमीन विवाद समेत सभी पहलुओं की जांच कर रही है।

पटना, 12 जुलाई। आलम की खबर: पटना जिले के बिहटा थाना क्षेत्र अंतर्गत राघोपुर पंचायत के पूर्व मुखिया संजय यादव की संदिग्ध मौत के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। मृतक के पुत्र सोनल कुमार की शिकायत पर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज कर जांच तेज कर दी है। मामले में जमीन विवाद और पूर्व से मिल रही धमकियों को भी जांच का अहम हिस्सा बनाया गया है।

पुलिस को दिए आवेदन में सोनल कुमार ने आरोप लगाया है कि उनके पिता राजनीति के साथ-साथ जमीन के कारोबार से भी जुड़े थे। इसी कारण कई लोगों से उनका विवाद चल रहा था और उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही थीं। परिजनों का दावा है कि इन्हीं परिस्थितियों के कारण संजय यादव अक्सर घर से बाहर रहते थे।

दर्ज प्राथमिकी में गुड्डू यादव, रविराज सिंह, मनीष सिंह, करुणा शंकर मिश्रा, भोला मिश्रा और प्रभा शंकर मिश्रा को नामजद आरोपी बनाया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सभी ने सुनियोजित साजिश के तहत वारदात को अंजाम दिया। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

जांच के दौरान करीब 52 कट्ठा जमीन से जुड़े विवाद को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। परिजनों ने पुलिस को बताया है कि इस जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि इस मामले में कुछ प्रभावशाली लोगों की भूमिका हो सकती है, हालांकि पुलिस ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

घटना के बाद पाटलिपुत्र सांसद मीसा भारती भी राघोपुर पहुंचीं और शोकाकुल परिवार से मुलाकात कर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए राज्य की कानून-व्यवस्था पर भी सवाल उठाए।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले के हर पहलू की गहन जांच की जा रही है। वैज्ञानिक साक्ष्यों, गवाहों के बयान और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी होने के बाद ही मौत के कारण और जिम्मेदार लोगों की भूमिका पर अंतिम स्थिति स्पष्ट होगी।

जांच के बाद ही सामने आएगी पूरी सच्चाई

यह मामला फिलहाल जांच के अधीन है। प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी। ऐसे मामलों में निष्पक्ष जांच और ठोस साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई ही न्याय सुनिश्चित करने का सबसे महत्वपूर्ण आधार है।

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