अमेरिकी राजनीति में एक बार फिर डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा धमाका कर दिया है। उन्होंने नाइजीरिया को ईसाई धर्म के लिए अस्तित्वगत खतरा बताते हुए उसे “Countries of Particular Concern (CPC)”, यानी विशेष चिंता वाले देशों की सूची में डाल दिया है।ट्रंप ने अपने Truth Social अकाउंट पर लिखा कि नाइजीरिया में हज़ारों ईसाइयों की हत्या की जा रही है और कट्टरपंथी ताकतें वहां नरसंहार चला रही हैं। उन्होंने कहा ,जब निर्दोष लोग सिर्फ़ अपने धर्म के कारण मारे जा रहे हों, तो अमेरिका चुप नहीं रह सकता। अब ठोस कार्रवाई का वक्त है।ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस की विनियोग समिति और सांसदों रिले मूर व टॉम कोल से इस मुद्दे की गहराई से जांच करने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ शुरुआत है, आगे अमेरिका नाइजीरिया पर आर्थिक या कूटनीतिक दबाव भी बना सकता है।
नाइजीरिया की सफाई: “हमारे यहां धर्म पूरी तरह आज़ाद”
नाइजीरिया सरकार ने ट्रंप के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि उनके देश में धार्मिक स्वतंत्रता पूरी तरह सुरक्षित है। सरकार का दावा है कि वह किसी भी धर्म या समुदाय के खिलाफ हिंसा को बर्दाश्त नहीं करती।ध्यान देने वाली बात यह है कि अमेरिका ने 2020 में भी नाइजीरिया को इसी सूची में रखा था, लेकिन 2023 में उसे हटा दिया गया था। अब ट्रंप के नेतृत्व में उसे फिर से इसमें शामिल किया गया है, यह कहते हुए कि ईसाई समुदाय पर हमले बढ़ गए हैं।
हिंसा के पीछे कौन?
मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्ट बताती है कि सिर्फ पिछले साल ही 4,000 से अधिक ईसाइयों की हत्या हुई और 2,000 से ज्यादा चर्चों को निशाना बनाया गया।इन हमलों के पीछे दो बड़े आतंकी संगठन माने जा रहे हैं ,बोको हराम (BokoHaram) और फुलानी मिलिशिया (Fulani Militia)। ये समूह ग्रामीण इलाकों में लगातार हमले कर रहे हैं और हजारों लोगों को घर छोड़ने पर मजबूर कर चुके हैं।
‘विशेष चिंता’ का मतलब क्या है?
अमेरिकी International Religious Freedom Act (IRFA) के तहत किसी देश को तब “विशेष चिंता वाला देश” कहा जाता है, जब वहां धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन हो। ऐसे देशों पर अमेरिका आर्थिक प्रतिबंध, व्यापारिक सीमाएं या राजनयिक दबाव जैसे कदम उठा सकता है।
अगला कदम क्या हो सकता है?
अमेरिका अब नाइजीरिया में धार्मिक हिंसा पर विस्तृत रिपोर्ट तैयार करेगा। इसके बाद ट्रंप प्रशासन यह तय करेगा कि क्या प्रतिबंध लगाए जाएं या राजनयिक स्तर पर दबाव बनाया जाए।विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम सिर्फ नाइजीरिया तक सीमित नहीं है,यह अफ्रीका में ट्रंप की नई धार्मिक स्वतंत्रता नीति का हिस्सा है, जिसमें ईसाई समुदाय की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।ट्रंप ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला उन्हें मंजूर नहीं — और नाइजीरिया अब उनके निशाने पर है।